पौड़ी माल : परकोलेशन टैंक निर्माण चढ़े भ्रष्टाचार की भेट

पंचायत ने निजी भूमि में बना दिए टैंक

CEO जिला पंचायत ने दिए है जांच के निर्देश

मनरेगा के कार्यों में लाखों का खेल

बैगांचल एक्प्रेस, डिंडोरी, पंचायतों में निर्माण कार्यों के नाम पर खुले खेल की पोल अब खुलने लगी है। मनरेगा मद के कार्यों में भारी भ्रष्टाचार के पीछे ऊपर से नीचे तक अधिकारियों की मिलीभगत से नकारा नहीं जा सकता। डिंडोरी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत पौड़ी माल में इसी तरह से मनरेगा अंतर्गत परकोलेशन टैंक निर्माण के नाम पर 31. 85 लाख रुपए की लागत से बनवाए गए निर्माण कार्य अनुपयोगी साबित हो रहे है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पंचायत ने 3 टैंको का निर्माण किया है पहला ग्राम पौड़ी में 11.87 लाख रुपए की लागत दूसरा नयगांव में 9.99 लाख रुपए की लागत से और तीसरा टैंक गोयरा रैयत में 9.99 लाख रुपए की लागत से इस तरह कुल 31.85 लाख रुपए के ये तीनों टैंक अनुपयोगी साबित हो रहे है। जिनमें परकोलेशन टैंक निर्माण का उद्देश्य ही पूरा होता नहीं दिख रहा है। दूसरी ओर कार्यों की गुणवत्ता इनके निर्माण में हुए भ्रष्टाचार की कहानी कह रहे है।

पौड़ी में निर्मित टैंक बरसात की मार से फूट चुका है 2022 23 में स्वीकृत उक्त कार्य 2023 – 24 में पूर्ण हुआ है। जिसमें आज दिनांक को एक बूंद भी पानी नहीं है। पंचायत द्वारा ढह चुके इस टैंक को सुधारने की कोशिश शुरू कर दी गई है। शायद इससे घटिया निर्माण और स्थल निरीक्षण हो ही नहीं सकता।

दूसरा टैंक 9.99 लाख की लागत से गोयरा रैयत में निर्मित है। जिसमें थोड़ा बहुत पानी भरा है वही शेष पड़े खाली हिस्से में धान की खेती लहलहा रही है। चूकी ये दोनों ही टैंक पंचायत ने शासकीय भूमि के स्थान पर निजी भूमि में बनाए है। इसके पीछे की खास वजह बताई जा रही है, पंचायत के जिम्मेदारों का निजी स्वार्थ जिसके चलते अपने करीबी रिश्तेदारों की भूमि पर टैंको का निर्माण कर दिया गया। इसके निर्माण में क्या लागत लगी होगी उसका अनुमान भी आसानी से लगाया जा सकता है। लाख दो लाख रुपए खर्च कर दसों लाख रुपए आहरण किया जाना प्रतीत होता है। वही इनकी गुणवत्ता और किए हुए कार्य की जांच करवाकर पंचायत और सब इंजीनियर द्वारा किए गए भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है। कार्य की गुणवत्ता और एस्टीमेट के अनुसार कार्य नहीं होने के साथ बड़ा सवाल इन टैंक निर्माण के स्थल चयन को लेकर है। सब इंजीनियर द्वारा स्थल चयन को लेकर मनमानी स्वीकृति दी गई है जिसका परिणाम यह है कि इन टैंको में जो थोड़ा बहुत पानी संग्रहित भी होगा उसका कोई उपयोग सार्वजनिक हित में किया जाना संभव नहीं है।

ग्रामीणों का आरोप है कि घटिया निर्माण कर पंचायत के जिम्मेदार और एसडीओ, इंजीनियर द्वारा शासकीय राशि का बंदरबांट कर लिया गया है। 31 लाख रुपए से अधिक की शासकीय राशि खर्च होने के बाद भी ये संरचनाएं ग्रामवासियों के लिए लाभदायक नहीं है। इसके बाद भी अब तक ऐसे घटिया कार्यों पर जनपद और जिला पंचायत के अधिकारी शांत बैठे रहे जो दोगुने आश्चर्य का विषय तो है।

इन टैंको को निजी भूमि पर गुणवत्ताहीन बनाए जाने को लेकर जहां ग्राम पंचायत की भूमिका है वहीं अनुपयोगी स्थल चयन और निर्माण कार्य की गुणवत्ता में कमी के पीछे एसडीओ और सब इंजीनियर भी पूरी तरह से दोषी है जिनके द्वारा आंख बंद करके इन कार्यों का फर्जी मूल्यांकन कर राशि का आहरण करने में पूरी मदद की गई है। तत्कालीन रोजगार सहायक घटिया कार्य में अपनी भूमिका को नकार रहे है। जबकि सूत्र बताते है दो टैंक उनके सगे रिश्तेदारों की निजी जमीन पर नियम विरुद्ध उन्हें लाभ पहुंचाने की नियत से बनाए गए है

भ्रष्टाचार के बाद नदारत हो गए अधिकारी

उक्त कार्यों पर जहां भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण के आरोप लग रहे है और ग्रामवासी इसको लेकर आक्रोशित है। वही इन निर्माण कार्यों को करवाने वाले जिम्मेदार तत्कालीन सचिव, निलंबित हो गए है वही सब इंजीनियर का ट्रांसफर हो चुका है, रोजगार सहायक भी अब दूसरी पंचायत में पदस्त है। कार्यों से संबंधित सब इंजीनियर से कार्य की जानकारी लेने हमारे द्वारा कई बार प्रयास किया गया किंतु उनके द्वारा फोन ही रिसीव नहीं किया जा रहा है।

जिला पंचायत सीईओ ने दिए है जांच के निर्देश

सीईओ जिला पंचायत द्वारा ग्राम पौड़ी के उक्त कार्यों का निरीक्षण कर न सिर्फ इस पर नाराजगी जताई है बल्कि इनकी जांच कर 3 दिवस में रिपोर्ट देने के भी निर्देश दिए है। आगे इस पर क्या कार्यवाही की जाती है यह देखना होगा।

जिला और जनपद के अधिकारियों का संरक्षण

पंचायत द्वारा लाखों रुपयों के भ्रष्टाचार और सरकारी राशि की बर्बादी पर जिला और जनपद के अधिकारियों, योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही उजागर हो रही है। जिन पर जिला सीईओ को जरूर कार्यवाही करना चाहिए। इनके संरक्षण के बिना इस तरह खुला भ्रष्टाचार संभव नहीं है। पंचायतों को राशि आबंटित करने वाले अधिकारियों का भी दायित्व है कि कार्यों की निगरानी करे, किंतु इस कार्य की स्थिति देखकर यहां लगता है कि इस तरफ किसी ने जानकर भी नजर नहीं डाली। ऐसे सभी अधिकारियों पर कार्यवाही की जाना चाहिए़।

इनका कहना है :

“उक्त कार्यों में पंचायत द्वारा भारी भ्रष्टाचार किया गया है। घटिया कार्य कराए गए है और ग्रामवासियों के विरोध के बाद भी निजी स्वार्थ के चलते टैंक रोजगार सहायक के रिश्तेदारों की भूमि पर बनाए गए है। इनकी जांच कराकर दोषियों पर कार्यवाही की जाना चाहिए।

चंद्रिका गोस्वामी
समाजसेवी
ग्राम पौड़ी माल

“उक्त कार्यों की मुझे कोई जानकारी नहीं है। ये निर्माण मेरे कार्यकाल में नहीं हुए है। जानकारी मिली है कि सीईओ जिला पंचायत द्वारा कार्यों का निरीक्षण किया गया है किंतु संघ की हड़ताल के चलते मै दौरे के समय उपस्थित नहीं था।”

अमित नानोटे
सब इंजीनियर,

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