जिले के किसानों ने समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन की मात्रा 40 क्विंटल हैक्टर किए जाने की मांग की

जिला कलेक्टर के नाम सौंपा ज्ञापन

बैगांचल एक्प्रेस, डिंडोरी, जिले के किसानों ने समर्थन मूल्य पर धान विक्रय किए जाने हेतु पंजीयन में धान की मात्रा 40 क्विंटल प्रति हैक्टेयर किए जाने की मांग जिला प्रशासन से की है। किसानों का कहना है कि कम मात्रा का पंजीयन किए जाने से हमारी उपज का बड़ा हिस्सा हमें खुले बाजार में कम कीमत पर बिचौलियों को बेचना पड़ता है, जिससे हम किसानों की आय कम होती है। जिले में प्रति हैक्टेयर धान की जो उपज शासन द्वारा निर्धारित की गई है उससे किसान जो अधिक परिश्रम करके अधिक से अधिक लागत लगाकर धान की अधिक पैदावार करने की कोशिश कर रहे है उन्हें काफी नुकसान हो रहा है। किसानों ने अन्य जिलों से आधे उत्पादन के निर्धारण को गलत बताया जिसका कोई प्रमाणिक आधार नहीं है। जिले में प्रति हैक्टेयर के मान से 20 क्विंटल का पंजीयन किया जा रहा है यह निर्धारण किस आंकलन/ जानकारी के आधार पर किया गया है इसकी किसी को जानकारी ही नहीं है। ज्ञात तत्व है कि पिछले वर्षों में लगातार जिले में धान का उत्पादन बढ़ा है। जिसकी प्रामाणिकता विगत वर्षों के उपार्जन केंद्रों के आंकड़ों से की जा सकती है। उक्त संबंध में जिला मुख्यालय में किसानों ने एक ज्ञापन जिला कलेक्टर को सौंपा जिसमें प्रति हैक्टेयर 40 क्विंटल के मान से किसानों का पंजीयन समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन हेतु किए जाने की मांग रखी है।

सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार जिले में प्रति हेक्टेयर 22 क्विंटल धान के मान से पंजीयन हो रहा है।जबकि हम समस्त किसानगण कड़ी मेहनत कर प्रति हेक्टेयर 45-50 क्विंटल धान उपजा रहे हैं। उपजाई गई पूरी धान को समर्थन मूल्य पर खरीदी न होने पर हम किसानों को खुले बाजार में बिचौलियों या व्यापारियों को मजबूरन कम दामों पर विक्रय करना पड़ता हैं। जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाने पड़ रहा है। पड़ोसी मंडला जिले में प्रति हेक्टेयर 44 क्विंटल के मान से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी किसानों से की जाती है वही डिंडौरी जिले में प्रति हेक्टेयर 22 क्विंटल धान खरीदी की जा रही है। विगत वर्ष भी हम समस्त किसानों के द्वारा मुख्यमंत्री महोदय एवं कलेक्टर महोदय को ज्ञापन सौंप कर इस समस्या से अवगत कराया गया था लेकिन आज तक समाधान हेतु कोई पहल नहीं की जा रही है। अतः निवेदन है कि प्रति हेक्टेयर 22 क्विंटल से बढ़ाकर 40-45 क्विंटल के मान से पंजीयन कराए जाने हेतु समुचित कार्रवाई करने की कृपा करें। यदि धान विक्रय किए जाने से पूर्व किसानों को राहत देने का निर्णय नहीं लिया जाता है तो आगामी दिनों में किसान धरना प्रदर्शन एवं आंदोलन करने पर बाध्य होंगे, जिसकी संपूर्ण जवाबदेही जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार की होगी।

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