बिजली बिल का भुगतान के नाम पर सचिव ने पंचायत के खाते से राशि का किया गबन

पंचायत के खाते से एक लाख बीस हजार हड़पने का मामला

जिला पंचायत CEO से की गई शिकायत : कार्यवाही नहीं

विद्युत विभाग के खाते में भुगतान नहीं हुआ

बैगांचल एक्प्रेस, डिंडोरी, 16 सितंबर 2025, बजाग जनपद पंचायत की ग्राम पंचायतो में अंधेर मचा हुआ है, इन दिनों इन मामलों की चर्चा चारों ओर हो रही है। अलग अलग ग्राम पंचायतों द्वारा मनमाने बिल लगाकर चहेती फर्मों को भुगतान कर फायदा पहुंचाने का काम किया जा रहा है। सरकारी राशि हड़पने के लिए नियम कायदो को ढेंगा दिखा रहे है पंचायत के जिम्मेदार। जानकर भी अंजान बने हुए है कई कई पंचायतों में तो सीधे सीधे फर्जी और बोगस बिल लगाकर शासन को चुना लगाया जा रहा है। पंचायतों द्वारा इस तरह से की जा रही खुली छूट की वजह अप्रत्यक्ष तौर पर पंचायत के अधिकारियों का संरक्षण है, जिनके द्वारा ऐसे मामलों पर पूरी तरह आंख बंद कर ली गई है। ऐसे ही मामलों में प्रदेश के अन्य जिलों में फर्जी वेंडरों, पंचायत प्रतिनिधि, कर्मियों से लेके जनपद CEO तक के खिलाफ मामले दर्ज करवाए गए है, कानूनी कार्यवाही की जा रही है पर डिंडोरी जिले में वरिष्ठ अधिकारी ऐसे सभी मामलों पर मौन है इसके पीछे की वजह भी आम लोगों के बीच चर्चा का विषय है।

ऐसा ही एक मामला सारंगपुर ग्राम पंचायत में सामने आया है जहां सरपंच पर्वत सिंह और सचिव घनश्याम परस्ते ने सांठगांठ कर ग्राम पंचायत के खाते में सेंध लगाते हुए सीधे सीधे सरकारी राशि ही उड़ा दी। ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों ने पारदर्शिता के लिए पंच परमेश्वर मद से प्राप्त राशि का बिल पंचायत दर्पण में बिजली बिल लगाकर भुगतान के नाम पर शासकीय राशि में हेर फेर कर दिया।परंतु जिस विभाग के नाम का बिल लगाकर भुगतान करना दिखाया गया है असल में उस विभाग के खाते तक राशि पहुंची ही नहीं। बल्कि उक्त राशि सचिव सरपंच ने निजी स्वार्थ में अपने संपर्क के ही एक व्यक्ति के निजी खाते में अंतरित करा दी। जिसके बाद उस व्यक्ति से नगद रुपए प्राप्त कर राशि का आपस में बंदरबाट कर लिया गया। हैरानी की बात यह भी है कि इस मामले की शिकायत जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से भी की गई है परंतु अभी तक जांच व कार्यवाही नहीं की गई है। जिससे इस तरह शासकीय राशि में अनियमितता करने वालों के हौसले बुलंदी पर है।

पूरा मामला इस प्रकार है :

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत सारंगपुर में नलजल योजना के तहत घर घर पानी पहुंचाया जा रहा है पानी सप्लाई के लिए मोटर पंप का इस्तेमाल किया जाता है। जिसका बिजली बिल प्रत्येक महीने ग्राम पंचायत को को जारी किया जाता है और यह बिल समय सीमा में ग्राम पंचायत द्वारा विद्युत विभाग के खाते में जमा किया जाना होता है, जिससे कि ग्राम में पेयजल आपूर्ति बाधित न हो। इसी का फायदा उठाकर ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव ने सरकारी राशि हड़पने की एक तरकीब निकाली और बिजली बिल का फर्जी भुगतान दिखाकर पंचायत के खाते से एक लाख से ज्यादा की राशि आहरण कर अपनी जेब गर्म कर ली। जनवरी 2025 में विद्युत विभाग द्वारा ग्राम पंचायत सारंगपुर को वाटर सप्लाई का बिजली बिल एक लाख अठारह हजार दो सौ पंचांनवें रुपए का जारी किया गया। जिसे सरचार्ज सहित जमा करना था। दिनांक छः मई 2025 को सरपंच सचिव ने अपने हस्ताक्षर से पंचायत दर्पण पोर्टल में बिजली बिल का बिल लगाया और सरचार्ज सहित उस बिल की राशि एक लाख उन्नीस हजार सात सौ चोहत्तर रूपये संबंधित विभाग के खाते में डालने की बजाय गांव के ही एक व्यक्ति राजकुमार के खाते में अंतरित करा दिए। बाद में सचिव द्वारा उस व्यक्ति से नगद रुपए ले लिए गए, जिसकी पुष्टि स्वयं उस व्यक्ति द्वारा की गई है जिसके खाते में बिजली बिल की राशि डाली गई थी। ग्राम के ऑनलाइन सेंटर चलाने वाले राजकुमार यादव ने बताया कि 6 मई को मेरे खाते में ग्रामपंचायत द्वारा उक्त राशि का ट्रांजक्शन किया गया। जिसे मैने पंचायत सचिव को नगद एवं ऑन लाइन माध्यमों से दे दिया था। उक्त राशि मेरे खाते में क्यों डाली गई यह मुझे नहीं मालूम।

बिजली विभाग में नहीं जमा हुई राशि :

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत द्वारा जिस राशि से बिजली बिल भुगतान करना दिखाया गया है। असल में वह राशि आज तक बिजली विभाग के खाते में जमा नहीं हुई है। इस बात को स्वयं बिजली विभाग ने स्वीकार किया है विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि ग्राम पंचायत द्वारा बिजली बिल की उक्त राशि हमारे विभाग के खाते में जमा नहीं की गई है। बल्कि राशि जमा नहीं होने के कारण वाटर सप्लाई की राशि कॉरपोरेट एकाउंट से पिछले कई साल से जमा की जा रही है।

जिला पंचायत में की गई शिकायत

बीते दिनों दिनांक 2 सितंबर को इस मामले की शिकायत कुछ ग्रामीणों द्वारा जिला पंचायत सी ई ओ को भी दस्तावेजों सहित की गई थी परंतु दो सप्ताह से भी ज्यादा बीत गया। जिला पंचायत ने इस मामले में रुचि नहीं ली है और मामला ठंडे बस्ते में चला गया दिखाई दे रहा है।

इनका कहना है

“मेरे खाते में राशि डाली गई थी।जिसे बाद में सचिव द्वारा नगद ले ली गई है।”

राजकुमार यादव सारंगपुर

इस तरह खुलेआम पंचायत की राशि हड़पने के मामले की जांच और सचिव के विरुद्ध कार्यवाही नहीं किया जाना जिले में व्याप्त भ्रष्टाचार की मिसाल है। विद्युत विभाग के बिल पर किसी व्यक्ति के खाते में राशि अंतरित करना पूरे तरह के गलत है जिसके चलते सचिव के विरुद्ध गबन की कार्यवाही की जा सकती है किंतु जनपद और जिला पंचायत के अधिकारी किसी तरह की कार्यवाही नहीं कर रहे है, इसी तरह अधिकारी ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रहे है। मामला अधिकारियों के संज्ञान में होने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं होना इसका प्रमाण है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!