निर्माण स्थल पर हादसे में घायल मजदूर की जबलपुर में मौत
सरकारी अस्पताल से बिना पुलिस को जानकारी दिए घायल को किया रेफर ??

बैगांचल एक्प्रेस, डिंडौरी जिले के विकासखंड मुख्यालय मेहंदवानी में निर्माणाधीन आईटीआई भवन में हुए हादसे ने अब एक मजदूर की जान ले ली है। जानकारी के अनुसार सोमवार को निर्माणाधीन भवन की तीसरी मंजिल से गिरकर गंभीर रूप से घायल हुआ 35 वर्षीय रामफल आखिरकार जिंदगी की जंग हार गया। मेंहदवानी अस्पताल से डॉक्टरों ने उसे जल्दबाजी में गंभीर स्थिति में जबलपुर रेफर कर दिया था। दुर्घटना में घायल मजदूर का प्राथमिक उपचार सरकारी अस्पताल में किया गया और मामले की जानकारी स्थानीय पुलिस को नहीं दी गई। जिसके कारण मेहंदवानी पुलिस थाने में मजदूर की जबलपुर में मौत के बाद अब भी मर्ग की कायमी नहीं हुई है। मेहंदवानी थाना प्रभारी श्याम सुंदर उसराठें ने उक्त घटना की जानकारी होने से इनकार तो नहीं किया, किंतु घटना को लेकर मर्ग की कायमी स्थानीय थाने में नहीं होने की बात कही है। उन्हें प्राप्त अनुसार के जबलपुर के लार्डगंज थाने में मामला दर्ज किया गया है उसकी जानकारी आने पर मर्ग कायम कर आरोपियों के विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह हादसा उस समय हुआ जब ITI भवन में निर्माण कार्य चल रहा था। मौके पर मजदूरों के पास कोई सेफ्टी किट या सुरक्षा उपकरण नहीं थे। बताया जा रहा है कि मजदूरों से लगातार बिना सुरक्षा साधनों के काम कराया जा रहा है। घटना से दुखी ग्रामीणों और परिजनों ने इस पूरे मामले में प्रशासन और ठेकेदार पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि अगर मजदूरों को सेफ्टी बेल्ट, हेलमेट या अन्य सुरक्षा उपकरण मुहैया कराए गए होते, तो यह हादसा नहीं होता।

घटना को लेकर निर्माणाधीन भवन के ठेकेदार हरगोविंद गुप्ता घटना की जानकारी साइट सुपरवाइजर को होने की बात कह रहे है। उनका मानना है उक्त मृत व्यक्ति हमारे यहां काम ही नहीं करता था उसे सीढी से उतरते समय चक्कर आने से वह गिर गया जिससे उसकी मृत्यु हो गई। मृतक के परिजन उनकी साइट पर मजदूरी करते है और वे उक्त व्यक्ति की आर्थिक रूप से सहायता करेंगे। मजदूरों का सामूहिक बीमा होने की जानकारी देते हुए उन्होंने बीमा का लाभ मजदूर को दिलवाए जाने का प्रयास करने की बात भी कही है। एक तरफ वे उसे अपने कार्यस्थल का कामगार नहीं माना जा रहा है दूसरी ओर उसे बीमा राशि दिलाने की बात कही जा रही है। घटना स्थल पर घटना दिनांक को मर्ग का कायम नहीं होने पर उसे ठेकेदार कैसे बीमा का लाभ दिला पाएंगे? इसका जवाब तो ठेकेदार ही दे पाएंगे।
उक्त मामले में न तो ठेकेदार की ओर से साइट सुपरवाइजर द्वारा पुलिस को हादसे की जानकारी दी है और न ही सरकारी अस्पताल में प्राथमिक उपचार और घायल को रेफर किए जाने के बाद भी स्थानीय पुलिस को जानकारी दी। जबकि दुर्घटना के मामले में उपचार प्रारंभ करने के साथ साथ पुलिस को मामले की जानकारी दी जाना आवश्यक है।
PIU के अधिकारियों को मामले से कोई लेना देना नहीं : खुली लापरवाही
घटना से संबंधित निर्माण स्थल पर 1430.31 लाख रुपए की लागत से आई टी आई भवन और 60 – 60 सीटर बालिका और बालक छात्रावास भवन का निर्माण कार्य चल रहा है। जिसकी क्रियान्वयन एजेंसी पी आई यू, डिंडोरी है। विभाग के अधिकारियों ने अब तक घटना को संज्ञान में लेकर कोई कार्यवाही मजदूर के हित में नहीं की है। जो विभाग के अधिकारियों की लापरवाही का उदाहरण है। प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त विभाग के एक भवन निर्माण स्थल में पूर्व में भी ठेकेदार की लापरवाही से इसी तरह मजदूर की मौत करंजिया विकास खंड में विगत वर्षों में हुई थी जिसमें पीड़ित परिवार को सहायता राशि या बीमा राशि नहीं मिल पाई इसके लिए विभाग ने कोई कार्यवाही नहीं की थी। विभाग का अमला नियमित निर्माण कार्यों की निगरानी करता है किंतु विभाग की देखरेख में चल रहे किसी भी निर्माण स्थल पर मजदूरों की सुरक्षा के प्रावधानों को ठेकेदारों द्वारा नहीं अपनाया जा रहा है। मजदूरों को सुरक्षा किट जैसी कोई भी चीज उपलब्ध नहीं करवाई जाती है तब भी विभाग के अधिकारियों द्वारा मानव जीवन की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर कोई कार्यवाही ठेकेदारों के विरुद्ध कभी की गई है। मजदूरों की मौत के मामले में भी विभाग के अधिकारी उन्हें बीमा राशि दिलाए जाने में कोई रुचि दिखाते है जो विभाग की घोर लापरवाही है जिला प्रशासन द्वारा ऐसे गैरजिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोरतम कार्यवाही की अपेक्षा है। इस दुखद घटना पर विभाग द्वारा उठाए जा रहे कदम की जानकारी हेतु हमारे प्रतिनिधि PIU के संभागीय कार्यालय में विभाग प्रमुख का इंतजार करते रहे किंतु वे कार्यालय में देर शाम तक उपलब्ध नहीं हो सके। बताया जाता है कि विभाग प्रमुख डिंडोरी जिले के प्रभार में वे जिले में कम उपलब्ध रहते है SDO की जिम्मे पूरे जिले में कई सैकड़ों करोड़ रुपए की लागत के भवन निर्माण चल रहा है, जिन पर किसी भी तरह की देखरेख और उचित निगरानी नहीं होने से कहा निर्माण कार्यों में गड़बड़ियां सामने आ रही है वही ऐसी जानलेवा घटनाएं भी हो रही है। जिन्हें रोकने के लिए जिला प्रशासन को दखल देना होगा।
दुर्घटना पर भी बरती जा रही लापरवाही
घटना के बाद सवाल उठ रहे है कि आखिर विभाग के अधिकारी यह क्यों नहीं देख पा रहे कि मजदूर बिना सुरक्षा के ऊँचाई पर काम कर रहे हैं? ठेकेदार द्वारा सुरक्षा संबंधी प्रावधानों का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है। स्थानीय पुलिस मुख्यालय में हुई घटना की जानकारी से कैसे अंजान रही। ठेकेदार द्वारा स्थानीय पुलिस को घटना की अब तक जानकारी क्यों नहीं दी गई है। जबकि मजदूर की मौत होने की सूचना मिल रही है। शासकीय अस्पताल द्वारा दुर्घटना की जानकारी दिए बिना घायल को रेफर कैसे कर दिया गया? संबंधित विभाग द्वारा मृतक के हित में क्या कार्यवाही की गई है? अचरज की बात है कि एक निर्दोष मजदूर की मौत के बाद भी न विभाग चेता है न ठेकेदार? घटना के बाद भी मजदूर बिना सुरक्षा किट के खतरनाक स्थिति पर कार्य कर रहे है।

गरीब वर्ग के मजदूर रसूखदार ठेकेदार और विभाग आला अधिकारियों के सामने अपने हक की आवाज भले न उठा पाए पर उनकी प्रशासन से मांग है कि संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। ताकि भविष्य में किसी और परिवार को अपने सदस्य को इस तरह खोना न पड़े। मेंहदवानी क्षेत्र में इस घटना के बाद शोक और आक्रोश का माहौल है मृतक के परिजन सदमे में हैं। पीड़ित के परिवार का भविष्य अंधकारमय है। उक्त घटना पर जिला प्रशासन कोई कार्यवाही करता है तभी गरीब मजदूर के परिवार को सहायता मिलने की उम्मीद है।


