नंद लाल सोनपाली, रोहित, पटवारी हिरेन्द्र सूर्याम, तहसीलदार गोविन्द राम सलामे के विरुद्ध धारा 420, 465 में FIR

बेशकीमती जमीन के फर्जी नामांतरण मामले में तत्कालीन पटवारी, तहसीलदार सहित दो अन्य के विरूद्ध एफआइआर

न्यायालय के आदेश पर कोतवाली में मामला किया गया दर्ज

बैगांचल एक्प्रेस, डिंडौरी, जिला मुख्यालय में करोड़ों की जमीन का फर्जी नामांतरण करने वाले तत्कालीन पटवारी, तहसीलदार सहित दो अन्य के विरूद्ध कोतवाली में एफआइआर दर्ज करने के आदेश जारी हुए थे। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गिरजेश कुमार सनोडिया ने कोतवाली पुलिस को संबंधितों के विरुद्ध मामला दर्ज कर एफआईआर की प्रति न्यायालय में देने के आदेश जारी किए थे। निर्देशों के पालन में कोतवाली में संबंधित पर प्रकरण दर्ज कर लिया गया है।

पुलिस के अनुसार फरियादी इन्दपाल सोनपाली पिता स्व. सुदेश पाल सोनपाली उम्र 50 साल निवासी वार्ड क्रमांक 4 डिण्डौरी ने आवेदन पत्र एवं शपथ पत्र के वैधानिक कार्यवाही के लिए न्यायालय में दिये गये संलग्न आवेदन पत्र का अवलोकन किया गया। आवेदक के दादा बालमुकुन्द सोनपाली का निधन वर्ष 1989 में हो जाने, उनकी समस्त चल एवं अचल सम्पत्ति डिंडौरी नगर एवं आसपास के ग्रामों में होने, दादा की मृत्यु होने के उपरांत सम्पत्ति के बटवारे को लेकर आवेदक तथा अनावेदक नंद लाल सोनवाली पिता स्व. बाल मुकुन्द सोनपाली एवं रोहित सोनपाली पिता नंद लाल सोनपाली के मध्य विवाद उत्पन्न हो गया था। इस संबध में प्रकरण न्यायालय विचाराधीन था। उच्च न्यायालय द्वारा 07-05-2007 को समस्त सम्पति को अपील के निराकरण होने तक विक्रय नहीं कर सकने का स्थगन आदेश पारित किया गया था। कुछ दिन पूर्व आवेदक को जानकारी लगी कि पैतृक भूमि में से डिंडौरी नगर वार्ड क्रमांक 5 स्थित भूमि रकवा 3.245 हेक्टेयर जिसमें पैतृक मकान बना हुआ है। एक कुआ और बगीचा भी लगा हुआ है, उसे नंदलाल सोनपाली के द्वारा फर्जी वसीयत दादी के नाम से तैयार कर अपने नाम तहसीलदार डिंडौरी के 4 जुलाई 2022 को आदेश द्वारा कर ली गई है। इसके बाद 5 अगस्त 2022 को अपने पुत्र रोहित सोनपाली के नाम पर पंजीकृत दान पत्र से हस्तातंरित कर दी गई है। इसी तरह ग्राम सुबखार वार्ड क्रमांक एक स्थित भूमि खसरा नंबर 104 रकबा 3.5450 हेक्टेयर फर्जी वसीयत के आधार पर नंदलाल सोनपाली के द्वारा 04 जुलाई 2022 के आदेश द्वारा अपने नाम पर करा ली गई एवं 26 अक्टूबर 2022 को अनिल खनूजा पिता रामचंद खनूजा डिंडौरी को विक्रय कर दी गई है। दोनों नामांतरण प्रकरण में आवेदक के कूटरचित हस्ताक्षर कर शपथ पत्र 01 जून 2022 को एवं 20 जून 2022 को बनाये गये है, जिसमें नामांतरण होने से आवेदक को कोई आपत्ति नहीं होना लेख किया गया है। आवेदन पत्र में आवेदक द्वारा बताया गया कि दोनों नामांतरण में कभी भी तहसील न्यायालय में सुनवाई नहीं हुई, न ही आवेदक तहसीलदार के समक्ष उपस्थित हुआ था। तत्कालीन डिंडौरी हल्का पटवारी हिरेन्द्र सूर्याम ने नंदलाल सोनपाली एवं रोहित सोनपाली के साथ मिलकर दस्तावेजों की कूटरचना की है। तत्कालीन हल्का पटवारी हिरेन्द्र सूर्याम एवं तत्कालीन तहसीलदार गोविन्दराम सलामे द्वारा पद का दुरूपयोग करते हुये अचल सम्पत्ति को खुर्द बुर्द करने हेतु अवैधानिक नामांतरण आदेश पारित किये जाना लेख किया गया है। आवेदन पत्र में वार्ड क्रमांक 5 में स्थित भूमि जिसे नंदलाल सोनपाली ने रोहित सोनपाली के नाम पर दान पत्र के द्वारा हस्तातरित की है। उक्त भूमि पर पैतृक मकान बने होने जिसमें वृक्ष लगे है। यह भूमि परिवर्तित भूमि रही है। अभिलेखों में परिवर्तित दर्ज रही है, परन्तु तत्कालीन हल्का पटवारी एवं तत्कालीन तहसीलदार ने राजस्व अभिलेखों में भूमि को परिवर्तित श्रेणी से हटा दिया गया, जिससे बिना कलेक्ट्रर की अनुमति के भूमि हस्तातरित की जा सके। इस तरह अनावेदकगणों ने एक दूसरे को लाभ पहुचानें हेतु राजस्व अभिलेखों में कूट रचना लेख किये जाना लेख करते हुये दानपत्र 5 अगस्त 2022 में वर्णित किया गया है कि भूमि में कोई मकान, कुआ व वृक्ष नहीं है। आवेदक इन्द्रपाल सोनपाली के आवेदन पत्र में नंद लाल सोनपाली पिता स्व० बालमुकुन्द सोनपाली, रोहित सोनपाली पिता नंदलाल सोनपाली, हिरेन्द्र सूर्याम तत्कालीन पटवारी हल्का नम्बर 67 डिण्डौरी एवं गोविन्द राम सलामे तत्कालीन तहसीलदार के द्वारा लाभ कमाने के उद्देश्य से हस्तांतरण, नामांतरण एवं विक्रय कर छल किया जाना प्रथम दृष्टया पाया गया है। उनके विरुद्ध धारा 420, पैत्रक पैत्रक भूमि का मामला 465 के तहत दंडनीय पाये जाने से आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है। प्रकरण से संबधित दस्तावेजी साक्ष्य प्राप्त होने पर दस्तावेजों के अवलोकन उपरांत मामले में अन्य वांछित धाराओं का समावेश किया जावेगा।

राजस्व विभाग में जमीनों की खरीद फरोख्त को लेकर शासकीय अमले की मिलीभगत से फर्जीवाड़े के मामले चर्चाओं में रहे है। न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश पर शासकीय अमले के विरुद्ध अपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाने से इस तरह की गड़बड़ियों में कमी आने की संभावना है।

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