भ्रष्टाचार पर आंख बंद करके बैठे है जनपद के अधिकारी
तकनीकी मूल्यांकन के बिना हो रहा निर्माण कार्यों का भुगतान
बैगांचल एक्प्रेस, डिंडोरी, 19 सितम्बर 2025, जिले की पंचायतों में खुला भ्रष्टाचार जारी है, जिसमें जनपद पंचायत के अधिकारियों और जिला पंचायत की नीतियों का खुला संरक्षण है। पंचायतों द्वारा करोड़ो रुपए के निर्माण कार्य किए जा रहे है जिन पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी जनपद पंचायत की है किंतु जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों को इससे कोई लेना देना नहीं है। वही जिला पंचायत द्वारा मनरेगा का अलावा अन्य निर्माण कार्यों के भुगतान में तकनीकी अधिकारी के मूल्यांकन के बिना ही भुगतान करने की छूट ग्राम पंचायतों को दे रखी है। जिसके चलते पंचायतों द्वारा मनरेगा के अतिरिक्त अन्य मद से होने वाले निर्माण कार्यों का मनमाना भुगतान किया जा रहा है। स्वीकृत राशि का आहरण बिना कार्य कराए ही कर लिया जाता है। इन कार्यों में तकनीकी स्वीकृति भर तकनीकी अधिकारी से ली जाती है भुगतान बिना तकनीकी परीक्षण और मूल्यांकन किया जाता है जो भ्रष्टाचार और मनमाने भुगतान का बड़ा कारण है।

ऐसा ही एक अजीबो गरीब मामला ग्राम पंचायत अंगई का सामने आया है जिसने निर्माण कार्य की सारी राशि का भुगतान सामग्री सप्लायर्स को कर दिया गया और काम पूरा होना बताया जा रहा है। खेल मैदान में रंगमंच निर्माण कार्य की स्वीकृति पांचवां राज्य वित्त आयोग से 25/1/2025 से राशि 5,68,000 की राशि स्वीकृत की गई। और उक्त कार्य का भुगतान निर्माण सामग्री के बिलों 198000 और 3,70,000 अप्रैल माह में कर दिया गया इस तरह से कुल स्वीकृत राशि 568000 रुपए का भुगतान सप्लायर्स को कर दिया गया। इस तरह सप्लायर्स के नाम पूरी राशि का भुगतान कर पंचायत द्वारा हेराफेरी किया जाना स्पष्ट है। क्योंकि जब पूरी राशि की सामग्री खरीद ली गई तो निर्माण कार्य में मजदूरों का भुगतान कहा से किया जाएगा इसके अलावा सटरिंग, लोहा बांधने आदि अन्य कार्यों का भी भुगतान किया गया जाना था, तब पूरी राशि का भुगतान केवल मटेरियल सप्लायर्स को किया जाना कैसे भी संभव नहीं है। इस तरह मनमाने भुगतान कर निर्माण कार्य करवाए जाने से स्पष्ट है कि पंचायत द्वारा पहले सप्लायर्स को भुगतान कर राशि का आहरण कर मनमाने तरीके से कार्य को अंजाम दिया गया है। कार्य की तकनीकी स्वीकृति के अनुसार भी किए गए भुगतान नियमों के विरुद्ध है। किंतु इस तरह के अनियमित और मनमाने भुगतान पर जनपद पंचायत की किसी तरह की देखरेख नहीं होना जाहिर है कि अधिकारी खुले भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रहे है।
मनमानी दर से सामग्री का भुगतान
ग्राम पंचायत द्वारा जिन बिलों का भुगतान किया गया है उनमें एक ही सामग्री का अलग अलग दर पर भुगतान किया जाना सरपंच और सचिव के कारनामे पर सवाल खड़ा करते है। एक सप्लायर से रेत 20 हजार रुपए प्रति गाड़ी खरीदी गई तो वहीं दूसरी फर्म से 25 हजार रुपए की दर से खरीदी गई। जिस फर्म की कीमत अधिक है उससे अधिक रेत खरीदी गई जबकि कम दर पर रेत देने वाली फर्म से कम रेत खरीदी गई। इसी तरह एक फर्म का गिट्टी का भाव 14 हजार रुपए डंफर है दूसरे का भाव 25 हजार रुपए। पंचायत महंगी दर वाली फर्म से अधिक माल लेती है। जो पंचायत की मनमानी का उदाहरण है। इसकी जांच कराकर जिम्मेदार पंचायत के विरुद्ध कार्यवाही की जानी चाहिए।

इस तरह की मनमानी खरीद और शासकीय राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है जिस पर जनपद पंचायत के अधिकारियों को कठोर कार्यवाही करना चाहिए किंतु जनपद पंचायत ऐसी वित्तीय अनियमितताओं और गड़बड़ियों पर ग्राम पंचायतों के विरुद्ध कार्यवाही करने की बजाय उनको संरक्षण दे रहा है जिससे ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार दिनों दिन बढ़ता जा रहा है।

