शहर के बीच स्थित बेशकीमती जमीन, ट्रस्ट को लेकर सवाल
बैगांचल एक्प्रेस, डिंडोरी, जिला मुख्यालय के बीचोबीच “भगवान महादेव ट्रस्ट” की भूमि वर्षों से अनुपयोगी पड़ी हुई है। इस जमीन के बारे में बताया जाता है कि यह भूमि “भगवान महादेव मंदिर” के लिए दान में दी गई थी। जिसके लिए उस दौर में एक ट्रस्ट, समिति बनाई गई थी किंतु इस भूमि पर मंदिर का निर्माण नहीं हो पाया और ट्रस्ट से लोगों के निधन के बाद से यह जमीन जैसी थी उसी स्थिति में पड़ी हुई है। यह मामला बहुत पहले का तब जमीन का मूल्य इस छोटे से कस्बे में न के बराबर था और दानदाता ने इसे मंदिर के नाम दान कर दिया था। बदलते समय के साथ आज इस जमीन का मूल्य करोड़ो रुपए है और अब इस पर भू माफियाओं की नजर गड़ गई है। इस कीमती भूमि को इन माफियाओं से बचाने के लिए इसका सार्वजनिक और धार्मिक उपयोग हो सके इसका प्रयास प्रशासन को करना होगा।

नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 6 में स्थित भगवान महादेव के प्राचीन मंदिर की बेशकीमती भूमि पर भू-माफियाओं की नजर गड़ी हुई है। वर्षों पुराने मंदिर और उससे जुड़ी पवित्र भूमि की सुरक्षा पर अब खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। मंदिर की संपत्ति खसरा नंबर 130/2/2 रकवा 0.4024 हेक्टेयर और 130/2/1 रकवा 0.0096 हेक्टेयर में दर्ज है। यह भूमि भगवान महादेव मंदिर ट्रस्ट के अधीन है, जिसका प्रबंधन जिला कलेक्टर के हाथों में है। किंतु ट्रस्ट की निष्क्रियता और सदस्यों की संख्या घटने से अब मंदिर की भूमि पर अवैध कब्जे का खतरा है। इस संबंध में पूर्व में स्थानीय श्रद्धालुओं ने जिला कलेक्टर को आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है। किंतु इस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई।
ट्रस्ट के सदस्य नहीं रहे, वारिसों को नहीं मिली जगह
एक जानकारी के अनुसार, ट्रस्ट में पूर्व में नानक सिंह खनूजा, भोला प्रसाद गुप्ता ,त्रिलोक सिंह छावड़ा, फूलचंद मिश्रा और प्रताप सिंह सलूजा सदस्य थे इन सभी पांचो सदस्यों का वर्षों पूर्व निधन हो चुका है। लेकिन इनमें से केवल स्वर्गीय भोला प्रसाद गुप्ता के वारिसों को ट्रस्ट में शामिल किया गया। जबकि स्वर्गीय नानक सिंह खनूजा, स्वर्गीय प्रताप सिंह सलूजा, स्वर्गीय त्रिलोक सिंह छावड़ा और स्वर्गीय फूलचंद मिश्रा के वारिसों को अब इस ट्रस्ट में कोई स्थान नहीं है। इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठते है कि आखिर बाकी के ट्रस्टियों के बारिशों को ट्रस्ट से किस प्रक्रिया के तहत अलग कर दिया गया। चर्चा है कि यह पूरी प्रक्रिया गुपचुप तौर पर कथित राजस्व अधिकारियों से साठगांठ कर अंजाम दी गई, जिसकी कोई भी सार्वजनिक सूचना की जानकारी किसी को भी नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस असंतुलित प्रबंधन के कारण ट्रस्ट की गतिविधियाँ पूरी तरह ठप हो हैं, जिससे भू-माफियाओं को मौका मिल रहा है कि वे मंदिर की भूमि पर कब्जा करें।

अतिक्रमणकारियों ने बनाए स्थायी मकान
सूत्रों के मुताबिक, भगवान शिव की पवित्र भूमि पर बने पुराने मकानों में अब कुछ लोगों का स्थायी कब्जा है। यह अतिक्रमण धीरे-धीरे मंदिर की सीमा तक पहुँच रहा है। लोगों का प्रशासन पर आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
श्रद्धालुओं ने उठाई ट्रस्ट पुनर्गठन की मांग
स्थानीय श्रद्धालु और समाजसेवी अब आवाज उठा रहे हैं कि भगवान महादेव मंदिर ट्रस्ट में नए सदस्य जोड़े जाएँ, जिसमें मृत सदस्यों के वारिसों और अन्य श्रद्धालुओं को नियमानुसार इस ट्रस्ट में शामिल कर इस भूमि का उपयुक्त तरीके से उपयोग किया जावे। उनका कहना है कि सक्रिय ट्रस्ट बनने से न केवल भूमि की सुरक्षा हो सकेगी, बल्कि मंदिर के जीर्णोद्धार और विकास कार्य भी आगे बढ़ पाएंगे। ट्रस्ट की भूमि का सीमांकन करवा कर भूमि पर यदि किसी का अवैध कब्जा आदि है उसे हटवाने की कार्यवाही की जावे। स्थानीय निवासी ने बताया कि भगवान महादेव की भूमि हमारी आस्था का प्रतीक है। अगर प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो यह भूमि अतिक्रमण की भेंट चढ़ चढ़ सकती है वहीं भू माफियाओं द्वारा इसे हड़पा जा सकता है।
नगर के नागरिकों और श्रद्धालुओं की कलेक्टर से मांग की है कि मंदिर की भूमि का सीमांकन कराकर अतिक्रमण हटाया जाए और ट्रस्ट का पुनर्गठन वैधानिक प्रक्रिया के तहत तत्काल किया जाए। साथ ही, भू-माफियाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भगवान महादेव की यह ऐतिहासिक भूमि सुरक्षित रह सके।

