जनसुनवाई में ब्लॉक प्रबंधक टी .के. दास की शिकायत
बैगांचल एक्प्रेस, डिंडौरी, 30 अक्टूबर 2025ष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के विकासखंड प्रबंधक, डिंडौरी टी.के. दास से नगर के एक व्यापारी ने बारह लाख रूपये का तकाजा किया है। व्यापारी ने इस बावद जनसुनवाई में कलेक्टर से शिकायत करते हुये बतलाया है कि ब्लाक प्रबंधक NRLM ने जिला मुख्यालय में संचालित “दीदी कैफे” डिंडोरी और शाहपुर में संचालित “संस्कृति दीदी कैफे” हेतु उपकरण सहित अन्य सामग्री क्रय की थी। लेकिन लम्बा समय बीत जाने के बावजूद ब्लाक प्रबंधक भुगतान करने में टाला मटौली कर रहे हैं। व्यापारी ने “संस्कृति दीदी कैफे” और “आनंदम दीदी कैफे” को टीके दास विकास खंड प्रबंधक एनआरएलएम की मांग पर सामग्री उपलब्ध कराई थी। विकासखंड प्रबंधक द्वारा व्यापारी को आश्वस्त किया गया था कि सामग्री का कुछ ही दिनों में भुगतान कर दिया जायेगा लेकिन सामग्री लेने के बाद भुगतान करने में बहानेबाजी की जा रही है। व्यापारी द्वारा आनंदम दीदी कैफे को स्टील स्टेंड कीमत 36000 रूपये, एलुमिनियम अवा स्टार सिस्टम कीमत लगभग 6 लाख 60 हजार रूपये, परदा एवं अन्य सामग्री लगभग कीमत 14800 रूपये, एलईडी टीव्ही कीमत लगभग 4 लाख 50 हजार रूपये। इसी तरह संस्कृति दीदी कैफे शाहपुर को बाॅल पेपर कीमत लगभग 29000 रूपये, स्टील टेबिल कंेंप कीमत लगभग 1 लाख 19 हजार रूपये, टेबिल टाॅप कीमत लगभग 1 लाख रूपये, फर्श कारपेट कीमत 28000 रूपये, ग्रास रोल कीमत लगभग 63000 रूपये, रेड कारपेट कीमत लगभग 13 हजार 5 सौ रूपये और ब्लेक ग्रांइंडर कीमत 19500 रूपये की सामग्री विक्रय की थी।
अनियमितताओं से घिरा NRLM डिंडौरी ब्लाक
गौरतलब है कि ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा विकासखंड डिंडौरी में संचालित लगभग सभी गतिविधियों में अनियमिततायें हावी रही हैं। वाटरशेड द्वारा समूहों को आवंटित राशि में भी गड़बड़ी बरतने के आरोप ब्लाक प्रबंधक टी.के. दास पर लगे थे। इसके साथ ही समूहो को महंगी दर पर पशु खरीदी और सामग्री खरीदी पर भी बवाल मचा था।
मुख्यालय के नजदीकी ग्राम बिजौरा में संचालित पूर्णिमा स्व सहायता समूह की महिलाओं को लगभग 18 हजार में एक सुअर प्रदाय का मामला भी सुर्खियों में रहा है। अब दीदी कैफे की सामग्री के भुगतान का मामला गरमा गया है। NRLM द्वारा की व्यापारी को भुगतान नहीं किया जाना गंभीर है। इस पूरे मामले की जांच करवाई जाना चाहिए़ की आखिर व्यापारी को भुगतान क्यों नहीं किया गया, किया गया तो भुगतान किसको और कैसे किया गया! NRLM पर इस तरह के आरोप लगते रहे है वही इनकी उपलब्धियों की भी पड़ताल होना चाहिए़ कि आखिर इनके माध्यम से आजीविका के लिए करोड़ो रूपये खर्च होने के बाद भी लोगों को रोजगार के अवसर वास्तव में मिल रहे है या सिर्फ कागजी परियोजनाओं पर सरकारी धन की बर्बादी हो रही है
“दीदी कैफे” की वास्तविकता की जांच होना चाहिए
NRLM द्वारा जिस तरह से आनंदम दीदी कैफे डिंडोरी और संस्कृति दीदी कैफे की प्रोजेक्ट रिपोर्ट पर इन्हें वित्त प्रदान किया गया था वैसी स्थिति में इन कैफे का कारोबार नहीं है। बाजार में ये अपनी पहचान बना पाने में असफल रहे है। कारोबार की दृष्टि से भी ये बहुत सफल नहीं रहे है। ऊपर से बाजार का लाखों रुपए उधार होना जांच का विषय है। शासन से प्राप्त राशि के बाद भी इतनी बड़ी राशि का भुगतान नहीं किया जाना जांच का विषय है। उक्त शिकायत व्यापारी द्वारा जनसुनवाई में की गई है।

