जनजाति सुरक्षा मंच ने धर्मांतरण के खिलाफ आजीवन कारावास और 50 लाख के जुर्माने की मांग की

जनजाति सुरक्षा मंच का जेहादी और क्रिश्चियन मिशनरियों के खिलाफ धरना प्रदर्शन

बैगांचल एक्प्रेस, डिंडोरी, रविवार को जनजाति सुरक्षा मंच ने धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून बनाने की मांग को लेकर जिला कलेक्ट्रेट के सामने स्थित वीरांगना रानी दुर्गावती प्रतिमा स्थल पर धरना देकर प्रदर्शन किया गया। मंच ने केंद्र सरकार से जनजातियों के धर्मांतरण पर प्रतिबंध लगाने के लिए कड़े नियम बनाने की अपील की है।

कार्यक्रम के संयोजक चेतन चौहान ने बताया कि देश में मूल समाज का अस्तित्व खतरे में है। उन्होंने पूर्व रिटायर्ड जज नरीमन का हवाला दिया, जिन्होंने ईसाई संगठनों के साथ मिलकर सितंबर में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी। इस याचिका में राज्यों में धर्मांतरण रोकने के लिए बनाए गए स्वतंत्र अधिनियम कानूनों को रद्द करने की मांग की गई है। चौहान ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राष्ट्रीय मानव आयोग, महिला आयोग और राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग को नोटिस जारी किया गया परन्तु अनुसूचित जनजाति आयोग को नोटिस जारी नहीं किया गया। जबकि कथित तौर से धर्मांतरण के चलते सबसे ज्यादा यही वर्ग प्रभावित हुआ है।

मंच के अनुसार, धर्मांतरण के कारण देश में नागा और बोडो जैसी जनजातियाँ विलुप्त होने की कगार पर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 1500 वर्षों में भारत का 25 टुकड़ों में विभाजन इसी का परिणाम है। वर्तमान में, देश के 9 राज्यों के 200 जिलों में धर्मांतरण के कारण हिंदू समाज अल्पसंख्यक होने की स्थिति में है और मूल निवासियों का अस्तित्व खतरे में है। इसलिए, जनजाति सुरक्षा मंच ने मांग की है कि देश में धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून बनाया जाए, जिसमें आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान हो। इसके अतिरिक्त, शिक्षण संस्थाओं और स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर धर्मांतरण करने वालों पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाए और विदेशी संस्थाओं तथा गैर-सरकारी संगठनों (NGO) को मिलने वाले फंड को रोका जाए।

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