चंद्रागढ के बैगा छात्र खतरे के साए में भविष्य संवारने को मजबूर

बैगांचल एक्प्रेस, डिंडोरी,सी14 सितंबर 2025, शासन शिक्षा के लिए प्रतिबद्धता जताते हुए गुणवत्तायुक्त शिक्षा आदिवासी क्षेत्रों में देने का दावा तो करती हैं परंतु संबंधित विभाग की उदासीनता से जर्जर भवन में बैठकर बैगा आदिवासी छात्र अपना भविष्य संवारने की कोशिश कर रहे हैं, जिस पर किसी भी जिम्मेदार का ध्यान तक नहीं है, नहीं सुधार का कोई प्रयास किया जा रहा है। जनपद शिक्षा केंद्र अमरपुर क्षेत्रांतर्गत प्राथमिक शाला चंद्रागढ़ जो कि बैगा बाहुल्य गांव हैं, जहां पर एक उन्नत प्राथमिक शाला संचालित हैं जिसमें मात्र एक शिक्षिका एवं एक अतिथि शिक्षक पदस्थ हैं। बताया जाता है कि वास्तव में शाला अतिथि शिक्षक की भरोसे ही चल रही हैं। शिक्षिका अधिकांश समय बाहर ही रहती हैं।

इसके अलावा उक्त शाला को लेकर बड़ी समस्या यह है कि भवन पूरी तरह जर्जर हो रहा हैं। छत के ऊपर तिरपाल के टुकड़े और पन्नी लगाकर पानी को कक्ष के अंदर आने से रोकने की कोशिश की जाती है जिससे पूरी तरह से कक्ष में बरसात का पानी नहीं का पाता और किसी तरह बच्चों के बैठने की व्यवस्था की जाती है। छत की सीपेज के चलते अंदर छत का प्लास्टर भी कमजोर हो चुका है जिसके गिरने का खतरा हमेशा बना रहता हैं। भवन की छत का लेंटर जर्जर होने से कमजोर हो चुका हैं। जिसकी समय रहते विशेष मरम्मत की अत्यधिक जरूरत बनी हुई है पर इस ओर विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान तक नहीं है। वहीं दूसरी बड़ी समस्या शाला भुवन में पेयजल की हैं। दिखाने के लिए स्कूल में पानी की टंकी रखकर पाईप लाईन, टोंटी, सिंक बगैरह तो लगा दिए गए हैं। परंतु उसका उपयोग अभी तक नहीं हो पाया हैं क्योंकि टंकी भरने की व्यवस्था ही नहीं हैं पानी का कोई स्त्रोत उपलब्ध है न मोटर आदि की व्यवस्था है।

अतिथि शिक्षक के द्वारा बताया गया कि अभी बारिश में तो गांव के हैंडपंप का उपयोग होता हैं। इसके बाद फिर घाट के नीचे झिरिया के पानी का उपयोग किया जाता हैं। अकेले शिक्षक बरामदे में ही बैठकर छात्रों को पढ़ाते हैं।

इस गांव में वन विभाग के द्वारा आंगनबाड़ी भवन का निर्माण किया जा रहा था। परंतु दीवार खड़ी कर विगत 5 वर्षों से भवन अपूर्ण हैं। दूसरी आंगनबाड़ी भवन का निर्माण किया जा रहा हैं, जो कि पूर्णता की ओर हैं। परंतु उक्त भवन का काम भी वर्तमान समय में बंद हैं। चंद्रागढ़ जिला मुख्यालय का सबसे करीबी बैगा बाहुल्य ग्राम होने के बावजूद भी विकास से कोसों दूर हैं। इस गांव में प्राथमिक उत्तम शिक्षा की व्यवस्था भी अधिकारियों की उदासीनता से उपलब्ध नहीं हो पा रही है जबकि जिले में विशेष अनुसूचित जनजाति बैगाओ के उत्थान और संरक्षण के नाम पर करोड़ो रूपये की योजनाएं और प्रस्ताव तैयार किए जाते है पर इस जनजाति के बच्चों के स्कूल की एक अदद छत की सलामती के लिए भी शासन प्रशासन के पास राशि का अभाव है ग्रामीण वर्षों से इसकी मरम्मत का इंतजार कर रहे है ताकि उनके नौनिहालों के सिर से खतरा टल सके। बैगा जनजाति की विरासत के लिए देश दुनिया में जाने वाले जाने वाले समुदाय की यह उपेक्षा शासन प्रशासन की कथनी और करनी को उजागर करती है।

गांव में प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत आवास बन जाते हैं परंतु अन्य विकास के कार्य नहीं हो पा रहे हैं। जिस वजह से यहां के ग्रामीणों को पिछड़ापन का सामना कर रहा है। इस बैगा बाहुल्य गांव में आजादी के 75 साल बाद भी प्राथमिक शिक्षा और प्राथमिक स्वास्थ की पर्याप्त और उचित व्यवस्था नहीं है, जबकि इस गांव की जिला मुख्यालय दूरी का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि चंद्रगढ़ गांव में खड़े होकर आपको पूरा जिला मुख्यालय दिखाई देता है, रात में इस गांव से पूरे शहर की लाइट्स का नजारा लिया जा सकता है पर दुर्भाग्य है कि इस गांव तक विकास की पर्याप्त रोशनी अब तक नहीं पहुंच पाई है। स्कूल में पढ़ने वाले छोटे छोटे बच्चे भी जोखिम और अव्यवस्था का सामना करने को मजबूर है।

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