बैगाचक की महिलाओं ने सामूहिक रूप से रखा “बिजली उपवास”

बादल-बिजली जैसी आपदाओं को दूर भगाने के लिए महिलाओं ने की इंद्रदेव की आराधना

बैगांचल एक्प्रेस, डिंडोरी, 7 अक्टूबर 2025, बजाग प्राकृतिक आपदा से निजात पाने बैगाचक क्षेत्र की महिलाओं ने सोमवार को सामूहिक रूप से बिजली उपवास रखा। आदर्श ग्राम पंचायत चांडा के दादर टोला की सैकड़ों महिलाओं ने व्रत रखकर बादल, बिजली जैसी प्राकृतिक आपदा को दूर भगाने लिए गांव की सरहद पार कर इंद्रदेव की आराधना की, और बारिश के दौरान बादल से उत्पन्न होने वाले संकट से छुटकारा दिलाने की कामना की। इसके लिए पहले तो गांव बस्ती की सभी महिलाओं ने चंदा एकत्रित किया। चंदे की राशि से उन्होंने पूजन सामग्री और प्रसाद सहित अन्य सामग्रियां खरीदी। सैकड़ों जनजातीय महिलाओं ने सुबह से व्रतधारण कर गांव की सीमा पार 4 किमी. पैदल दूरी तय करते हुए पूजन स्थल पहुंची। गांव की अन्य महिलाएं समेत ज्यादातर बैगा समाज की महिलाएं ने साल वृक्षों के बीच जंगल में पहुंचकर मिट्टी का एक टीला और छींद के पौधे की खोज की, जिसके बाद बादल देवता को मनाने उनकी पूजा अर्चना की। महिलाओं ने बादल देवता को नारियल, सुपारी, सुई, कपड़ा, प्रसाद और अन्य सामग्री अर्पित की। साथ ही दूध और जल चढ़ाकर इंद्रदेव से आसमानी बिजली जैसी आफत से बचाने का आह्वान
किया। जिसके बाद सभी महिलाएं एक स्थान पर जमा होकर प्रसाद ग्रहण किया।

व्रत को लेकर ग्रामीणों की यह है मान्यता :

ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली उपवास रखने के पीछे आदिवासी ग्रामीण महिलाओं की मान्यता है कि यह व्रत इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए धारण किया जाता है। इसमें छींद के पौधे की पूजा की जाती है और क्षेत्र के इर्द गिर्द आसमानी बिजली जैसी आपदा प्रकट न हो आपदाओं को गांव की सीमा से बाहर भागने के लिए गांव के बाहर अनुष्ठान किया जाता है। पूजा के दौरान बादल देवता को सुई को वाण का प्रतीक मानकर अर्पण किया जाता है।

प्राकृतिक आपदा से बचने रखा व्रत

दादरटोला की एक बैगा बुजुर्ग महिला ने बताया कि बादलों से प्रकट होने वाली प्राकृतिक आपदा से बचने के लिए गांव की लगभग सैकड़ों महिलाओं ने बिजली व्रत धारण किया है। यह सिलसिला सालों से चला आ रहा है। जानकारी के अनुसार यह व्रत प्रतिवर्ष सावन भादों से लेकर कुवांर, कार्तिक के महीनें तक सोमवार के दिन ही धारण किया जाता है और आपदा विपदा को गांव की सरहद पार बाहर करने पूजा की जाती है। महिलाओं ने ने बताया कि बरसात के दिनों में खेत में काम करने के दौरान अक्सर बादल बिजली का खतरा बना रहता है। जान माल का नुकसान से बचा जा सके इसके लिए ही यह अनुष्ठान किया जाता है।


गौरतलब है कि प्राकृतिक बिजली खेत, जंगल और घरों में गिरने से प्रतिवर्ष कई लोगों और मवेशियों की मौत होती है। जिसके लिए प्रभावित परिवार को शासन द्वारा सहायता राशि भी दी जाती है। उक्त प्राकृतिक आपदा से बचाव के लिए जनजाति पहले से सचेत है और वे परंपरागत रूप से बिजली से बचाव के लिए धार्मिक अनुष्ठान करते आ रहे है।

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