RO वाटर प्लांट्स का औचक निरीक्षण राजपूत वाटर सप्लाई सील, नर्मदा सर्वजल और कोणार्क शुद्धजल में नहीं मिली कमियां

बैगांचल एक्प्रेस, डिंडौरी, जिला कलेक्टर के आदेशानुसार एवं अभिहित अधिकारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वस्थ्य अधिकारी के निर्देशन में गुरुवार, 22 जनवरी 2026 को खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा डिंडौरी नगर में संचालित शुद्ध पेयजल आपूर्ति इकाइयों का निरीक्षण किया गया।

नर्मदा सर्वजल में नहीं मिली कमियां

निरीक्षण के दौरान राम स्नेही धाम, वार्ड क्रमांक-6 में संचालित नर्मदा सर्वजल का अवलोकन किया गया, जहाँ आरओ मशीन द्वारा जल को फिल्टर कर लगभग 20 लीटर के केन में भरकर उपभोक्ताओं को सप्लाई किया जा रहा था। मौके पर पीएचई विभाग द्वारा जारी वॉटर टेस्टिंग रिपोर्ट, श्रम विभाग एवं उद्यमिता विभाग द्वारा जारी प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किए गए। निरीक्षण के दौरान परिसर की फर्श एवं दीवारें साफ-सुथरी एवं स्वच्छ पाई गईं। प्लांट और आपूर्ति व्यवस्था की बारीकी से जांच की गई किंतु किसी तरह की कोई भी कमी जांच टीम को नहीं मिली।

इसके पश्चात देवरा तिराहा, कोणार्क गार्डन के पास स्थित कोणार्क शुद्ध जल का निरीक्षण किया गया। आरओ मशीन से जल फिल्टर कर केन के माध्यम से उपभोक्ताओं को सप्लाई किया जा रहा था। मौके पर एक्सीलेंट लैब, जबलपुर द्वारा जारी वॉटर टेस्टिंग रिपोर्ट एवं श्रम विभाग द्वारा जारी प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किए गए। परिसर में स्वच्छता एवं साफ-सुथरे केन पाए गए।

राजपूत वाटर सप्लाई का प्लांट सील

औचक निरीक्षण में अमरपुर रोड, मंडला बस स्टैंड के पास स्थित राजपूत वाटर सप्लाई का निरीक्षण किया गया। जहाँ गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। पानी की टंकी की निचली सतह अस्वच्छ पाई गई तथा मौके पर कोई भी वॉटर टेस्टिंग रिपोर्ट अथवा अन्य वैधानिक प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं किए गए। परिसर के अंदर पानी का जमाव, गंदगी एवं कीट पाए गए। बिना जल परीक्षण रिपोर्ट के पेयजल सप्लाई करते हुए प्रतिष्ठान संचालित पाया गया।
खाद्य सुरक्षा एवं जनस्वास्थ्य को दृष्टिगत रखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 31 के अंतर्गत राजपूत वाटर सप्लाई को सील कर दिया गया है। साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि जब तक समस्त आवश्यक मानकों एवं प्रमाण-पत्रों की पूर्ति नहीं की जाती, तब तक जल आपूर्ति सेवाएं पुनः संचालित नहीं की जाएंगी।

उल्लेखनीय है कि विगत दिनों भी जल आपूर्ति करने वाले प्लांटों की जांच जिला कलेक्टर के निर्देश पर की गई थी। जिससे बचने के लिए “राजपूत वाटर सप्लाई” के संचालक प्लांट बंद करके भाग गए थे। प्लांट को बंद बताया गया था किंतु कार्यवाही के दूसरे दिन से ही नगर में पानी की आपूर्ति उक्त संस्था द्वारा शुरू कर दी गई थी। जांच टीम द्वारा नर्मदा सर्वजल और कोणार्क शुद्ध जल, आकाश वाटर प्लांट के पानी के सैंपल जांच हेतु भेजे गए थे जिनकी रिपोर्ट निर्धारित मापदंड के अनुरूप पाई गई थी। जबकि नगर के दो प्लांट जांच के दौरान बंद पाए गए थे। राजपूत वाटर प्लांट में पाई गई गड़बड़ियों के बाद प्रशासन ने प्लांट सील करने की कार्यवाही की है। इस तरह की कार्यवाही मानव स्वास्थ्य सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक है। दो दिन पूर्व ऐसी ही कार्यवाही जिला मुख्यालय के दो रेस्टोरेंट के विरुद्ध भी गई है।

मिष्ठान भंडार और चाय, नाश्ते की दुकानों की भी जांच की जाए

मानव स्वास्थ्य की दृष्टि से मिलावटी और घटिया खाद्य सामग्री की बिक्री पर रोक लगाने की जरूरत को देखते हुए जिला मुख्यालय के चाय, नाश्ते की दुकानों, फुटपाथ पर चाट पकौड़ी बेचने वालों और मिलावटी मिठाइयां बेचने वालो के प्रतिष्ठानों की सतत् जांच की जनपेक्षा है।

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