दलालों के भरोसे चल रही जिले में परिवहन विभाग की व्यवस्थाए

जिला परिवहन अधिकारी कार्यालय में नहीं होते उपलब्ध

RTO के हाल बेहाल दिखाई देते है सिर्फ दलाल

बैगांचल एक्प्रेस, डिंडोरी, जिले में परिवहन विभाग यानि RTO Office की व्यवस्थाएं सड़क से उतर चुकी है। आलीशान कार्यालय भवन की स्थिति लावारिश की तरह हो रही है। कार्यालय में कोई जवाबदार व्यक्ति का उपलब्ध नहीं होना और कथित दलाल की मनमर्जी से लोग परेशान है। सूत्र बताते है कि जिला परिवहन अधिकारी ने कार्यालय की सारी जवाबदारी एक निजी कंपनी के पूर्व कर्मचारी पंकज डहरिया को अनधिकृत तौर पर सौंप रखी है। इस अनधिकृत व्यक्ति के द्वारा ही परिवहन विभाग की सारी व्यवस्थाएं संचालित की जाती है। इस अनधिकृत दलाल के द्वारा कार्यालय के भीतर बैठकर दलाली करने के संबंध में पूछे जाने पर जिला परिवहन अधिकारी श्री सुरेंद्र गौतम का कहना है कि ऊपर स्तर से आउटसोर्स के द्वारा इनकी नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। जिम्मेदार अधिकारी का यह बयान काफी चौंकाने वाला है। विभाग में प्रदेश स्तर से आउटसोर्स एजेंसी के चयन की प्रक्रिया चल रही है इसके पहले ही परिवहन अधिकारी को पूरा भरोसा है कि जो भी आउटसोर्स कंपनी आयेगी वह डिंडोरी परिवहन कार्यालय में उक्त कथित दलाल पंकज डहरिया को ही नियुक्त करेगी। जब तक यह प्रक्रिया पूरी होगी तब तक वर्षों से जिला परिवहन कार्यालय में अनधिकृत दलालनुमा व्यक्ति जिला परिवहन अधिकारी के रहमो करम पर कार्यालय की व्यवस्था तो सम्हालता रहेगा। शासन के नियमों को धत्ता बताकर शासकीय कार्य एक अशासकीय व्यक्ति से कराया जाना आपत्तिजनक है।

जानकारी उपलब्ध नहीं करवा पा रहा विभाग

जिला परिवहन कार्यालय में परिवहन अधिकारी से लेकर चौकीदार तक कुल 2 से 3 कर्मचारियों की नियुक्ति बताई जाती है। उक्त संबंध में विभाग में नियुक्त अधिकारी कर्मचारियों, अस्थाई कर्मचारियों और कम्प्यूटर ऑपरेटरों की नियुक्ति की जानकारी मांगे जाने पर विभाग के अधिकारी लगभग एक माह बीतने के बाद भी जानकारी नहीं दे पा रहे है। बाबू का जवाब होता है साहब से बात कर ले। साहब कार्यालय में होते नहीं है फोन वो उठाते नहीं है। जिला परिवहन अधिकारी जिले में आते है तो बैठक या फिर जांच में होने की बात की जाती है। बाकी काम और अन्य दिनों में कार्यालय दलालों के हवाले रहता है। आमजन और वाहन मालिक परिवहन कार्यालय के चक्कर काटते रहते है कार्यालय के भीतर सक्रिय दलाल काम के नाम पर मनमानी वसूली कर रहा है। आम आदमी को साहब के कभी दर्शन ही नहीं होते। ऐसी स्थिति में जिले भर की परिवहन व्यवस्थाओं का संचालन कैसे हो रहा है समझा जा सकता है। विभाग एक छोटी सी जानकारी देने में महीनों लगा रहा है।

कंप्यूटर ऑपरेटरों की मनमानी भर्ती

विभाग द्वारा कार्यालय में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों की नियुक्ति के संबंध में जानकारी नहीं दे पा रहा है। सूत्रों की माने तो विभाग में अनधिकृत रूप से दो कंप्यूटर ऑपरेटर शासकीय कार्य कर रहे है। एक को जिला परिवहन अधिकारी ने निजी तौर पर रखा है दूसरे को कार्यालय के बाबू ने। जिन लोगों को विभागीय कार्य की जिम्मेदारी सरकार ने सौंपी है उनके द्वारा निजी तौर पर अमले की भर्ती करना न सिर्फ आपत्तिजनक है बल्कि जांच का विषय है। इन कथित कम्प्यूटर ऑपरेटरों में निजी तौर पर परिवहन अधिकारी द्वारा रखे गए ऑपरेटर की विभाग में तूती बोलती है। विभाग के चेकिंग अभियान से लेकर जिला स्तर की विभागीय बैठकों तक में शामिल होने वाले परिवहन विभाग के कंप्यूटर ऑपरेटर पर परिवहन अधिकारी की विशेष मेहरवानी की कोई तो खास वजह है जिसके चलते मीडिया में खबरें प्रकाशित होने के बाद भी कथित दलाल और अनधिकृत व्यक्ति को विभाग में संरक्षण दिया जा रहा है। जिले के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठकों में ऐसे दलालों की मौजूदगी, जिले की प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।जिन बैठकों में केवल विभागीय अधिकारियों की उपस्थिति होना चाहिए वहां किसी विभाग का प्रतिनिधित्व, अधिकारी द्वारा निजी तौर पर नियुक्त कंप्यूटर ऑपरेटर का किया जाना आपत्तिजनक है। ऐसे लोगों और इन्हें बैठकों में भेजने वाले अधिकारियों के विरुद्ध जिला प्रशासन द्वारा उचित कार्यवाही की जाना चाहिए।

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