BEO और संकुल प्राचार्य की मनमर्जी से 3 बजे लग गया स्कूलों में ताला

अधिकारियों की नादिरशाही की जांच की जाए

बैगांचल एक्प्रेस,डिंडोरी, बजाग विकास खंड अंतर्गत संकुल केंद्र चांडा में शाम 4 बजे से एक बैठक होने का आदेश शुक्रवार रात को वाट्स एप ग्रुप में सभी शिक्षकों को प्राप्त हुआ जिसमें संकुल केंद्र चांडा के समस्त प्राथमिक माध्यमिक, हाई स्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कूल के समस्त नियमित और अतिथि शिक्षक को मीटिंग में शामिल होने का आदेश दिया गया। आदेश के चलते शनिवार को संकुल के सभी सरकारी विद्यालय दोपहर 3 बजे ही बंद हो गये। सभी शिक्षकों को बैठक में जान था इसलिए बच्चों की छुट्टी कर दी गई और स्कूलों में समय से पहले ताले लग गए बच्चों को घर रवाना कर दिया गया।

क्षेत्र के दर्जन भर विद्यालय जिसमें कुछ 15-20 किलोमीटर दूर है, जैसे फिटारी, कुदवाडील, खपरीपानी, खमहेरा, मिढली, कुछ 10 -15 किमी जैसे धुरकुटा , कांदावानी, लमोठा, शीतलपानी, मिढली, ताला, भुरसी, तरच, और कुछ चांडा ग्राम पंचायत के विद्यालय तातंर, और चांडा के प्राथमिक, माध्यमिक, हाई स्कूल और हायर सेकंडरी विद्यालय के शिक्षक, अतिथि शिक्षक को चांडा संकुल केंद्र में 4 बजे से बैठक में शामिल होने के चलते दर्जनों विद्यालय बंद करना पड़ा।

शासकीय विद्यालय 4 बजे तक संचालित होते हैं और वाट्स एप में जारी हुए उक्त आदेशानुसार 4 बजे मीटिंग में पहुंचना था और शिक्षक के पास कोई जादू की छड़ी तो नहीं जो एक मिनट में स्कूल से संकुल केंद्र चांडा तक पहुंचे। जंगल भरे उबड खाबड़ रास्तों पर चलते हुए पहुंचे शिक्षकों ने समय से पहले स्कूल बंद कर दिया और मीटिंग में शामिल हुए जिसके दर्जनों विद्यालय समय से पहले बंद हो गये। महत्वपूर्ण यह है कि विद्यालय को बंद कर मीटिंग रखने का आदेश क्या प्रशासनिक अधिकारियों ने दिया था या वर्तमान संकुल प्राचार्य और विकास खंड अधिकारी स्वयं ही प्रशासन हो गये। आखिर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ और अनुशासनहीनता दर्जनों विद्यालय और सैकड़ो शिक्षक तनावग्रस्त रहे। अतिथि शिक्षकों को तक बुला लिया गया जैसे कोई बहुत बड़ी योजना में कार्यवाही की जाना हो। सूत्रों के अनुसार बैठक के लिए जारी संदेश वाट्सअप पर आया जिसमें सभी शिक्षकों को बैठक में आना अनिवार्य बताया गया था और नहीं पहुंचने वाले शिक्षक का एक दिवस का वेतन काटे जाने का भी उल्लेख था। इतनी महत्वपूर्ण बैठक किस विषय पर थी इसका खुलासा कोई नहीं कर रहा है मामले पर हो हल्ला मच जाने के बाद शिक्षक भी इस पर कुछ बोलने से बच रहे है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को बैठक की आवश्यकता और संकुल प्राचार्य के को शिक्षकों का वेतन काटने का अधिकार है या नहीं इसकी समीक्षा कर उचित कार्यवाही करना चाहिए़। सवाल यहां यह भी उठता है कि जब सभी शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति लगती है और स्कूल की छुट्टी के बाद शिक्षक पोर्टल पर लॉगऑफ होते है तो ऐसे में समय से पहले अवकाश किया जाने से इस व्यवस्था के प्रभावित होने की स्थिति भी बनती है इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा।

जब मामले की जानकारी लेने प्रभारी संकुल प्राचार्य से बात की तो उन्होंने कैमरे के सामने बोलने से आनाकानी कर बताया कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी के आदेश से यह बैठक रखी गई थी। विकास खंड शिक्षा अधिकारी ने बताया कि शिक्षकों को स्कूल समयावधि के बाद मीटिंग के लिए बुलाया गया था।

स्कूल बंद करके रखी गई बैठक का एजेंडा क्या था बैठक विभाग के निर्देश पर रखी गई थी या संकुल प्राचार्य की मर्जी से इसकी पड़ताल वरिष्ठ अधिकारियों की करनी चाहिए। इस तरह की मनमानी बच्चों की शिक्षा के प्रति लापरवाही पर अंकुश लगाया जाना आवश्यक है।

इनका कहना है

विकासखंड शिक्षा अधिकारी के आदेश पर यह मीटिंग रखी गई थी और स्कूल बंद की बात मुझे नहीं पता

अखिलेश प्रजापति, प्रभारी संकुल प्राचार्य

विद्यालय समयावधि के बाद मीटिंग रखी गई थी

  • तीरथ परस्ते, बीईओ बजाग

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