विक्रमपुर संकुल अंतर्गत एकीकृत हाई स्कूल चिंचरिंगपुर का मामल
बीआरसी ने मामला संज्ञान में आने के बाद कार्रवाई का दिया आश्वासन

बैगांचल एक्प्रेस, डिंडौरी, शासन द्वारा छात्र-छात्राओं की बौद्धिक क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय में अध्ययनरत कक्षा 2 से कक्षा 8 के विद्यार्थियों के लिए जन शिक्षा केन्द्र और जिला स्तरीय शैक्षिक ओलंपियाड का आयोजन किया जा रहा है।माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 6 से 8 तक सभी विद्यार्थियों के लिए ओलंपियाड परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है। परीक्षा का उद्देश्य बच्चों में नेतृत्व क्षमता, प्रतिस्पर्धा की भावना, अभिव्यक्ति का विकास और विषयों के प्रति रूचि जागृत करना है। इसी क्रम में जिले में मंगलवार को परीक्षा का आयोजन था लेकिन किसी परीक्षाएं स्थगित हो गई और सभी संकुल केन्द्र सहित जन शिक्षकों और शिक्षकों को सूचना कर दी गई। किंतु कुछ संवेदनहीन और लापरवाह शिक्षकों ने इसके बाद भी छात्रों को परीक्षा में शामिल होने संकुल केन्द्र भेज दिया। लेकिन परीक्षा स्थगन के कारण बच्चे परीक्षा केन्द्र के आस-पास भटकते रहे। आलम यह रहा कि सुबह से परीक्षा में शामिल होने पहुंचे छात्र परीक्षा नहीं होने से परेशान रहे वहीं शिक्षकों की लापरवाही का खामियाजा भुगतने से गुस्सा होकर शिक्षकों के खिलाफ गांव पहुंचकर जनसुनवाई में शिकायत तक दर्ज करा दी।

पूरा मामला :
मंगलवार को क्लस्टर स्तर पर ओलंपियाड परीक्षा का आयोजन किया जाना था जिसमें विक्रमपुर संकुल केन्द्र को परीक्षा केन्द्र बनाया गया था। संकुल केन्द्र अंतर्गत सभी माध्यमिक शाला के चिन्हित छात्रों को परीक्षा में शामिल होना था। जिसमें एकीकृत हाई स्कूल चिचरिंगपुर के विद्यार्थी भी शामिल थे। परीक्षा स्थगित होने के कारण अन्य माध्यमिक शालाओं के विद्यार्थी परीक्षा केन्द्र तो नहीं पहुंचे जिन्हें संबंधित शाला के शिक्षकों ने परीक्षा स्थगन की जानकारी दे दी थी वहीं चिचरिंगपुर माध्यमिक शाला के लापरवाह शिक्षकों ने परीक्षा में शामिल होने वाले 11 विद्यार्थियों को प्रवेश पत्र वितरित कर उन्हें विक्रमपुर संकुल केन्द्र में परीक्षा में शामिल होने का फरमान जारी कर निर्धारित समय में परीक्षा केन्द्र में पहुंचने की हिदायत दी। परीक्षा में शामिल होने सभी 11 विद्यार्थी मंगलवार को सुबह बस में बैठकर लगभग 15 किलोमीटर दूर विक्रमपुर पहुंचे और बस स्टेंड से लगभग ढाई किलोमीटर पैदल चलकर परीक्षा केन्द्र पहुंचे लेकिन केन्द्र के मुख्य गेट में ताला लगा था और वहां कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं था। घंटों इंतजार करने के बाद सभी विद्यार्थी पैदल बस स्टेंड पहुंचे लेकिन गांव तक जाने के लिए कोई वाहन नहीं था जिसके बाद वह अपने गांव के लिए पैदल चल पडे। गनीमत रही कि ग्राम पंचायत चिचरिंगपुर के उप सरपंच उसी दौरान अपने गांव चिचरिंगपुर से विक्रमपुर आ रहे थे उन्होंने गांव और आसपास के 11 छात्रों को पैदल जाते हुए देखा। छात्रों से जानकारी ली तब पता चला कि सभी बच्चे परीक्षा में शामिल होने पहुंचे थे लेकिन परीक्षा स्थगित हो गई। उपसरपंच अनुज धारी ने किराये के ऑटो से सभी बच्चों को गांव ले जाकर उनके घरों तक पहुंचाया।
शिक्षकों की लापरवाही आई सामने
जिन विद्यार्थियों को ओलंपियाड परीक्षा में शामिल होना था उन्हें शिक्षकों द्वारा नियमानुसार अपने साथ परीक्षा केन्द्र तक लेकर आना और परीक्षा उपरांत उन्हें साथ में वापस लाकर गंतव्य तक छोडने की जिम्मेदारी थी। लापरवाही बरतते हुये चिचरिंगपुर एकीकृत हाई स्कूल में पदस्थ शिक्षक रामकुमार सैयाम और रामकुमार चक्रवर्ती द्वारा विद्यार्थियों को बगैर सुरक्षा और संसाधन उपलब्ध कराये परीक्षा केन्द्र जाकर परीक्षा में शामिल होने की हिदायत जारी कर दी गई। परीक्षा स्थगित होने के कारण छात्रों को पैदल लौटना पडा। उपसरपंच की दरियादिली के कारण उन्हें ऑटो में बैठकर घर तक पहुंचा दिया गया नही ंतो इन मासूमों को पैदल ही जंगली रास्ता पार कर 15 किलोमीटर पैदल चलकर घर पहुंचना पड़ता ।
विद्यार्थियों ने जनसुनवाई में शिक्षकों की शिकायत
लापरवाह शिक्षकों की करतूत का खामियाजा भुगतने के बाद गांव पहुंचे विद्यार्थियों ने मंगलवार ग्राम पंचायत स्तर पर आयोजित जनसुनवाई में शिक्षकों के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में विद्यार्थियों द्वारा बतलाया गया कि शिक्षक रामकुमार सैयाम और रामकुमार चक्रवर्ती के द्वारा प्रवेश पत्र दिया गया था और मंगलवार को निर्धारित समय 11 बजे के पूर्व परीक्षा केन्द्र में पहुंचने की भी बात कही गई थी। सभी विद्यार्थी बस से परीक्षा केन्द्र पहुंचे थे लेकिन परीक्षा स्थगित होने से हम पैदल लौट रहे थे। शिक्षकों की यह लापरवाही काफी गंभीर है और बच्चों को परीक्षा स्थगन की जानकारी नहीं दी गई तथा भगवान भरोसे उन्हें परीक्षा देने भेज दिया गया। शिक्षकों की इस लापरवाही के कारण बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ा जिससे स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित पालकों में आक्रोश है। उनके द्वारा मांग की जा रही है, कि ऐसे शिक्षकों को शाला से हटाया जाये और जिम्मेदार शिक्षकों की तैनाती की जाये।
इनका कहना है :
मंगलवार को आयोजित होने वाली परीक्षा स्थगित कर दी गई थी जिसकी जानकारी सभी संकुल केन्द्र और शिक्षकों को प्रेषित कर दी गई थी लेकिन शिक्षकों के द्वारा विद्यार्थियों को परीक्षा केन्द्र पर बगैर किसी सुरक्षा के पहुंचे गंभीर लापरवाही है। इस संबंध में उचित कार्रवाई प्रस्तावित की जावेगी।
अरूण चौबे, विकास खंड स्रोत समन्वयक डिंडौरी
जिला प्रशासन से कार्यवाही की अपेक्षा
शिक्षकों की उक्त गंभीर लापरवाही और बच्चों के प्रति असंवेदनशील रवैए का अंजाम गंभीर हो सकता था। वरिष्ठ शिक्षा विभाग के अधिकारियों और जिला प्रशासन को शिक्षकों के विरुद्ध कार्यवाही की अपेक्षा ग्रामीणों को है।


