पिपरिया (बजाग) में खनिज माफिया के प्रभाव से ग्रामीण हताश
जनसुनवाई में गुहार लेकर पहुंच रहे बैगा जनजाति के ग्रामीण
बैगांचल एक्प्रेस, डिंडोरी, जिले के बजाग विकास खंड के ग्राम पिपरिया में खनिज माफियाओं ने भोले भाले बैगा आदिवासीयों की सैकड़ों एकड़ जमीनें अपने कथित सेवकों के नाम पर खरीद ली, जिसको लेकर प्रदेश भर में हड़कंप मचा रहा किंतु इस गांव के गरीब बैगाओं के पक्ष में कोई निर्णय अब तक नहीं हो पाया है। जबकि लगातार ग्रामीणों द्वारा विरोध, जमीन की बिक्री प्रक्रिया की जांच कराकर जमीन वापस दिलाने की मांग को लेकर, SDM बजाग, जिला कलेक्टर को शिकायतें की गई। बजाग थाने में दर्जनों ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि उन्हें बहला फुसलाकर कौड़ियों के भाव जमीनें जबरन खरीद ली गई है। अशिक्षित ग्रामीणों को बरगलाकर जमीनें हड़पने वाले स्थानीय दलालों के खिलाफ बैगा परिवारों ने पुलिस थाने में लिखित शिकायत की थी जिसे तत्कालीन SDM ने जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करने का आश्वासन तो दिया था किंतु साल भर बाद भी इस दिशा में कोई कार्यवाही नहीं हुई। किसी भी जांच या दलालो और खनिज माफियाओं पर कार्यवाही की जानकारी सामने आई है। जबकि प्रदेश स्तर पर अरबपति भाजपा विधायक और खनिज माफिया की कंपनियों द्वारा जिले के आदिवासियों की लगभग 1100 एकड़ भूमि कथित तौर पर हड़पे जाने का मामला गरम रहा।

खनिज माफिया के प्रभाव और प्रशासन द्वारा बैगा आदिवासीयों के पक्ष में कोई कार्यवाही नहीं होने से अब पिपरिया गांव के बैगा परिवार अपने भविष्य को अन्धकार में देख रहे है, और उन्हें आभास है कि उनकी जमीन जबरन खनिज माफिया द्वारा खरीदी जा सकती है या फिर कब्जा किया जा सकता है। जिसे रोकने के लिए 8 जून 2026 को पिपरिया के बैगा जन जनसुनवाई में पहुंचे और उन्होंने लिखित आवेदन देकर मांग रखी कि कास्तकारों के भविष्य पर संकट है और हम अपनी जमीनें नहीं बेचना चाहते है अतः जमीनों की बिक्री पर रोक लगाई जाए। जिससे जिन लोगों ने जमीनें नहीं बेची है उनकी जमीनों पर बॉक्साइट के खनन का कार्य नहीं किया जाए।

पिपरिया में बॉक्साइट के खनन और बैगाओ की जमीनें जबरन माफियाओं द्वारा हथियाए जाने की आशंका यहां के ग्रामीणों को बनी हुई है। एक आवेदन में उल्लेख किया गया है कि उनकी जमीनें बेचने के लिए कई दलाल और जिम्मेदार लोग लोगों पर दबाव बना रहे है। जिससे गांव के लोगों के भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है। ये बैगा आदिवासी अपने परिवार के भरण पोषण को लेकर बेहद चिंतित है और लगातार प्रशासन और वन विभाग से वन भूमि में बसने की भी मांग कर रहे है। 22 जून 2026 को इस गांव के बैगा परिवार पुनः जनसुनवाई में पहुंचे और उनके आवेदन के अनुसार दडिटोला और ख़राहिलटोला में जमीन बेचने के लिए कई लोग दबाव बना रहे है जिन्हें रोकने की कार्यवाही की मांग ग्रामीणों द्वारा की गई है।

पिपरिया में बॉक्साइट खदान का कार्य शुरू होने की सुगबुगाहट और लोगों द्वारा जमीनें खरीदने का दबाव बनाए जाने, भूमि की बिक्री की रोक की मांग के साथ ही साथ ग्रामीण वन भूमि पर पलायन की भी सहमति जता रहे है। पिपरिया के बैगा बॉक्साइट खदान चालू किए जाने और अपने भूमिहीन हो जाने को लेकर परेशान है। जिसको लेकर वे एक ओर जनसुनवाई में अपना आवेदन दे रहे है दूसरी तरफ मुख्यमंत्री के नाम भी आवेदन दे रहे है। साथ ही साथ वन विभाग से भूमि की मांग कर रहे है जिससे भविष्य में उनका भरण पोषण हो सकें। किंतु पिपरियावासी बैगा आदिवासियों की इस समस्या पर प्रशासन की कोई भी कार्यवाही शून्य है। जनसुनवाई 8 जून के आवेदन पर 23 जून तक SDM बजाग द्वारा निराकरण की तिथि अंकित की गई है। 24 जून को इस संबंध में बजाग SDM से हमारे प्रतिनिधि ने चर्चा की तो उन्होंने इस संबंध में बताया कि पिपरिया में शासन की तरफ से भूमि अधिग्रहण का कोई नोटिस नहीं दिया गया है न ही खदान का कार्य चालू हुआ है। ग्रामीणों की शिकायत उनके पास आई है पर अब तक पिपरिया में बैगाओ को जमीन से बेदखल किए जाने की कोई जानकारी नहीं है।

ग्रामीणों की बेचैनी स्पष्ट करती है कि खनन माफियाओं के द्वारा कुछ तो प्रयास किए जा रहे है जिससे गरीब, अशिक्षित बैगा परिवार अपने भविष्य को लेकर चिंतित है और जिला प्रशासन के चक्कर काट रहे है। इन बैगा आदिवासियों की शिकायत पर प्रशासन को गंभीरता से जांच कराकर उन्हें संरक्षण प्रदान किया जाना चाहिए। अब तक जिस तरह मनमानीपूर्वक इस गांव के बैगाओ की जमीनें हड़पी गई है उससे बैगा परिवार डरे हुए है, इनके हित में प्रशासन को तत्काल कठोर कदम उठाने चाहिए ताकि इस गांव के ग्रामीण निश्चिंत हो सके।

