जिले के जंगल में बाघ का मूवमेंट, निगरानी में जुटा वन अमला

50 किमी के दायरे में टाइगर की चहलकदमी

अब तक एक दर्जन मवेशियों को बनाया शिकार

बैगांचल एक्प्रेस, डिंडोरी, एक माह से डिंडोरी और शाहपुर वन परिक्षेत्र के जंगलों में वयस्क बाघ का मूवमेंट दर्ज किया जा रहा है। दोनो रेंज के 50 किलोमीटर के दायरे में चहल कदमी करने वाले इस बाघ ने महीने भर में लगभग दर्जन भर मवेशियों को शिकार बनाया है। सबसे बड़े मांसाहारी जीव की मौजूदगी के चलते वन विभाग ने 6 निगरानी दलों का गठन किया है। जो बाघ की प्रत्येक गतिविधियों पर नजर जमाये हुये है, इस दौरान बाघ और जनता के बीच सुरक्षा के लिहाज से सभी प्रोटोकॉल का पालन वन अमला कर रहा है। जानकारी के मुताबिक बाघ गोपालपुर, गोरखपुर, राम्हेपुर, रानीबुढार, नेवसा, बिजौरा, भरवई, देवकरा सहित अन्य गांवों के आसपास के जंगलों में डेरा जमाए हुये है। शनिवार को बाघ की मौजूदगी रानीबुढार के जंगल मे दर्ज की गई है। बस्ती के आस-पास लगातार टाइगर के मूवमेंट को देखते हुए वन विभाग एलर्ट मोड पर है। वन अमला जंगलों के आस पास भी बस्तियों में मुनादी करा के बच्चों और बुजुर्गों को अकेले खुले क्षेत्र में नहीं जाने की सलाह देने के साथ पालतू जानवरों को जंगल में नहीं जाने की चेतावनी जारी कर रहा है।

50 किलोमीटर के दायरे में मूवमेंट

बतलाया गया है कि महीने भर पहले बाघ ने गोरखपुर के जंगल मे एक मवेशी को शिकार बनाया था। जिसके बाद वन विभाग हरकत में आया और बाघ की खोज खबर शुरू की गई। महीने भर में बाघ ने शाहपुर और डिंडोरी वन परिक्षेत्र के बीच 50 किलोमीटर की टेरिटरी बना ली है। जहां घूमघूम कर बाघ शिकार कर रहा है। जिनमे शाहपुर, मुड़की और हिनौता के आसपास का क्षेत्र भी शामिल है। जहां इंसानी बसाहट नजदीक ही हैं। ऐसी स्थिति में बाघ की सुरक्षा और जान माल की रक्षा वन विभाग के लिए चुनौती बन गया है। जिसके मद्देनजर वन अमला संजीदगी बरतते हुए ग्रामीणों को सतर्कता बरतने और जंगल की तरफ मवेशियों और इंसानों को जाने से रोकने में लगा हुआ है।

बांधवगढ़ का बाघ

जानकारी के मुताबिक बाघ का पलायन बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व, (बीटीआर) से डिंडोरी की तरफ हुआ है। इसके पूर्व भी बांधवगढ़ के बाघों ने शाहपुर और डिंडोरी के जंगल मे आमद दर्ज करवाई है। हालांकि कुछ दिनों की चहलकदमी के बाद यह बाघ वापिस बांधवगढ़ का रुख कर लेते हैं। लेकिन इस बार एक माह से बाघ का जिले के जंगल मे ठहरना अचरज का विषय बन गया है। पर्यावरण जानकर इसे वन्य जीवन के लिये अच्छा संकेत करार दे रहे हैं।

करंजिया में भी है टाइगर मूवमेंट

जिला मुख्यालय के नजदीकी जंगल में टाइगर मूवमेंट के साथ ही करंजिया के जंगल मे भी बाघ का मूमेंट होने की जानकारी मिल रही है। यहां अमरकंटक,कबीर चबूतरा और जगतपुर के जंगलों में अचानकमार टाइगर रिजर्व से टाइगर पहुंचते रहते हैं। विदित होवे की बजाग और दक्षिण समनापुर वन रेंज में भी टाईगर का आना जाना लगा रहता है।

2021 में टिकरी पिपरी में मिली थी मृत बाघिन

गौरतलब है कि डिंडोरी वन परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक 200 में टिकरी पिपरी से सारसताल मार्ग के किनारे दिसम्बर 2021 में एक वयस्क बाघिन का शव बरामद किया गया था। पीएम में बाघिन की मौत जहरखुरानी से होने की पुष्टि भी हुई थी। शिकार के आरोप में कुछ ग्रामीणों के विरुद्ध मामला भी दर्ज किया गया था। जिसके चलते वन अमला इस बार बहुत ही एहतियात बरत रहा है और बाघ की निगरानी में दिन रात एक कर रहा है।

तेंदुआ भी मौजूद

महीने भर से वन परिक्षेत्र के जंगल मे बाघ के साथ तेंदुआ भी डेरा डाले हुए है। जानकारी के मुताबिक तेंदुआ ने भी अभी तक 8 से अधिक पालतू जानवरों को निशाना बनाया है।

इनका कहना है

बाघ और तेंदुआ की मौजूदगी महीने भर से दर्ज की जा रही है।इनकी सुरक्षा हेतु वन अमला तैनात किया गया है। ग्रामीणों को मुनादी के माध्यम से जंगल से दूरी बनाने की नसीहत दी जा रही है। मुआवजा प्रकरण जल्दी से जल्दी स्वीकृत हो रहे हैं।

एस के जाटव, उप वन मंडल अधिकारी डिंडोरी

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