बहारपुर: 4 साल में आंगनवाड़ी भवन की नींव भर बना पाई पंचायत

सरकारी धन का दुरुपयोग, अधिकारियों की लापरवाही

जिम्मेदार अधिकारियों पर हो कार्यवाही

बैगांचल एक्प्रेस, डिंडोरी, जिले की ग्राम पंचायतों में सरकारी धन का बंदरबांट और बर्बादी खुलेआम चल रही है जिस पर जिला प्रशासन किसी की जिम्मेदारी तय नहीं कर पा रहा। जनपद पंचायतों में नियमित रूप से बैठकों का तमाशा चलता है पर इन बैठकों में न कोई समीक्षा होती है और न कार्यवाही जिसके चलते ग्राम पंचायतों में सालों साल से निर्माण कार्य अधूरे पड़े है सरकारी राशि का दुरुपयोग हो रहा है पर जनपद के अधिकारी सब इंजीनियर और सरपंच सचिव से काम पूरा करवाने में असमर्थ है। जिला प्रशासन को ऐसे गैर जिम्मेदार और अक्षम अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही करनी चाहिए़ जिनकी लापरवाही से सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। ग्रामीण परेशान हो रहे है और निर्माण कार्य अधूरे पड़े है।

ऐसा ही एक मामला करंजिया जनपद की ग्राम पंचायत बहारपुर का सामने आया है जहां 4/9/2021 को ICDS से स्वीकृत आंगनवाड़ी भवन का निर्माण कार्य वर्ष 2025 के अंत तक न सिर्फ अधूरा पड़ा है बल्कि ग्राम पंचायत सिर्फ आंगनवाड़ी भवन की नींव ही बना पाई है। भवन निर्माण के लिए 9.50 लाख रुपए की स्वीकृति दी गई थी जिसमें से लगभग 2.50 लाख रुपए खर्च कर पंचायत ने सिर्फ नींव का निर्माण किया है वह भी वर्षों से यू ही पड़े पड़े जर्जर हो चुकी है। वही 3 साल बाद सामग्री के बाजार भाव बढ़ने से अब उक्त भवन का निर्माण पूरा होना कठिन है। ग्राम पंचायत से सरपंच और सचिव की लापरवाही के साथ साथ सब इंजीनियर, एसडीओ, जनपद के सीईओ किसी की कोई जिम्मेदारी ही नहीं दिखाई देती जो भवन निर्माण समय सीमा में पूर्ण कराने के लिए जवाबदेह हो। सरकार ने निर्माण कार्य की स्वीकृति दे दी, राशि स्वीकृत होने के बाद कार्य प्रारंभ किया गया और फिर काम बंद हो गया वर्षों से किसी ने इसकी सुध ही नहीं ली।

पंचायत भवन में लग रही आंगनवाड़ी

पंचायत में आंगनवाड़ी भवन नहीं होने से आंगनवाड़ी का संचालन पंचायत भवन में किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन सड़क के किनारे होने से वाहनों की आवाजाही अधिक होती है जिससे छोटे छोटे बच्चों के लिए खतरा बना रहता है, वर्षों से भवन अधूरा पड़ा है पंचायत ने भवन निर्माण की राशि पता नहीं कहा खर्च कर दी कई सालों से काम बंद ही पड़ा है। ग्रामीणों द्वारा अधिकारियों से भी भवन का निर्माण पूर्ण कराए जाने की कई बार मांग की जा चुकी है किंतु सरपंच और सचिव की मनमानी के आगे किसी की नहीं चल पा रही जिससे नन्हे नन्हे बच्चों के ऊपर खतरा मंडराता रहता है।

जिम्मेदार अधिकारी कुर्सियां तोड़ रहे है

शासन द्वारा निर्माण कार्यों की स्वीकृति के साथ निर्माण कार्य की समय सीमा भी निर्धारित की जाती है जिसकी निगरानी जनपद के अधिकारियों और तकनीकी अमले द्वारा की जाना चाहिए़ किंतु यहां सभी जिम्मेदार अधिकारी कुर्सियां तोड़ रहे है किसी को कोई परवाह नहीं है। जनपद और जिला पंचायत में होने वाली बैठकों पर भी सवाल उठता है कि क्या यह सिर्फ दिखावटी तमाशा है यदि सच में पंचायत के कार्यों की समीक्षा और कार्य प्रगति का आंकलन किया जाता तो चार चार साल तक भवनों का निर्माण कैसे नहीं हो पाता। जिला, जनपद के अधिकारी और तकनीकी अमला पंचायतों के कार्यों का निरीक्षण क्यों नहीं करता !

जिला पंचायत सीईओ से ग्रामीण जनता की अपेक्षा है कि सभी पंचायतों में स्वीकृत निर्माण कार्यों की समीक्षा की जावे, व्यय की गई राशि की उपयोगिता और अधूरे पड़े निर्माण कार्यों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही की जावे तब ही सुधार की संभावना है सिर्फ पंचायतों पर कार्यवाही से कोई हल अब तक नहीं निकल पाया है।

करंजिया और बजाग जनपद की दूरस्थ ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्यों के हाल बेहाल है जिन्हें कोई देखने वाला नहीं। अधिकतर ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्यों को दलालों द्वारा हथिया कर राशि आहरित कर कार्यों को आधा अधूरा छोड़े जाने की दर्जनों शिकायते है जिन पर जिला पंचायत को कड़ी कार्यवाही की जाना चाहिए़।

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