धार्मिक नगरी में सरकार द्वारा शराब पर लगाए गए प्रतिबंध के बाद भी यदि लोग अवैध शराब बेच और खरीद पा रहे। बच्चे दिनदहाड़े नर्मदा तट पर बिना किसी डर व भय के खुलेआम बीयर का सेवन कर रहे है तो यह कहा जा सकता है कि प्रशासन की कार्यप्रणाली और सरकार की मंशा के बीच बहुत बड़ा अंतर है, प्रशासन, शासन की बातों को राजनीतिक जुमला मानता है।
बैगांचल एक्प्रेस, डिंडोरी, मंगलवार को दोपहर जिला मुख्यालय में श्रद्धालुओं, साधु संतों और सेवादारों की बड़ी संख्या में मौजूदगी वाले नर्मदा तट पर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया जो समाज और प्रशासन की घोर उदासीनता का प्रतीक कहा जा सकता है। मध्यप्रदेश सरकार ने नर्मदा तट पर शांति और धार्मिक माहौल को सुरक्षित रखने, श्रद्धालुओं, साधु संतों की धार्मिक भावनाओं को निश्चितता देने की जिस मंशा से नर्मदा तट के नगरों में शराब बंदी की घोषणा की गई है वह जिला मुख्यालय के नर्मदा तट पर तार तार होती दिखाई दी। सरकार की मंशा के विपरीत नर्मदा तट पर दो नाबालिक लड़कियां बीयर की बोतल सहित नशे का सेवन करते हुए बर्थ डे केक काटती कैमरे में कैद हुई। घटना की पुष्टि कई प्रत्यक्षदर्शियों सहित आबकारी विभाग के सब इंस्पेक्टर ने भी ऑन कैमरा की है। पूरा घटनाक्रम समाज और प्रशासन के लिए बेहद चिंतनीय यदि अपनी जवाबदेही को स्वीकारा जाए वरना……, बेशर्मी की न कोई सीमा होती है और न मियाद!

सवाल शहर के सामाजिक परिपेक्ष्य में भी शर्मनाक है जहां हर कोई मां नर्मदा के प्रति श्रद्धाभाव रखता है। सुबह शाम नगर के लोग श्रद्धाभाव से नर्मदा दर्शन और पूजन के लिए जाते है। वहां नाबालिक बच्चियां कैसे बीयर के साथ बर्थ डे पार्टी करने की सोच सकती है। नाबालिक बच्चियां कैसे शराब के अवैध अड्डों तक पहुंच बनाकर बियर हासिल कर लेती है। लापरवाह अभिभावकों की इन संतानों को सामाजिक मर्यादाओं की बिल्कुल भी परवाह कैसे नहीं रही ! इसके पीछे वजह अभिभावकों की बड़ी लापरवाही और अपनी संतानों को संस्कार देने हुई भारी चूक मानी जा सकती है। कुछ लोग कह सकते है किसी परिवार में शराब पीने पिलाने की छूट हो सकती है, तब भी सार्वजनिक स्थल पर, प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध शराब खरीदना अपराध है, इसका ज्ञान तो सभी दिया जाना चाहिए़। ऐसी घटना को बड़ी सामाजिक चूक कहा जाएगा। यदि इस तरह के अभिभावक ऐसे ही सोते रहे तो ये नाबालिक भविष्य में क्या क्या नहीं करेंगे !
इसके बाद जिम्मेदारी जिले के पुलिस प्रशासन की है जिसकी नाक के नीचे अवैध शराब इतनी सहजता से उपलब्ध है कि नाबालिक लड़कियां भी आसानी से इन अड्डों तक पहुंच पा रही है पर जिला मुख्यालय की निष्क्रिय पुलिस को इनकी बू नहीं आती ! कुछ दिनों पहले बैगांचल एक्प्रेस ने मुक्तिधाम में सैकड़ों लोगों की उपस्थिति के बीच युवकों की शराबखोरी का वीडियो खबर के माध्यम से वायरल किया था उसके बाद भी नर्मदा घाट पर ऐसी घटना का होना कोतवाली पुलिस के अस्तित्व पर सवाल खड़ा करती है सुरक्षा तो बाद की बात है। प्रशासन सरकार की मंशा को लेकर कितना संजीदा है यह जिला मुख्यालय स्थिति बता रही है जहां बड़ी संख्या में अवैध शराब के अड्डों से भारी मात्रा में शराब की आपूर्ति की जा रही है पुलिस और आबकारी विभाग सप्ताह में 4, 6, 10 पाव शराब पकड़कर अपनी पीठ थपथपाते हुए खबरें प्रेषित करते दिखते है। जिला मुख्यालय में बड़ी मात्रा में शराब कहा से, कैसे और क्यों आ रही है और पुलिस इस अवैध कारोबार को रोक क्यों नहीं पा रही है? इस पूरे कारोबार में शामिल बड़े माफिया और उन शराब ठेकेदारों तक पुलिस के हाथ क्यों नहीं पहुंच पा रहे जिनकी दुकानों से शराब शहर में आ रही? यह सवाल हर आम आदमी के जहन में उठता है पर व्यवस्था की बेशर्मी जवाब देने के काबिल रही नहीं।
प्रशासन को नशे की ओर जा रहे नौनिहालों के भविष्य पर गंभीरता से विचार करते हुए, सरकार की मंशा धार्मिक तट, साधु संत और श्रद्धालुओं की भावनाओं पर होते कुठाराघात पर मनन करते हुए बड़े शराब माफियाओं पर नकेल कसने का संकल्प लिया जाना जरूरी है। इमलीकुटी से डैम घाट तक सुरक्षा व्यवस्था की शून्यता के चलते लवर प्वाइंट बनते जा रहे है। स्कूल कॉलेज से गायब होकर युवक युवतियां बेरोकटोक निश्चितता से यहां मनमानी करते देखे जाते है। नर्मदा घाटों पर पुलिस की सतर्कता, गश्त से स्थिति सुधर सकती है। पुलिस बल की मौजूदगी में नर्मदा तट कम से कम बीयर पार्टी जैसे मंसूबों से तो मुक्त किए जा सकते है। इस तरह की शर्मनाक घटनाओं को रोकने में प्रशासन अहम भूमिका निभा सकता है।
यदि आस्था का केंद्र मां नर्मदा के तट पर खुलेआम लोग शराब की महफिल सजाने लगे तो सबको मिलकर इस गंदी मानसिकता को रोकने पर विचार जरूर करना चाहिए।

