प्रशासन मेडिकल स्टोर्स की बारीकी से करे पड़ताल
बैगांचल एक्प्रेस, डिण्डोरी, 7 अक्टूबर 2025, जिलें में दवा दुकानों पर नियमों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। कई मेडिकल स्टोर्स में अप्रशिक्षित और कम पढ़े लिखे कर्मचारियों द्वारा बिना फार्मासिस्ट के दवाइयों का विक्रय किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि कुछ दुकानों में अंगूठा छाप व्यक्ति ग्राहकों को दवाइयाँ देते देखे जा रहे हैं। यह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि आमजन के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ भी है। जिस पर प्रशासन को गंभीरता से जांच करवाकर संबंधित दुकानों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही करनी चाहिए।
जानकारी के अनुसार, दवा एवं प्रसाधन अधिनियम 1940 के तहत किसी भी मेडिकल स्टोर में केवल पंजीकृत फार्मासिस्ट को ही दवाइयाँ वितरित करने का अधिकार है। बिना पंजीकरण या डॉक्टर की पर्ची के दवा बेचना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। बावजूद इसके डिण्डोरी सहित आसपास के सभी ब्लाकों में मेडिकल स्टोर्स पर इस तरह की गतिविधियां खुलेआम देखने को मिल रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन और औषधि नियंत्रण विभाग की अनदेखी के कारण ये दुकानें बिना जांच के संचालित हो रही हैं और नियमानुसार संचालन नहीं किए जाने से आमलोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। कई दुकानों बिना किसी पर्याप्त दस्तावेजों और प्रमाणपत्र के वर्षों से दवा का कारोबार चल रहा हैं। जिससे गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
ग्रामीण और अशिक्षित लोगों के लिए बड़ा खतरा
बताया जाता है कि जिले की अधिकांश दुकानों पर दवाएं देने वाले लड़के कम शिक्षित है, जो कम वेतन पर काम करने की वजह से दुकानदारों द्वारा नियुक्त किए जाते है। वही प्रायः फार्मासिस्ट अधिकतर दुकानों पर उपस्थित नहीं है सिर्फ उनके कागजी प्रमाणपत्र के आधार पर लाइसेंस प्राप्त कर दवा दुकानों का संचालन किया जाता है। दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्र के कम शिक्षित और अनपढ़ आमलोग न डाक्टर का पर्चा पढ़ सकते है और न दवा पर अंकित नाम ऐसे में दवा दुकानों पर दवा देने वाले कम शिक्षित, अप्रशिक्षित, अग्रेंजी का कम ज्ञान रखने वाले कर्मचारियों द्वारा गलत दवा दिए जाने पर मरीज के जीवन के लिए बड़ा खतरा हो सकता है। स्थिति पर प्रशासन को विशेष रूप से ध्यान देते हुए जिले की सभी दवा दुकानों पर फार्मासिस्ट की उपलब्धता और काम करने वाले कर्मचारियों की शैक्षणिक योग्यता की पड़ताल करते हुए जनहित में स्वास्थ्य संबंधी गंभीरता को समझते हुए जरूरी कार्यवाही की जानी चाहिए़। नवागत जिला कलेक्टर के निर्देश पर दवा दुकानों पर प्रतिबंधित दवाओं की जांच चल रही है, जनापेक्षा है कि इसके साथ ही जिले की दवा दुकानों की अन्य सभी जांच करवाकर नियम विरुद्ध और लापरवाही करने वाले दुकानदारों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जावे। जिले के अधिकांश मेडिकल स्टोर्स पर इन तरह की लापरवाहियों देखी जा सकती है जिसकी वजह है स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही, विभाग के अधिकारियों द्वारा अब तक कोई ऐसा जांच अभियान या कार्यवाही नहीं की जिसका असर दवा विक्रेताओं पर हो।


