जिले में रेल की मांग करती जनता को झटका, रेल टिकट की सुविधा भी छीनी

अब पोस्ट ऑफिस में नहीं मिलेगी रेल रिजर्वेशन सुविधा

बैगांचल एक्प्रेस, डिंडोरी, जिले में वर्षों से लोग रेलवे लाइन की मांग कर रहे है, लोगों की इस मांग पर स्थानीय जनप्रतिनिधि भी संपूर्ण प्रयास करने का आश्वासन कई वर्षों से देते आ रहे है। कभी रेलवे लाइन के सर्वे में जिले के शामिल होने पर जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किए जाता है तो कभी सोशल मीडिया पर रेलमंत्री को धन्यवाद दिया जाता है पर जमीनी हकीकत यह है कि रेलवे डिंडोरी जिले से लगातार दूरी बनाए जा रहा है और इससे हमारे जनप्रतिनिधियों को क्षेत्र की इस तरह की जा रही जिले के लोगों की उपेक्षा से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। कई वर्ष पहले तक जिले में रेल टिकट बुकिंग के लिए रेलवे काउंटर जिला कलेक्ट्रेट के सामने खोला गया था उसके बाद इस सुविधा को पोस्ट ऑफिस के हवाले कर दिया गया जहां पिछले दो, तीन वर्षों से लोग परेशान हो रहे थे अधिकांश समय यहां भी रेल टिकट नहीं मिल पा रहा था और अब इसके आगे खबर मिल रही है कि रेलवे और डाकघर का समझौता समाप्त हो गया है जिससे अब जिले में रेल टिकट मिलने की कोई व्यवस्था नहीं रही। जो जिले के लोगों के लिए तो एक बड़ी समस्या है ही साथ में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सरकार तक कमजोर पहुंच का प्रतीक भी है।

भारतीय रेल द्वारा भारतीय डाक विभाग के साथ किया गया वह समझौता, जिसके अंतर्गत डाकघरों के माध्यम से रेल टिकट बुकिंग की सुविधा दी जा रही थी, अचानक समाप्त कर दिया गया है। इस निर्णय से न केवल नगरवासी बल्कि ग्रामीण अंचलों में नागरिकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ेगा। इस विषय को जनहित से जुड़ा बताते हुए अधिवक्ता सम्यक जैन ने रेल मंत्री को एक विस्तृत पत्र भेजकर निर्णय की समीक्षा और पुनर्विचार की मांग की है।

ग्रामीणों, बुजुर्गों और तकनीकी साधनहीन नागरिकों पर पड़ा असर

पत्र में कहा गया है कि डाकघरों के माध्यम से रेल टिकट बुकिंग की सुविधा उन लोगों के लिए वरदान साबित हुई थी जिनके पास न तो स्मार्टफोन है, न इंटरनेट कनेक्टिविटी और न ही डिजिटल लेनदेन का ज्ञान। यह व्यवस्था विशेषकर बुजुर्गों, ग्रामीण परिवारों और छोटे कस्बों के नागरिकों के लिए सुविधा का माध्यम थी। अब इस सेवा के बंद हो जाने से उन्हें टिकट बुक कराने के लिए या तो नजदीकी शहरों की यात्रा करनी पड़ रही है या दूसरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

अधिवक्ता सम्यक जैन ने पत्र में लिखा है कि यह निर्णय बिना किसी सार्वजनिक परामर्श या वैकल्पिक व्यवस्था के किया गया, जिससे यह प्रशासनिक पारदर्शिता और जनसहभागिता के सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि इस सेवा का बंद होना संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 38 और 39 में निहित समानता, न्याय, और सामाजिक सुरक्षा के सिद्धांतों का उल्लंघन है। वहीं यह भी अंकित किया गया कि यह निर्णय डिजिटल इंडिया और एक्सेसिबल इंडिया जैसे सरकारी अभियानों की भावना के विपरीत है, क्योंकि इन योजनाओं का उद्देश्य डिजिटल सेवाओं को सुलभ बनाना है, समाप्त करना नहीं।

जनहित में उठाई तीन प्रमुख मांगें


रेल मंत्री से तीन प्रमुख कदम उठाने का आग्रह किया है रेलवे और डाक विभाग के बीच हुए समझौते को रद्द करने के निर्णय की व्यापक समीक्षा की जाए। डाकघरों के माध्यम से रेल टिकट बुकिंग सुविधा को तत्काल बहाल किया जाए। यदि पुनर्बहाली संभव न हो तो जिला और ब्लॉक स्तर पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, जिससे ग्रामीणों को नजदीक स्तर पर रेल आरक्षण की सुविधा मिल सके।

अधिवक्ता जैन ने कहा कि रेल टिकट बुकिंग की यह प्रणाली न केवल सुविधाजनक थी, बल्कि आमजन का विश्वास सरकारी सेवाओं को बढ़ाने का माध्यम भी थी। अतः केंद्र सरकार को इस पर पुनर्विचार कर सेवा को पुनः शुरू करना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि रेल मंत्री इस विषय को गंभीरता से लेकर नागरिकों की परेशानी को दूर करने हेतु शीघ्र कदम उठाएँगे।

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