खुड़िया में चरनोई भूमि से दबंगों का अतिक्रमण हटाने, ग्रामीणों की शिकायत

पटवारी द्वारा मौके की निरीक्षण कर रिपोर्ट पेश की जाएगी

बैगांचल एक्प्रेस, डिंडौरी, 21 सितंबर 2025, जनपद पंचायत समनापुर क्षेत्रांतर्गत ग्राम पंचायत प्रेमपुर के खुड़िया स्कूल टोला में गांव के गौचर, गौठान चरनोई भूमि को गांव के कुछ दबंगों के द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया हैं। जिससे परेशान होकर गांव के ग्रामीणों और पशु मालिकों ने चरनोई भूमि से अतिक्रमण हटाने की आवाज उठाई और हल्का पटवारी के सामने चरनोई भूमि से अतिक्रमण हटाने की बात रखी गई। जिस पर हल्का पटवारी ने 20 सितंबर को मौका स्थल पर पहुंच कर राजस्व रिकार्ड अनुसार मौके का चिन्हांकन कर पंचनामा तैयार कर कागजी कार्रवाई उच्चाधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करने की बात कही हैं। ग्रामवासियों को उम्मीद है कि पटवारी द्वारा स्थल निरीक्षण कर जो रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी उस पर उच्चाधिकारियों द्वारा जनहित को देखते हुए निष्पक्ष और न्यायसंगत कार्यवाही की जावेगी और जल्दी ही चरनोई भूमि को दबंगों के अवैध कब्जे से मुक्त कराया जाएगा। ग्रामीणों की अपेक्षा है कि प्रशासन अतिशीघ्र गांव में किए गए अतिक्रमणों के विरुद्ध कार्यवाही करे।

प्रदेश सरकार के नियमानुसार प्रत्येक गांव में दो प्रतिशत भूमि चरनोई के नाम पर छोड़ी गई हैं। परंतु किसी भी गांव में चरनोई भूमि उपलब्ध नहीं हैं। क्योंकि अधिकांश भूमि में अतिक्रमण किया जा चुका हैं जिससे पशुपालकों को मवेशी चराने के लिए जगह ही नहीं बची हैं। चरनोई भूमि के साथ नदी नाले तक में अतिक्रमण हो चुके हैं। जिस वजह से मवेशियों को पीने का पानी तक नहीं मिल पा रहा हैं। कुछ जगह तो नाले तक गायब हो गए हैं। इसके साथ ही नदी की चौड़ाई कम कर दी गई हैं। आधे नदी में अतिक्रमणकारियों द्वारा खेती की जा रही हैं। इस वजह से पशुपालन से किसानों का मोहभंग होते जा रहा हैं। जबकि शासन द्वारा कृषकों को पशुपालन में प्रोत्साहन स्वारूप 25% तक का अनुदान देने का प्रावधान रखा गया हैं। जिस संबंध में प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा अपने हर मंच से इस महत्वपूर्ण योजना का ऐलान किया जा रहा हैं। नदी, नाले एवं चरनोई भूमि अतिक्रमण मुक्त होने से किसानों को पशुपालन की ओर लौटने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता हैं। जिससे क्षेत्र में दुग्ध उत्पादन एवं जैविक खेती को भी बल मिलेगा।

ऐसे भी शासकीय भूमि का बंदरबांट किया जा रहा हैं। शासकीय भूमि का बटांकन कर निजी नामों में दर्ज कर दिया गया हैं। साथ ही रकवा भी बढ़ा दिया गया हैं। अब नए पटवारी सीमांकन करवाने जाएंगे तो स्वाभाविक विवाद, लड़ाई, झगड़ा एवं मारपीट होगा ही जिससे किसानों की समस्या दिनों दिन बढ़ते ही जा रही हैं। किसानों की समस्या के निराकरण तभी होगा जब चरनोई भूमि के साथ शासकीय भूमि अतिक्रमण मुक्त हो जाये।

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