अधिकारियों के संरक्षण में फलफूल रहा पंचायतों में भ्रष्टाचार
बैगांचल एक्सप्रेस, डिंडोरी, जिले की तमाम ग्राम पंचायतें सिर से लेकर पांव तक भ्रष्टाचार में डूबी हैं। पंचायती राज के नाम पर कागजों की आड़ में चोरी, डकैती या कहें सिर्फ भ्रष्टाचार का नंगा नाच चल रहा है। पंचायतों में हो रहे कारनामों पर लगाम लगाना नवागत जिला सीईओ के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। इस पर लगाम तभी लग पाएगा, जब सरकारी नियमों का कड़ाई से पालन करवाया जाए, अन्यथा भ्रष्टाचार का यह तमाशा पूर्ववत चलता रहेगा।


कोरे बिल के भुगतान की प्रक्रिया: चटुआ पंचायत में बड़ा फर्जीवाड़ा
ताजा मामला जिला मुख्यालय की जनपद पंचायत डिंडोरी की ग्राम पंचायत चटुआ का है, जो मुख्यालय से मात्र 10 किमी की दूरी पर स्थित है। यहां से जिस तरह के फर्जीवाड़े का खुलासा हो रहा है, वैसा मामला प्रदेश में कहीं और शायद ही देखने को मिला होगा।
खुलासा: ग्राम पंचायत चटुआ के जिम्मेदार सरपंच और सचिव ने ‘पंचायत दर्पण’ पोर्टल पर भुगतान के लिए एक ऐसा बिल (पेंटर आनंद का) जमा किया है, जिसमें बिल देने वाले व्यक्ति द्वारा राशि ही अंकित नहीं की गई है। नियम-कायदों को ताक पर रखकर, सरपंच और सचिव ने उस कोरे बिल पर अपने हस्ताक्षर करके उसे भुगतान हेतु प्रेषित कर दिया और उसे स्कैन करके पोर्टल पर भी लगा दिया।
अनियमितता: पोर्टल पर दर्शाई गई जानकारी के अनुसार, उक्त बिल की भुगतान राशि मात्र ₹3500 है। यह छोटी राशि ग्राम पंचायतों में चल रही बड़ी और घोर लापरवाही या बड़े फर्जीवाड़े का एक नमूना है। सूत्रों के अनुसार, ग्राम पंचायत के जिम्मेदार ऐसे कई कोरे बिल अपनी जेब में डालकर चलते हैं, और अपनी जरूरत व सुविधा के अनुसार इनमें राशि भरकर भुगतान निकाल लेते हैं।
इस मामले में, जल्दबाजी में किए गए फर्जीवाड़े में यह उजागर हो गया है कि बिल देने वाले ने भुगतान की राशि का उल्लेख नहीं किया, फिर भी ग्राम पंचायत ने अपनी मर्जी से ₹3500 का भुगतान करने उसे प्रेषित कर दिया। जबकि नियमतः अधूरे बिल को रद्द कर फर्म से पूर्ण रूप से बना बिल प्राप्त किया जाना चाहिए था।
’मानवीय चूक’ कहकर माफ कर रहे ‘दरियादिल’ अधिकारी
“मानवीय चूक’ कहकर माफ कर रहे ‘दरियादिल’ अधिकारी
ग्राम पंचायतों में चल रही इस तरह की गड़बड़ियां जिले में आम बात हैं। आरोप है कि जिले और जनपद में बैठे अधिकारी पंचायतों की ऐसी सैकड़ों गलतियां माफ करते रहते हैं। ऑनलाइन प्लेटफार्म पर उपलब्ध आर्थिक अनियमितता के दस्तावेजी साक्ष्य को भी मानवीय चूक या छोटी मोटी भूल मानकर माफी दे देना जनपद और जिला पंचायत के अधिकारियों का ‘बड़प्पन’ है, या उनकी ‘जेब की मजबूरी’, यह तो वे ही जानें। आमजनता का मानना है कि ग्राम पंचायतों द्वारा किए जाने वाले भ्रष्टाचार में ये सब हिस्सेदार रहते हैं, इसीलिए भ्रष्टाचार के मामलों में लीपापोती कर सरपंच और सचिव को बचा लिया जाता है।
ग्राम पंचायत बिल को गलत नहीं मानती
उक्त मामले पर जब हमारी टीम ने पंचायत का पक्ष जानने के लिए सचिव से संपर्क किया तो, सचिव राममिलन ठाकुर का कहना है कि पार्टी का बिल एड है। सचिव यह मानने को तैयार नहीं है कि उनके द्वारा लगाया गया बिल गलत है या उनसे कोई भूल हो गई है।
ग्राम पंचायतों के बड़े-बड़े मामले दफन
यह मामला भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का अद्भुत नमूना है, जिसमें सरकारी प्रक्रिया का खुला उल्लंघन हुआ है। हालांकि, जिले में अधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचार को संरक्षण देने की परंपरा को देखते हुए, ऐसे लापरवाह और भ्रष्ट सरपंच, सचिव पर कार्यवाही की उम्मीद कम ही जान पड़ती है। आमजनता भ्रष्टाचार में सुधार को लेकर नाउम्मीद हो चुकी है, क्योंकि कई बड़े मामलों में भी प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई है:
सोलर लाइट्स घोटाला: पिछले दिनों जिले की लगभग 52 ग्राम पंचायतों द्वारा लगभग ₹2 करोड़ की प्रतिबंधित सोलर लाइट्स मनमानी दर पर, बिना निविदा और सरकारी खरीदी प्रक्रिया अपनाए खरीदे जाने के मामले में कोई कार्यवाही नहीं हुई। माखियाखार ग्राम पंचायत में मामले की जांच में अनियमितताएं पाई भी गई थीं।
एलईडी स्ट्रीट लाइट मरम्मत घोटाला: करंजिया जनपद की ग्राम पंचायत सेनगुड़ा में ₹80 हजार की एल ई डी स्ट्रीट लाइट की मरम्मत के नाम पर ₹44 हजार खर्च किए गए, और इसके एवज में जेसीबी मशीन और मुरम भुगतान का बिल लगाया गया था। यह मामला भी बैगांचल एक्सप्रेस द्वारा उजागर किया गया था, पर कार्यवाही शून्य रही।


