आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका पद पर नियुक्ति में साठगांठ के आरोप

भर्ती प्रक्रिया में दलालों की सक्रियता चर्चा में

कूटरचित दस्तावेजो से नियुक्ति के आरोप, कार्रवाई की मांग

बैगांचल एक्प्रेस, डिंडौरी, जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओ की भर्ती प्रक्रिया में अब तक दावे और आपत्तियों का दौर जारी है। आवेदन पश्चात परियोजना स्तर से वरीयता सूची तैयार कर जिला स्तरीय समिति के द्वारा चयन प्रक्रिया के बाद नियुक्ति प्रदान की जाना है। सूची जारी होने के बाद दावा आपत्ति भी प्रस्तुत किये जा रहे हैं, जिन पर जिला स्तरीय समिति द्वारा निराकरण किया जा रहा है। बावजूद इसके चयन में आवेदन कर्ताओं द्वारा भेदभाव और चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े किये जा रहे हैं। जिसकी शिकायत कलेक्टर से करते हुए निराकरण की मांग की गई है। शिकायत करने वालों का आरोप है कि पात्रता के बाद भी उन्हें नियुक्ति प्रदान नहीं की गई है और कूटरचित दस्तावेज से अपात्रों को पात्र करार देते हुए नियुक्ति प्रदान कर दी गई है।

गौरतलब है कि जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के 59 पद एवं सहायिका के 348 पदों में नियुक्ति होना था। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के 59 पदों की नियुक्ति सूची जारी होने के बाद 42 नियुक्तियों में आपत्ति दर्ज कराई गई। वहीं सहायिका की 348 नियुक्तियों में 203 में आपत्ति दर्ज की गई जिन आपत्तियों में जिला स्तर समिति द्वारा सुनवाई की गई और फिलहाल कार्यकर्ता के 5 और सहायिका के 111 पदों की नियुक्ति का निराकरण होना बाकी बताया जा रहा है। जिला स्तरीय समिति द्वारा नियुक्ति प्रक्रिया और दावा आपत्ति के निराकरण के लिए 17 अक्टूबर 2025 से 10 दिसंबर 2025 तक जिला पंचायत सभागार में जिला स्तरीय समिति की बैठक आहूत की गई। हालांकि समिति द्वारा निराकरण करने के पश्चात भी जिन आवेदकों की नियुक्ति नहीं हुई उनके द्वारा असहमति जताते हुये नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल खड़े किये जा रहे हैं।

शासकीय कर्मचारी की पुत्री को दिया गया बीपीएल का लाभ

परियोजना डिंडोरी अंतर्गत चुरिया में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का पद हेतु 12 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था जिसमें नेहा पिता कवल सिंह और आशा देवी यादव शामिल थीं, लेकिन नेहा का चयन किया गया। जिस पर आश देवी यादव ने नेहा के द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज में आपत्ति दर्ज करते हुये कलेक्टर से शिकायत की है कि नेहा की मां श्रीमती पार्वती पाटले उप स्वास्थ्य केन्द्र खरगवारा विकास खंड मेंहदवानी में एएनएम के पद पर पदस्थ हैं। बावजूद इसके बीपीएल का प्रमाण पत्र नियुक्ति के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों में संलग्न किया गया है जिसके आधार पर 5 अंक बीपीएल के प्रदान किये गये हैं जबकि नेहा अविवाहित है और संयुक्त परिवार में निवासरत हैं, अभ्यर्थी नेहा की मां नियमित शासकीय कर्मचारी है इसके बावजूद भी नियुक्ति में बीपीएल का लाभ प्रदान किया गया।

सहायिका की नियुक्ति में भी गडबडी के आरोप

विगत दिनों कलेक्टर कार्यालय में की गई शिकायतों में आंगनबाड़ी सहायिका पद हेतु परियोजना समनापुर अंतर्गत कंचनपुर के तितराही गांव की निवासी सियावती ने शिकायत में उल्लेख किया है कि बैगा जनजाति से आती हैं और विगत 2-3 वर्षों से आंगनबाड़ी केंद्र में सहायिका के तौर पर अपनी सेवाएं दे रही थीं नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान अनुभव का लाभ नहीं दिया गया और अन्य अभ्यर्थी की नियुक्ति कर दी गई। वहीं बजाग तहसील अंतर्गत पिपरिया निवासी प्रेमबाई पति गुरूगोविंद सिंह जाति बैगा ने भी सहायिका के पद में आवेदन किया था लेकिन उसे अपात्र घोषित कर दिया गया। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2022-23 में उसका विवाह पिपरिया निवासी गुरू गोविंद सिंह से हुआ था और स्थाई प्रमाण पत्र भी पिपरिया के नाम से जारी हुआ बावजूद इसके अमान्य कर दिया गया। डिंडौरी अंतर्गत छिंदगांव माल निवासी सुषमा धूमकेती ने भी आरोप लगाया है कि जिस महिला का आंगनबाड़ी सहायिका के तौर पर चयन किया गया है उसका बीपीएल सर्वे सूची में नाम ही दर्ज नहीं है जिस वार्ड में आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित है वहां की निवासी भी नहीं है। इसी तरह मेंहदवानी विकासखंड अंतर्गत राई में सहायिका पद के लिए आवेदन करने वाली नवलवती मसराम ने कलेक्टर को की गई शिकायत में उल्लेख किया है कि सहायिका के पद में तुलसी धूमकेती का चयन किया गया है जो जाति से गोंड है लेकिन बैगा जनजाति का प्रमाण पत्र फर्जी तरीके से प्रस्तुत कर किया है। इस बावद ग्राम पंचायत द्वारा भी दिये गये पंचनामा में तुलसी धूमकेती की जाति गौंड बताई गई है।

माफियाओं की सक्रियता से प्रभावित हुई भर्तियां, बड़े चेहरे होगे बेनकाब

आंगनवाड़ी सहायिकाओं और कार्यकर्ताओं की भर्तियों में कई छूटभैया नेताओं और जनप्रतिनिधियों के द्वारा लोगों से पैसा वसूले जाने की चर्चा है। बताया यह भी जा रहा है कि जिन स्थानों पर नियुक्ति की अंतिम सूची जारी हो चुकी है वहां जिन लोगों ने कथित लोगों को पैसे दे दिए थे वो अब अपने पैसों की वापसी के लिए चक्कर काट रहे है। जिन आवेदकों ने नियुक्ति के लालच में दलालों को पैसे दे दिए थे वे अब परेशान है उन्हें न तो नियुक्ति ही मिल और न ही दलाल पैसे वापस कर रहे है। अभी लोग कथित लोगों के चक्कर लगा रहे है बहुत जल्दी इन मामलों की शिकायतों का दौर जिला प्रशासन और पुलिस थानों तक पहुंचने की पूरी संभावना है। सूत्रों की माने तो उच्च स्तर पर भर्ती में सतर्कता बरते जाने के चलते दलाली करने वाले छुटभैया नेताओं के साथ साथ कई जिम्मेदार जनप्रतिनिधि भी परेशानी में पड़ते दिखाई दे रहे है, रोज लोग उनके दरवाजे पर अपने पैसे की वापसी के लिए दस्तक दे रहे है। इस पूरे मामले में बड़ी चर्चा यह है कि बहुत जल्दी कुछ बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते।

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