डिण्डौरी RTO में स्मार्ट चिप लिमिटेड का ठेका खत्म, कंपनी के अनधिकृत कर्मी का RTO में बोलबाला

डिंडोरी परिवहन कार्यालय में वर्षों से महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पंकज देहरिया विभाग में किस पद पर है इसकी किसी को जानकारी नहीं है पर उनका कार्यालयीन कार्यों, के साथ साथ विभाग के जांच अभियान सहित कलेक्टर की बैठकों में भी वो उपस्थित होते है जिसकी पुष्टि जनसंपर्क विभाग भी करता है पर वे न तो विभागीय कर्मचारी है न ही किसी अधिकृत ठेका कंपनी के कर्मचारी तब उनकी विभाग में भूमिका बेहद संदिग्ध और शासकीय नियमों के विरुद्ध है जो कि कानूनी कार्यवाही के दायरे में आती है।

बैगांचल एक्सप्रेस, डिंडोरी, प्रदेश में परिवहन विभाग लंबे समय से प्रदेश के परिवहन दफ्तरों में दलालों से मुक्ति के लिए डिजिटल सिस्टम पर जोर देता आया है। इसी के चलते स्मार्ट चिप कंपनी को कंप्यूटराईजेशन और ऑनलाइन सिस्टम का काम सौंपा गया था। परिवहन दफ्तरों में ऑनलाइन का सारा कामकाज स्मार्ट चिप कम्पनी के कर्मचारियों की देखरेख में होता था। प्राप्त जानकारी के अनुसार स्मार्ट चिप कंपनी को 2013 में परिवहन विभाग के कंप्यूटराइजेशन और ऑनलाइन सिस्टम का काम दिया गया था। इसकी अवधि 5 साल के लिए थी, विभागीय अफसरों, शासन और कंपनी की रस्साकसी के बाद कंपनी का कार्यकाल 2022 में खत्म हो गया था, लेकिन कंपनी को तीन महीने का एक्सटेंशन दिया गया था। मगर कंपनी ने काम करने से मना कर दिया। इस तरह से कम्पनी का काम परिवहन कार्यालयों से समाप्त हो गया।

डिण्डौरी के परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में स्मार्ट चिप प्राइवेट लिमिटेड का ठेका समाप्त हो जाने के बावजूद कंपनी का एक कर्मचारी जिसका नाम पंकज डहेरिया बताया जाता है अब भी RTO कार्यालय में बैठकर कार्यालीयन कामकाज करता देखा जा रहा है। सूत्रों की माने तो इसको लेकर कई बार शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं फिर भी RTO अधिकारियों ने कभी कोई कार्रवाई इस अनधिकृत व्यक्ति के विरुद्ध नहीं की और कार्यालय में आज भी इनकी नियमित उपस्थिति देखी जा सकती है।

शिकायतों के बावजूद जारी है गतिविधियां

जानकारी के अनुसार, स्मार्ट चिप लिमिटेड ने प्रदेश के प्रत्येक आरटीओ कार्यालय में अपने कर्मचारियों को नियुक्त किया था, लेकिन ठेका खत्म होने के बावजूद डिण्डौरी आरटीओ में कंपनी के इस कर्मचारी की मौजूदगी पर सवाल उठ रहे हैं। बताया जाता है कि जाता है कि उक्त कर्मचारी कार्यालय में दलाली भर नहीं कर रहा बल्कि कार्यालय के कार्यों को भी अनधिकृत तौर पर करता है। उक्त व्यक्ति बतौर दलाल ही कार्यालय में सक्रिय नहीं है बल्कि उसका व्यवहार आम लोगों के साथ तुर्रेबाज अफसर की तरह होता है जो बेहद आपत्तिजनक है। कुल मिलाकर पिछले लंबे समय से यह व्यक्ति RTO ऑफिस की विभागीय गतिविधियों में पूरी तरह से शामिल देखा जाता है। जानकारी से यह भी उजागर होता है कि यह व्यक्ति कार्यालय के बाहर विभाग द्वारा चलाए जाने वाले जांच अभियान से लेकर जिला कलेक्ट्रेट की बैठक में भी उपस्थित रहता है। जबकि जिला प्रशासन की विभागीय बैठक में ऐसे अनधिकृत व्यक्ति की उपस्थिति आपत्तिजनक है। पर शायद RTO के अधिकारियों का काम ही इस गैर विभागीय बंदे के बगैर नहीं चलता है। आखिर क्या कारण है कि RTO ऑफिस से लेकर विभाग की हर गतिविधि और बैठकों में इस व्यक्ति की जरूरत परिवहन विभाग को पड़ती है। जिला परिवहन विभाग में इसकी घुसपैठ और अधिकारियों का इसके बिना काम नहीं चलने के पीछे की वजहों को लेकर कई तरह की चर्चाएं व्याप्त है, जिनका हम बहुत जल्दी विस्तृत खुलासा करेंगे। इन जनाब का RTO कार्यालय में रसूख और इनकी मनमानी देखकर विभाग का कार्य ऑनलाइन करने वाले, दलाल और वाहन एजेंसियों के मालिकों को भी आपत्ति है क्योंकि बताया यह जाता है कि विभाग के भीतर इनके इशारे के बिना पत्ता तक नहीं हिलता, इसलिए अधिकारियों के जरूरत से अधिक मुंह लगे इस गैर विभागीय आदमी की शिकायत करने से सभी डरते है।

विभाग के अधिकारियों के संरक्षण के चलते यह अन्य दलालों, आम लोगों को अनावश्यक परेशान भी करता है। इस संबंध में 181 पर भी कई शिकायतें दर्ज बताई जाती हैं। लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

शासकीय विभाग में किसी गैर विभागीय व्यक्ति का आवश्यक दखल अथवा अत्यधिक हस्तक्षेप शासन के नियमों के विरुद्ध तो है ही साथ ही साथ यह विभाग के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। उल्लेखनीय है कि विभाग कितना भी दावा करे पर देश प्रदेश के परिवहन विभाग का ज्यादातर कार्य दलालों के माध्यम से ही होता है और हर परिवहन कार्यालय में दलाल सक्रिय है किंतु दलालों की भी एक सीमा होती है जिसके आगे कार्य विभागीय अमले द्वारा किया जाता है। किंतु जिले के परिवहन कार्यालय में उक्त कथित व्यक्ति की भूमिका बहुत आगे तक देखी जाती रही है जिसमें उसका विभागीय बैठकों में शामिल होना और विभाग की जानकारियां पेश करना अत्यधिक आपत्तिजनक है। जिस पर प्रशासन को जांच करवाकर विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और इस व्यक्ति के ऊपर कार्यवाही की जाना चाहिए।

जिला कलेक्टर के साथ बैठक में कैसे शामिल हो सकता है ऐसा व्यक्ति ??

जिस व्यक्ति का हम यहां उल्लेख कर रहे है उसकी RTO कार्यालय में किस कदर तूती बोलती होगी इसका अनुमान तो इस बात से लगाया ही जा सकता है कि उक्त व्यक्ति न सिर्फ जिला कलेक्ट्रेट में होने वाली बैठकों में शामिल होता है। बल्कि कलेक्टर के साथ बैठक करता है और जिला कलेक्ट्रेट के द्वारा अधिकृत रूप से फेसबुक पर होने वाली पोस्ट में उक्त कथित व्यक्ति का नाम भी जनसंपर्क अधिकारी द्वारा लिखा जाता है। अब इस व्यक्ति की विभाग में क्या हैसियत है यह जिला परिवहन अधिकारी और जिला प्रशासन ही बता सकता है।

शासकीय कार्यालयों के संचालन में ऐसे अनधिकृत व्यक्तियों की सक्रियता पर जिला प्रशासन को विशेष रूप से कार्यवाही करना चाहिए़। इस तरह के अनधिकृत लोगों को विभागीय प्रक्रिया में शामिल करने वाले परिवहन अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही होना चाहिए़, साथ ही ऐसे व्यक्तियों के विरुद्ध भी जिला प्रशासन को आवश्यक कानूनी कार्यवाही करना चाहिए़।

विभाग के कर्मचारी नहीं होते हुए भी इस अनधिकृत व्यक्ति के साथ विभाग के अधिकारियों की साठगांठ और संरक्षण का राज क्या है? इसका खुलासा बहुत जल्दी होगा…………..

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