वन विभाग के टेप कैमरों से स्थिति हो रही साफ
बैगांचल एक्प्रेस, डिंडौरी, बांधवगढ से डिंडौरी वन परिक्षेत्र में आमद देने वाली बाघिन पिछले दो दिनों से रानीबुढार के जंगल में गाय को अपना निवाला बना रही है। शिकार स्थल के आसपास वन विभाग द्वारा लगाए कैमरों के टेप से जंगल में बाघिन का होना पता चल रहा है। कैमरों से मिली तस्वीर और पंजों के आधार पर तय हो गया है, कि यह बाघिन है। शनिवार तक वन अमला बाघ है या बाघिन अनुमान नहीं लगा पा रहा था। अब वन विभाग के टेप कैमरों से स्पष्ट हो गया है कि बाघिन ही जंगल में डेरा डाले हुए है।
जानकारी के अनुसार गत एक माह से डिंडौरी और शाहपुर रेंज में बाघिन का मूवमेंट दर्ज किया जा रहा है। बाघिन के साथ ही तेंदुआ की भी मौजूदगी ग्रामीणों को दशहत में डाल रही है।क्षेत्र में बाघिन की उपस्थिति से आसपास के क्षेत्रों में दहशत का माहौल है। जहां जंगलों में जाने वाले मवेशियों पर खतरा बढ़ा हुआ है वही गांव के लोग भी शाम के बाद बाघिन के हमले की आशंका से डरे हुए है। वन विभाग की सतर्कता के साथ ही ग्रामीण लोग भी सुरक्षा के चलते एतिहात बरत रहे है तब भी क्षेत्र में बाघिन को लेकर दहशत बनी हुई है।
जिले का जंगल बाघिन को भा रहा
पिछले एक माह से डिंडौरी के जंगल में डेरा डाले बाघिन की गतिविधियां लगातार कैमरों में रिकॉर्ड हो रही हैं। जानकारों का मानना है कि इस बाघिन को रानीबुढार का जंगल भा रहा है। वन्य जीवों की उपलब्धता और सघन वन परिक्षेत्र के चलते यह क्षेत्र बाघिन को अनुकूल लग रहा है। बताया गया कि रानीबुढार, सारसताल, के जंगल में मूवमेंट के दौरान बाघिन अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने दहाड़ भी रही है।
वन अमला सतर्क, गस्त जारी
50 किलोमीटर के दायरे में विचरण कर रही बाघिन की निगरानी में वन विभाग की टीमें लगातार जुटी हुई हैं। दिन-रात हो रही गस्त में वन सुरक्षा समितियों और ग्रामीणों की मदद भी ली जा रही है। सड़क किनारे की बसाहटों में वाहनों और सुदूर वन क्षेत्र में कोटवार के साथ वन समिति के सदस्य मुनादी कर रहे हैं। वन अधिकारियों के मुताबिक वन्य जीव के द्वारा शिकार बनाये गये सभी पालतू मवेशियों का मुआवजा प्रकरण फौरन बनाया जा रहा है। जिससे पीड़ित पक्ष को राहत राशि शीघ्र जारी की जावे।

