उपयंत्री ने गड़बड़ियों पर जताई आपत्ति, EE को लिखा पत्र

बैगांचल एक्प्रेस, डिंडोरी, बजाग विकासखंड अंतर्गत सुनियामार में स्वास्थ्य विभाग द्वारा 15 वें वित्त मद से 55 लाख की लागत से कराये जा रहे उप स्वास्थ्य केन्द्र भवन निर्माण में उपयंत्री के निरीक्षण के दौरान अनेक खामियां सामने आई हैं। जिस पर उपयंत्री ने नाराजगी जताते हुए ठेकेदार को निर्माण कार्य मापदंड के मुताबिक कराने के निर्देश दिए है किंतु ठेकेदार द्वारा अपनी मनमानी की जा रही है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार संबंधित उपयंत्री ने ग्रामीणों की शिकायत पर चल रहे निर्माण कार्य की जांच में निर्माण कार्य घटिया पाया जिस पर आपत्ति भी दर्ज की किंतु ठेकेदार द्वारा उपयंत्री के निर्देशों की अवहेलना किए जाने के संबंध में कार्यपालन यंत्री की सूचना दी गई है।

बताया जाता है कि एनआरएचएम की उपयंत्री सुरूचि पराते ने निर्माणाधीन उप स्वास्थ्य केन्द्र भवन के निरीक्षण में लेंटर में बांधे गए लोहे की जांच नहीं कराए जाने पर आपत्ति की गई। जानकारी ठेकेदार द्वारा मनमानी पूर्वक कार्य को अंजाम दिया जा रहा है। उपयंत्री ने बतलाया कि भवन में तय मापदंड के अनुसार निर्माण कार्य नहीं कराया जा रहा है। जानकारी के अनुसार निर्माण मेसर्स एमजी कन्स्ट्रक्षन ग्वालियर के द्वारा भवन का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। कंपनी के सुपरवाइजर को दूरभाष पर कार्य रोकने और निरीक्षण उपरांत ही ढलाई कार्य प्रारंभ करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद सुपरवाइजर ने निर्देशों की अनदेखी करते हुए छत ढलाई कार्य निरंतर जारी रखा। निरीक्षण में गंभीर तकनीकी अनियमितताएँ पाई गई हैं, जो निर्माण की गुणवत्ता पर सीधे सवाल खड़े करती हैं।

निरीक्षण में सामने आई खामियां
निरीक्षण में छत के जाल में आवश्यक एक्स्ट्रा टॉप कहीं भी नहीं लगाया गया था, जो संरचना की मजबूती के लिए अनिवार्य होता है। कवर ब्लॉक नहीं पाए गए, जिससे सरिए का कंक्रीट कवर प्रभावित होता है और संरचना की आयु कम होती है। कॉलम में सरियों का ओवरलेप नियमानुसार नहीं किया गया था, जो भवन की वर्टिकल स्ट्रेंथ को कमजोर कर सकता है। दो बीम की शटरिंग 240 मिमी चौड़ी पाई गई, जबकि निर्धारित चौड़ाई 200 मिमी है। यह अंतर बीम की डिजाइन को पूरी तरह बदल देता है। कैंटीलिवर छत्त में बीम के टॉप में आवश्यक 16 मिमी का सरिया नहीं पाया गया, जिससे आउटबार्ड लोड सहन क्षमता कम होती है। सीढ़ी की वेस्ट स्लैब की मिड लैंडिंग हाइट ड्राइंग के अनुसार 1800 मिमी नहीं थी, जिसके कारण लैंडिंग के आगे की रेस्ट स्लैब का ढलान मानक के विपरीत पाया गया। इस वजह से ढलाई रोकने का निर्देश दिया गया था। अधिकारी ने सभी त्रुटियों को मौके पर विस्तार से समझाया, लिखित में दर्ज कराया और साइट सुपरवाइजर के हस्ताक्षर लेकर सुधार करने के स्पष्ट निर्देश दिए। इसके बावजूद फर्म के सुपरवाइजर ने न तो त्रुटियों को सुधारा और न ही मानकों के अनुरूप कार्य कराया। गंभीर लापरवाही यह रही कि सीढ़ी की ढलाई बिना सुधार किए ही कर दी गई और कॉलम ओवरलेपिंग भी निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार नहीं की गई। निर्देशों की इस स्पष्ट अवहेलना ने फर्म के निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अनियमितताएँ दीर्घकाल में भवन की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं।

निर्माण कार्यों में इस प्रकार की तकनीकी लापरवाही न केवल शासन की मंशा का उल्लंघन है बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बना। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि ठेकेदार मनमानी करता है और ग्राम पंचायत के मजदूरों को मजदूरी भी नहीं दे रहा है। बाहर के मजदूर लगा कर काम करा रहा है जो कि पूरी तरह गलत है।

उल्लेखनीय है कि उक्त ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्यों में लगातार मनमानी की जा रही है। विगत दिनों जिला कलेक्टर द्वारा भी बजाग क्षेत्र में उप स्वास्थ्य केंद्र भवनों के निर्माण में गड़बड़ियां पाई थी। वहीं निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद अधूरे भवनों को निर्धारित समय में पूरा नहीं करने पर ठेकेदार के विरुद्ध कार्यवाही करने की चेतावनी समीक्षा बैठक में दी गई थी। जिसके बाद ठेकेदार द्वारा जल्दी में मनमाना निर्माण कार्य किया जा रहा है और घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार उक्त ठेकेदार ग्रुप में दर्जन भर से अधिक भवनों का निर्माण कार्य कर रहा है, जबकि ठेकेदार के पास पर्याप्त निर्माण सामग्री और अनुभवी स्टॉप उपलब्ध नहीं है जिससे अनुभवहीन व्यक्तियों को पेटी कांटेक्ट पर कार्य सौंपकर जल्दबाजी में घटिया कार्य मनमाने तरीके से किया जा रहा है। भवनों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे है। जिला प्रशासन को उक्त ठेकेदार के सभी कार्यों की तकनीकी जांच कराकर कार्यों को निरस्त किया जाना चाहिए़।


