अजगर पंचायत में सरपंच-सचिव की मनमानी और भ्रष्टाचार

सड़क निर्माण बिना मजदूरी भुगतान के कराया जाना कमीशनखोरी का संकेत

अंत्येष्टि सहायता राशि से निकाले 95 हजार गड़बड़ी का संदेह

बैगांचल एक्सप्रेस, डिंडोरी, 25 सितंबर 2025, जनपद पंचायत समनापुर की ग्राम पंचायत अजगर में विकास निधि का दुरुपयोग किए जाने के आरोप लग रहे है। वन बाहुल्य ग्राम और दूरस्थ स्थित इस पंचायत तक पहुंचना अधिकारियों के लिए कठिन है इसका फायदा उठाकर माफिया सरपंच और सचिव से मिलकर खुलेआम भ्रष्टाचार कर रहे है, जिसपर किसी की नजर नहीं है। पिछड़े क्षेत्र में स्थित ग्राम पंचायत के ग्रामों में निर्माण और विकास कार्य का दिखावा करके सरकारी राशि हड़पे जाने का क्रम लगातार जारी है। उक्त पंचायत के निर्माण कार्य और लेखा जोखा जांच के दायरे में है। निष्पक्ष जांच से घोटाले में शामिल कई चेहरे उजागर हो सकते है। यहां सरपंच और सचिव कारनामों के आगे प्रदेश सरकार के मापदंड और नियम निर्देश मजाक बन गए है।

गौरतलब यह है कि ग्राम पंचायत अजगर में 5वें और 15वें वित्त से स्वीकृत लाखों रुपये सड़क निर्माण और विकास कार्यों में खर्च होने के बजाय निजी लाभ के लिए खर्च किए जा रहे हैं। भुगतान सामग्री खरीदी के नाम पर अपने पसंदीदा सप्लायर को कर दिए गए। मजदूरों के भुगतान की कोई जानकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है। कागजों में निर्माण कर विकास निधि का बंदरवाट किया जा रहा है।

क्या है मामला

ग्राम छपरा सीसी सड़क निर्माण: वर्ष 2024-25 में धोबि नाला से पंचायत भवन तक तीन सीसी सड़कें स्वीकृत हुईं। जिसकी कुल लागत 5 लाख रुपये थी। जिसमें मटेरियल खरीदने के नाम पर 1,92,000, 84,000, 54,000 और 17,000 रुपये सप्लायर को भुगतान कर दिया गया है। बताया जाता है कि सड़क निर्माण के बिना ही राशि आहरण कर ली गई। जबकि स्थल पर सड़क नजर नहीं आ रही है। वहीं सड़क की राशि का भुगतान सामग्री खरीदी में हो गया जाहिर है कि सड़क बनाई ही नहीं है तो मजदूरी भुगतान क्यों किया जाएगा। किंतु माफियाओं के नाम सामग्री का फर्जी भुगतान हो गया।

ग्राम छपरा दूसरी सीसी सड़क: 7 जून 2024 को 4 लाख रुपये स्वीकृत हुए। भुगतान मटेरियल खरीदने के नाम पर 90,000, 1,10,000 और 2,00,000 रुपये सप्लायर को वितरित किए गए। मजदूरों का कोई भुगतान यहां भी नहीं हुआ।

ग्राम मुकदम टोला अजगर 15 अगस्त 2025 को 40,000 रुपये स्वीकृत हुए, लेकिन मटेरियल के नाम पर 1,50,000 रुपये का भुगतान किया गया।

15वें वित्त से सीसी सड़क निर्माण: कुल 4 लाख रुपये में से 2,40,000 रुपये मटेरियल के नाम पर बिना निर्माण हड़प लिए गए।

ग्राम पंचायत उपसरपंच का कहना है कि मेन रोड से कोटवार मोहल्ला तक केवल एक सड़क का निर्माण हुआ, जबकि बाकी सभी स्वीकृत राशि सरपंच और सचिव ने मिलकर अपने निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया, इस तरह से बिना सड़क निर्माण के राशि आहरित कर ली गई सप्लायर्स के नाम पर भुगतान हो गया। मजदूरों को कोई राही नहीं दी गई, जिससे लगता है कि फर्जी बिलों के माध्यम से भुगतान कर दिया गया इसमें सामग्री विक्रेताओं को जांच के दायरे में लिया जाना आवश्यक है।

इसके अलावा, मुख्यमंत्री जनकल्याण संबल योजना अंतर्गत अंत्येष्टि सहायता राशि का भी दुरुपयोग किया गया। जानकारी के अनुसार, 5 माह में मात्र 95,000 रुपये निकाले गए, जबकि वास्तविक लाभार्थी केवल तीन चार लोगों को ही राशि मिली। बता दें कि ऐसा ही तमाम भुगतान 15वें और पांचवे वित्त से किया गया है। यदि विभाग के द्वारा सरपंच सचिव के द्वारा किए गए वर्ष 2023 से 2025 अब तक की आहरण की राशि की निष्पक्ष जांच की जाए तो कई लाख रुपयों का घोटाला उजागर हो सकता है। आखिर जिला प्रशासन और उच्च अधिकारी कब ऐसे भ्रष्ट सरपंच और सचिव के खिलाफ कठोर कार्रवाई करेंगे। यह आने वाले कुछ दिनों में साफ हो जाएगा।

इस मामले में जांच और कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है, ताकि ग्रामवासियों के लिए स्वीकृत विकास कार्य सही मायनों में पूरे हों और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके।

अधिकारी चुपचाप देख रहे है भ्रष्टाचार का तांडव

इस मामले पर पत्रकारों से समनापुर CEO जतिन ठाकुर ने कहा कि अजगर पंचायत में भ्रष्टाचार की कई शिकायतें मिली है। पूरी टीम के साथ जाकर मै जांच करूंगा और कार्यवाही होगी। जिम्मेदार अधिकारियों के इस तरह के रटे रटाए जवाबों से न पंचायतों की कार्यप्रणाली बदलने वाली है और न भ्रष्टाचार रुकने वाला है। पहले से शिकायतों के बाद भी सीईओ किस के इशारे का इंतजार कर रहे थे? जनपद पंचायत ग्राम पंचायतों के कार्यों की निगरानी और क्रियान्वयन के लिए स्थापित की गई है। मोटी तनख़ाह वाले कई अधिकारी मैदानी रूप से नियुक्त है तब भी सरकारी राशि पर डाका डाल दिया जाता है और दरोगा जांच की बात कहे तो यह मजाक है। ऐसे मामलों में मैदानी अधिकारी, सब इंजीनियर, जनपद के लेखा अधिकारी, ऑडिटर के खिलाफ भी जांच होना चाहिए़ और उनकी जिम्मेदारी तय करके उनके विरुद्ध भी कार्यवाही की जाना चाहिए़। सिर्फ कुर्सी तोड़ने वाले अधिकारी पर जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को कड़ी कार्यवाही करना चाहिए़। जनपद में अधिकारियों की नियुक्ति शासन की योजनाओं के सही क्रियान्वयन और सरकारी राशि के सदुपयोग के लिए की गई है पर इनके बंद आंख, काम और मुंह पंचायतों में भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रहा है सिर्फ सरपंच और सचिव दोषी नहीं है।

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