अपर नर्मदा परियोजना, राघवपुर और बसानिया, डूब प्रभावितों के मुआवजे की घोषणा

नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा भू-विस्थापितों के लिए ’विशेष पुनर्वास पैकेज’ की घोषणा

सांसद की अध्यक्षता में बैठक संपन्न

12.50 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर, न्यूनतम मुआवजा निर्धारित

बैगांचल एक्प्रेस, डिंडौरी, 30 जनवरी, 2026, सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में दिशा की बैठक में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण डिंडौरी के द्वारा अपर नर्मदा परियोजना, राघवपुर बहुउद्देशीय परियोजना और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजना से प्रभावित व्यक्तियों को मध्यप्रदेश शासन ने विशेष राहत पैकेज पर चर्चा एवं संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए।

विशेष राहत पैकेज की घोषणा

मध्य प्रदेश शासन के नर्मदा घाटी विकास विभाग ने अपर नर्मदा परियोजना, राघवपुर बहुउद्देशीय परियोजना और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजना के डूब क्षेत्र में आने वाले प्रभावित परिवारों के लिए एक बड़े विशेष राहत पैकेज की घोषणा की है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद द्वारा लिए गए निर्णय के क्रम में विभाग ने मुआवजे और पुनर्वास के लिए नए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

निजी भूमि के लिए आकर्षक मुआवजा विकल्प

जारी आदेश के अनुसार, डूब क्षेत्र की निजी भूमि के अर्जन के लिए किसानों को दो विकल्पों में से जिसकी भी राशि अधिक हो, वह राशि प्रदान की जाएगी। भू-अर्जन अधिनियम, 2013 के तहत निर्धारित मुआवजा, 12.50 लाख प्रति हेक्टेयर की दर से एकमुश्त राशि।

इसके अतिरिक्त, अर्जित भूमि पर स्थित कुओं के लिए 2 लाख और ट्यूबवेल के लिए 1 लाख का विशेष पैकेज या अधिनियम के तहत निर्धारित मुआवजा देय होगा। झोपड़ी, शेड और वृक्षों का मुआवजा भी नियमानुसार प्रदान किया जाएगा।

पुनर्वास एवं विस्थापन अनुदान की मुख्य बातें

विस्थापित परिवारों को सुगम पुनर्वास प्रदान करने के उद्देश्य से एकमुश्त अनुदान की व्यवस्था की गई है।

शहरी क्षेत्र : भूखंड मिलने की स्थिति में 6.50 लाख का एकमुश्त पुनर्वास अनुदान।

ग्रामीण क्षेत्र : भूखंड मिलने की स्थिति में 7.00 लाख का एकमुश्त अनुदान।

यदि पात्र परिवार भूखंड नहीं लेना चाहता, तो उसे 12.50 लाख का एकमुश्त पुनर्वास अनुदान दिया जाएगा।

SC, ST के लिए विशेष सहायता

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के परिवारों को अतिरिक्त 50,000 की एकमुश्त सहायता प्रदान की जाएगी।

पंजीकरण शुल्क से मिलेगी मुक्ति

शासन ने विस्थापितों को बड़ी राहत देते हुए घोषणा की है कि आपसी सहमति से होने वाले भूमि अर्जन के पंजीकरण (रजिस्ट्री) पर कोई स्टाम्प शुल्क या पंजीकरण शुल्क नहीं लगेगा। वेंडर सेवा शुल्क का भुगतान भी नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा स्वयं किया जाएगा।

पारदर्शिता और सहमति पर जोर

विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस विशेष पैकेज का लाभ किसानों और विस्थापित परिवारों की लिखित सहमति के आधार पर ही दिया जाएगा। जो परिवार इस विशेष पैकेज का चयन नहीं करना चाहते, उनके पास भू-अर्जन अधिनियम, 2013 के तहत अनिवार्य मुआवजा प्राप्त करने का विकल्प खुला रहेगा।

यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जिससे क्षेत्र के हजारों प्रभावित परिवारों को बेहतर आर्थिक सुरक्षा और पुनर्वास का लाभ मिल सकेगा।

बैठक में उपस्थित रहे जनप्रतिनिधि :

बैठक के दौरान डिंडौरी विधायक ओमकार सिंह मरकाम, जिला पंचायत अध्यक्ष रूद्रेश परस्ते, जिलाध्यक्ष भाजपा चमरू सिंह नेताम, नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती सुनीता सारस, जनपद अध्यक्ष डिंडौरी श्रीमती आशा सिंह, रामप्रसाद तेकाम, जनपद अध्यक्ष अमरपुर हन्नू सिंह पट्टा

उपस्थित रहे अधिकारी :

कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया, पुलिस अधीक्षक श्रीमती वाहनी सिंह, सीईओ जिला पंचायत दिव्यांशु चौधरी, अपर कलेक्टर जेपी यादव, डिप्टी कलेक्टर वैधनाथ वासनिक, डिप्टी कलेक्टर सुश्री प्रियांशी जैन, सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग राजेन्द्र कुमार जाटव, डीपीसी श्रीमती श्वेता अग्रवाल, कार्यपालन यंत्री पीएचई अफजल इमामउल्ला, पशुपालन एवं डेयरी विभाग एचपी शुक्ला।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!