बरबसपुर पंचायत में सरकारी धन की होली, जवाबदारों को नहीं परवाह
भ्रष्टाचार के खिलाफ क्या कर रहा है जिला प्रशासन?

बैगांचल एक्प्रेस, डिंडोरी, 25 सितंबर 2025, जिले में सरकारी धन की खुली लूट मची है। पंचायतों की स्थिति यह है कि लाखों रुपए कही भी, किसी को भी, बिना काम के, नियम कानून को धत्ता बताकर बांटे जा रहे है और उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ पा रहा है। पंचायतों में भ्रष्टाचार का जो आलम दिखाई दे रहा है उससे लगता ही नहीं कि जिले में सरकारी धन की लूट को रोकने वाला कोई है। पुलिस प्रशासन सब मूक दर्शक बने बैठे है और ग्राम पंचायतें हर वर्ष लाखों करोड़ों रुपयों की होली खेल रहे है। मीडिया इस मुद्दों पर खबरें उजागर कर रहा है, ग्रामीण भ्रष्टाचार की शिकायतें जनपद, जिला पंचायत से लेकर जिला कलेक्टर तक पहुंचा रहे है तब भी खुला भ्रष्टाचार करने वालों की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। सरकारी धन के इस बंदरबांट में जनपद पंचायत और जिला पंचायत का अमला तो शामिल है ही बाकी के प्रशासनिक विभाग और अधिकारियों पर भी जनता उंगली उठा रही है क्योंकि चोरी और भ्रष्टाचार खुलेआम चल रहा है तब भी कार्यवाही के नाम पर कुछ होता नहीं दिख रहा है। सही मायने में अब समय अधिकारियों को अपनी साख बचाने का है क्योंकि आम जनता की नजर में प्रशासनिक व्यवस्था का कद बहुत ज्यादा गिरता जा रहा है।
“पंचायत भवन” निगल गए सरपंच और सचिव

न केवल ग्राम पंचायत बरबसपुर निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार और घटिया निर्माणों के कई मामलों में घिरा हुआ है बल्कि सभी पंचायतों में सरकारी धन के लूट की स्थिति एक सी है। पर करंजिया जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत बरबसपुर इस मामले में सबसे आगे निकल चुकी है। पंचायत के जिम्मेदार अपनी ग्राम पंचायत का “पंचायत भवन” ही निगल गए जिसके बाद भी उनको कोई असर नहीं पड़ा। जैसे नागिन अपने सपोलों को खाकर भी बेपरवाह घूमती है वही स्थिति बरबसपुर ग्राम पंचायत की सरपंच और सचिव की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2021 – 22 में ग्राम पंचायत भवन के निर्माण हेतु 15 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई, जिससे बाकायदा भवन निर्माण प्रारंभ किया गया किंतु निर्माण कार्य नींव से ज्यादा ऊपर नहीं उठ पाया पर जिम्मेदारों ने पूरी स्वीकृत राशि उड़ा दी और अब की स्थिति में चार वर्ष बीतने के बाद भी पंचायत भवन की नींव वैसी की वैसी ही पड़ी हुई है। बल्कि वर्षों पूर्व के इस अधूरे निर्माण कार्य की स्थिति और अधिक जर्जर हो गई है, लोहे की रॉड पूरी तरह जंग खा चुकी है, बीम के नीचे की मिट्टी बह चुकी है। जिससे अब किए गए इस निर्माण का उपयोग किया जाना तकनीकी आधार पर तो संभव नहीं है।
सरपंच का कहना है ठेके पर दिया गया था भवन का निर्माण

नियमानुसार पंचायत भवन का निर्माण करने वाली एजेंसी ग्राम पंचायत बरबसपुर है। जिसे ठेके पर नहीं दिया जा सकता था। किंतु जिले भर की ग्राम पंचायतों में सप्लायर्स के नाम पर कथित माफिया हावी है जिन्हें स्थानीय नेताओं का संरक्षण प्राप्त होता है। वे ही ग्राम पंचायतों में सरकारी धन की होली खेल रहे है और जनपद स्तर के अधिकारी इनके डर से कोई कार्यवाही करने का दम नहीं दिखा पाते, चुपचाप इस लूट खसोट को देखते रहते है। किंतु बरबसपुर ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती सुकवरीया उईके ने हमारे प्रतिनिधि को खुलकर बताया कि उक्त कार्य ठेके पर दिया गया था और ठेकेदार ने काम पूरा नहीं किया। पंचायत, निर्माण कार्य ठेके पर दे सकती है और कथित ठेकेदार की जानकारी महिला सरपंच को नहीं है। वह उनके पति बता पाएंगे क्योंकि ग्राम पंचायत के सारे कामकाज वही देखते है। हमारे प्रतिनिधि का सरपंच पति से कई प्रयासों के बाद भी संपर्क हो नहीं पाया।
बेपरवाह है पंचायत सचिव
पंचायत के बेपरवाह सचिव शंकर मार्को जो कि सेनगुडा और बरबसपुर दो पंचायतों के प्रभार में है। उनसे इस अधूरे भवन निर्माण की वस्तुस्थित समझने और उनका पक्ष जानने के लिए हमारे प्रतिनिधि द्वारा प्रयास किया गया किंतु पंचायत में अनुपलब्ध सचिव ने बार बार फोन करने के बाद भी फोन रिसीव करने की तोहमत नहीं उठाई।
कार्यस्थल पर लगा बोर्ड स्पष्ट करता है कि पंचायत भवन निर्माण हेतु 15 लाख रुपए की राशि स्वीकृत हुई थी जिससे 4 साल बाद कार्यस्थल पर मात्र जर्जर नींव दिखाई दे रही है। पंचायत की सरपंच का अधिकृत बयान है कि ठेकेदार ने पैसा लेकर काम नहीं किया। ऐसी स्थित में जिम्मेदार सरपंच और सचिव ने क्या कार्यवाही की, भुगतान किसको किया गया, चार साल बाद भी पंचायत भवन अधूरा क्यों है, सब इंजीनियर मूल्यांकन और भुगतान के लिए कितने जिम्मेदार है, जनपद पंचायत की समीक्षा बैठकों में राशि आहरण और अपूर्ण भवन पर अधिकारियों ने क्या कार्यवाही की यह जांच का विषय है। पर सबसे बड़ी समस्या यह ही है कि जांच कौन करवाएगा? सरकारी धन की खुलेआम लूट रोकने की जिम्मेदारी सरकार ने किसे सौंपी है? वर्षों बाद भी अब तक जनपद और जिला पंचायत की समीक्षा बैठकों में चार वर्षों से अधूरे पड़े निर्माण कार्य पर जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई कार्यवाही क्यों नहीं की?
पुराने भवन में चल रही ग्राम पंचायत

सरकार के 15 लाख रुपए की राशि खर्च होने के बाद भी पंचायत पुराने भवन में ही संचालित हो रही है इसके लिए कौन जिम्मेदार है! ठेकेदार के पैसे खाकर भाग जाने, सरपंच, सचिव द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किए जाने से पंचायत का कामकाज छोटे से पुराने पंचायत भवन से ही संचालित हो रहा है। जिसमें ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या से निपटने के लिए नवीन पंचायत भवन निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। किंतु नकारा सचिव, सरपंच अपना पंचायत भवन ही निगल गए जिससे अब भी ग्राम पंचायत पुराने भवन में ही संचालित हो रही है।

सरपंच सचिव को मिलनी चाहिए कड़ी सजा
जिले के वरिष्ठ अधिकारियों और प्रशासन द्वारा पंचायतों में व्याप्त भ्रष्टाचार को रोकने के दिशा में कठोर कार्यवाही की जानी चाहित। इस तरह के भ्रष्टाचार के मामले में पैसा डकार कर चुपचाप बैठे सरपंच और सचिव सहित कथित माफिया ठेकेदार के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही कर FIR दर्ज करवाकर उन्हें जेल भेजे बिना ऐसे मामलों से जिले को राहत नहीं मिलने वाली। जिले की पंचायतों में सरकारी राशि की वसूली के सैकड़ों प्रकरण लंबित है जिनमें रिकवरी नहीं के बराबर हो पा रही है। सरपंच, सचिव को पद से हटाने की कार्यवाही पर भी उन्हें राहत मिल जाती है। पंचायतों को भ्रष्टाचार से बचाना है तो सरकारी धन की होली खेलने के लिए जिम्मेदार सरपंच, सचिव और कथित ठेकेदारों को जेल भेजने की कार्यवाही, जिला प्रशासन को करनी ही पड़ेगी। इसके बिना यहां चल रहा खुला भ्रष्टाचार रुकने वाला नहीं है। स्थानीय ग्रामीणों की भी मांग है कि जिम्मेदार पदाधिकारियों पर कार्यवाही हो और पंचायत भवन का निर्माण पूर्ण कराया जाए।


आगे ……
ग्राम पंचायत के घटिया निर्माण कार्यों ,गड़बड़ियों, फर्जी भुगतान के कई मामलों की शिकायतें ग्रामवासी करते रहे है। खुली लूट में जुटे पंचायत के जिम्मेदारों के कारनामे का अगला खुलासा बहुत जल्दी किया जाएगा।
