सफाई और सुरक्षा ठेके पर सवाल
विभाग की कीमती संपत्ति की सुरक्षा पर विभाग की घोर लापरवाही

बैगांचल एक्प्रेस, डिंडोरी, जिले में आमजन के लिए स्वास्थ जैसे महत्वपूर्ण मामलों से संबंधित विभाग की इन दिनों लड़खड़ाती हुई स्थिति बड़ी चिंता का विषय है। जहां पिछले दिनों उप स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण कार्यों को लेकर विभाग की घटिया कार्यप्रणाली उजागर हुई, अधूरे और गुणवत्ताहीन भवनों को लेकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के नियंत्रण और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे है वही अब जिला चिकित्सालय की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा करने वाली घटना सामने आई है।
जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल की सुरक्षा में उस समय सेंध लग गई जब शुक्रवार की रात एक कुत्ता अस्पताल परिसर से होता हुआ अस्पताल के अंदर घुस गया। कुत्ता बेफिक्र होकर अस्पताल के प्रथम मंजिल पर स्थित प्रसव वार्ड के पास तक पहुंच गया जहां पर मरीजों के परिजन सो रहे थे वहां चहल कदमी करता नजर आया। उस दरमियान वहां मौजूद एक जागरूक युवक ने इस वाकये को कमरे में कैद कर लिया। वैसे तो जिले के सरकारी अस्पताल में कुत्ता घुसने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कुछ साल पहले मेहंदवानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कुत्ते बाकायदा मरीजों के पलंग में आराम फरमाते हुए कैमरे में कैद हो चुके है। बावजूद इसके अस्पतालो की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विभाग और अधिकारी बिल्कुल भी चिंतित नजर नहीं आ रहे है।

संपूर्ण जिले के सबसे बड़े अस्पताल और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की नाक के नीचे यदि जिला चिकित्सालय में आवारा कुत्तों को रोकना विभाग के लिए मुश्किल हो रहा है तो ब्लॉक स्तर और ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित शासकीय अस्पताओं की स्थितियां क्या होगी अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
सुरक्षा और सफाई ठेके पर सवाल
जिला अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था के लिए गार्डों, सफाई और परिसर में साइकिल स्टैंड का ठेका होता है। जिसमें से जिला चिकित्सालय परिसर में साइकिल स्टैंड का संचालन तो हमेशा पूरी मुस्तैदी के साथ होता दिखाई देता है। सफाई पर भी सवाल उठते रहे है अब सुरक्षा की पोल भी खुल रही है।

शासकीय संपत्ति, मशीन उपकरण और दस्तावेजों की सुरक्षा किसके हवाले ??
जिला अस्पताल के मुख्यद्वार और वार्डो की देखरेख करते गार्ड नजर नहीं आते हैं। यदि गार्ड तैनात किए भी गए है तो उनकी लापरवाही के चलते कुत्ता अस्पताल के भीतर सो रहे लोगों के बीच बेफिक्री से घूम रहा है।जो विभाग के अधिकारियों की गैर जिम्मेदाराना व्यवस्था का नमूना है। जिला प्रशासन को इस गंभीर लापरवाही जिसके चलते नवजात शिशु और बुजुर्ग मरीजों की जान को जोखिम हो सकता है। जिला चिकित्सालय में परिसर में करोड़ो रुपए की कीमती संपत्ति, मशीनरी, उपकरण, वाहन और शासकीय दस्तावेजों की सुरक्षा में बड़ी लापरवाही के चलते कड़ी से कड़ी कार्यवाही विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ की जाना चाहिए़।

