लापरवाह सचिव को किसका मिल रहा संरक्षण?
प्रशासनिक लापरवाही के चलते मजदूर कर रहे पलायन

बैगांचल एक्प्रेस, डिंडोरी, जिले के जनपद पंचायत बजाग अंतर्गत ग्राम पंचायत पडरिया डोंगरी में लगभग तीन महीने पहले निर्मित सड़क का मजदूरी भुगतान आज तक नहीं हो सका है। जानकारी के अनुसार करीब पांच लाख रुपये की लागत से सड़क निर्माण कार्य कराया गया था, जिसमें स्थानीय मजदूरों ने कार्य पूरा किया, लेकिन अब तक उन्हें उनकी मजदूरी नहीं मिल पाई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच और सचिव की लापरवाही के चलते मजदूरों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मजदूरों का कहना है कि कई बार पंचायत कार्यालय और जनपद पंचायत के चक्कर लगाने के बावजूद भुगतान नहीं हुआ। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि मजदूरी नहीं मिलने के कारण घर चलाना मुश्किल हो गया है। मजदूरों का कहना है कि उन्होंने पूरी मेहनत और ईमानदारी से सड़क निर्माण कार्य किया, लेकिन अब उन्हें अपने ही मेहनताना के लिए भटकना पड़ रहा है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर लापरवाह सचिव पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है? ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी के चलते सचिव को संरक्षण मिल रहा है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए और मजदूरों का लंबित भुगतान तत्काल कराया जाए।
मजदूरों को शासन, प्रशासन पर नहीं भरोसा, दूसरे प्रदेश में जाकर कर रहे मजदूरी
ग्राम पंचायत द्वारा निर्माण कार्य कराए जाने के बाद उपलब्ध राशि जिससे सबसे पहले गरीब मजदूरों का भुगतान समय पर किया जाना चाहिए उसकी उपेक्षा कर पहले सप्लायर्स और अन्य भुगतान किए जाते है। मजदूरों को महीनों परेशान किया जाता है जिससे स्थानीय लोग पंचायत के निर्माण कार्यों पर निर्भर न रहे। यही वजह है कि जिले के स्थानीय और मेहनतकश मजदूरों को शासन प्रशासन की योजनाओं पर से भरोसा उठ चुका है। समय पर मजदूरी नहीं मिलने और पंचायत की कमीशनखोरी से परेशान स्थानीय मजदूर दूसरे प्रदेशों में पलायन कर रहे है। शासन और प्रशासन के लिए यह शर्म की बात है कि पंचायतों के माध्यम से करोड़ो रुपए की राशि मजदूरों को कार्य उपलब्ध कराने और रोजगार उपलब्ध कराने हेतु दी जा रही है फिर भी शासकीय अमले की निष्क्रियता और भ्रष्टाचार के चलते स्थानीय मजदूरों को अपनी सरकार और प्रशासन की योजनाओं पर भरोसा नहीं है बल्कि वे हजारों किलोमीटर दूर अन्य प्रदेश के निजी कारोबारियों और किसानों पर भरोसा कर दूर प्रदेश में जाकर मजदूरी करने पर अधिक भरोसा करते है। जिले के मेहनतकश, युवा मजदूर तमाम परेशानियों के बाद भी पलायन को तैयार रहते है उन्हें प्रदेश की सरकार और जिले के प्रशासन से उम्मीद नहीं है कि उसके भरोसे उनके परिवार का उचित ढंग से पालन पोषण संभव है। कम मजदूरी भी जब समय पर नहीं मिले तो मजदूरों के लिए कितना बड़ा संकट है यह मोटे वेतन और कमीशनखोरी पर मजे करने वाले शायद नहीं समझ पाएंगे। पर उस शासन की व्यस्था पर सवाल जरूर खड़ा होता है जो गरीब मजदूरों की मजदूरी भी समय पर दे पाए।
