“एक बगिया मां के नाम” योजना पर भ्रष्टाचार का ग्रहण और माफियाओं की नजर

योजना की शुरुआत तय कर रही अंजाम

बैगांचल एक्प्रेस, डिंडोरी, जिले में शासन की योजनाओं को कागजी जामा पहनाने में माहिर सरकारी अफसरों की मनमानी देखी जा रही है। जिस तरह से जिले में “एक बगिया मां के नाम” योजना के नाम पर शासकीय राशि को ठिकाने लगाने का प्रयास किया जा रहा है उस पर अभी से सवाल उठने लगे है, इस योजना का अंजाम क्या होगा इसका अनुमान योजना की शुरुआत से ही लगने लगे है। योजनांतर्गत चल रही गतिविधियों को लेकर जहां संबंधित समूहों की महिला सदस्यों ने जनसुनवाई में अनुपयुक्त पौधों की आपूर्ति करवाए जाने के आरोप लगाए है वही जिला पंचायत अध्यक्ष ने भी योजना को लेकर मनमानी और शासकीय धन के दुरुपयोग पर सवाल उठाए है, दूसरी तरफ अधिकारियों के गठजोड़ से मटेरियल आपूर्ति करने वाले माफिया सक्रिय है और बेपरवाह है। इनके पीछे प्रशासनिक और राजनैतिक संरक्षण की बाते सामने आ रही है जिसके चलते इनके द्वारा बेफिक्री से गुणवत्ताहीन सामग्री की आपूर्ति अधिकारियों के दबाव में जबरन समूहों को की जा रही है।

समूह की महिलाओं ने जनसुनाई में दर्ज कराई शिकायत

एक बगिया मां के नाम योजना में बरती जा रही अनियमितताओं की शिकायत जनसुनवाई में विकासखंडों, ग्राम संगठन एवं संकुल स्तरीय महिला आजीविका संघ द्वारा भी की गई है। हितग्राहियों ने शिकायत में बताया कि जिले में लगभग 725 बगिया के लिए पौधों एवं संबंधित सामग्री की आपूर्ति लगभग एक ही निजी आपूर्तिकर्ता से कराई जा रही है। जबकि योजना के नियमानुसार हितग्राही गुणवत्तायुक्त सामग्री उचित दर पर खरीदने हेतु स्वतंत्र है। हितग्राही समूह ने सामग्री सप्लाई में निविदा और दर आमंत्रण प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने के आरोप लगाए है।

जिला पंचायत अध्यक्ष की नाराजगी

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की मंशा के तहत शासन द्वारा चलाई जा रही एक बगिया मां के नाम योजना में बरती जा रही अनिमितताओ को लेकर डिंडोरी जिला पंचायत अध्यक्ष रूदेश परस्ते ने नाराजगी जताई और कलेक्टर को लिखित शिकायत करके संबंधितो पर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत पत्र में बताया गया है कि योजना के तहत हितग्राहियों और भूमि अनुरूप पौधों का चयन 25 जुलाई तक करके तकनीकी एवं प्रशासकीय स्वीकृति जारी करके 14 अगस्त तक पौधारोपण हेतु गड्ढे और फेसिंग का कार्य पूर्ण करना था। शिकायत है कि बारिश का सीजन बीत जाने के बाद नवम्बर और दिसम्बर माह में पौधारोपण कराया गया है, जो उचित नहीं है। जिला पंचायत अध्यक्ष रुदेश परस्ते ने सामग्री खरीदी में भी अनिमितताओं का लेख करके बतलाया है कि योजना के नियमों के तहत पौधा, खाद, कीटनाशक, फेसिंग पोल और तार सहित अन्य सामग्री खरीदी हेतु हितग्राही स्वतंत्र है। लेकिन जिले में पात्र हितग्राहियों को जबरन अमानक पौधे प्रदाय किये जा रहे हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष ने आरोप लगाये हैं कि हितग्राहियों को खराब, सूखे और अधूरी जड़ वाले पौधे सप्लाई किये जा रहे हैं, ऐसे कुछ पौधे उन्होंने कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत भी किए।

योजना से संबंधित समूह की महिलाएं योजना के संचालन में की जा रही मनमानी और दबाव की शिकायत कर रही है तो वहीं जिला पंचायत अध्यक्ष योजना को लेकर सवाल उठा रहे है ऐसे में योजना के सफल होने पर सवाल खड़ा होता है। किंतु अधिकारियों और सामग्री सप्लायर्स का गठजोड़ योजना के नाम पर करोड़ो रूपयों की होली खेलकर योजना को कागजी जामा पहनाने को आतुर है। जिला प्रशासन को योजना की समयसीमा, उपयोगिता और समूहों के गतिविधियों की समीक्षा कर कार्यवाही किए जाने की आवश्यकता है ताकि शासन की राशि के दुरुपयोग पर नियंत्रण लगाया जा सके।

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