बचटोला प्राइमरी भवन जर्जर होने से नौनिहाल पैदल कई किलोमीटर दूर पढ़ने जाने को मजबूर

बैगाचक एक्सप्रेस, डिंडोरी, 12 सितंबर 2025, प्रदेश शासन बच्चों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के लिए बहुत सारी योजनाएं चला रही है ताकि हर बच्चा शिक्षित हो। वहीं जिले में एक ऐसा गांव भी है जहां प्राइमरी स्कूल के 18 बच्चों के लिए वर्षों से भवन ही नहीं है जिसके चलते यहां के बच्चों को पिछले 3 वर्षों से कई किलोमीटर दूर पैदल चलकर स्कूल जाना पड़ता है। करंजिया विकासखंड की सैलवार ग्राम पंचायत के पोषक गांव बचटोला में कुछ वर्ष पहले तक खंडहर भवन में शाला लगती रही जर्जर भवन को देखते हुए स्कूल खुले में लगने लगा तब स्थानीय लोगों ने इसको लेकर शिकवा शिकायतें की तब जिम्मेदार हरकत में आए और आनन फानन में स्कूल का संचालन बंद करने का फरमान जारी कर दिया गया और बच्चों को सैलवार स्कूल में भेजने के निर्देश दिए गए। शिक्षकों ने अधिकारियों के मौखिक आदेश का तत्काल पालन किया और बच्चों को सेलवार स्कूल भेजा जाने लगा। छोटे छोटे प्राइमरी स्कूल के बच्चों को कच्चे पक्के रास्ते से कई किलो मीटर पैदल जाना पड़ता है किंतु वर्षों बाद भी विभाग ने कोई सुध नहीं ली जिससे स्थानीय नागरिकों में आक्रोश है और बच्चे नियमित स्कूल जाने में परेशानी का सामना कर रहे है। शासन की मंशानुसार विभाग के अधिकारियों को तत्काल इस ओर गंभीरता से प्रयास कर इस गांव में स्कूल भवन की व्यवस्था की जानी चाहिए।

मुख्य समस्याएँ :स्कूल भवन की कमी: गांव में प्राथमिक स्कूल के लिए कोई भवन नहीं है क्योंकि पुराना भवन जर्जर होने के कारण ध्वस्त कर दिया गया था। पिछले तीन साल से, बच्चों को पास के सैलवार गांव में पढ़ने के लिए जाना पड़ रहा है।लंबी और कठिन यात्रा: बच्चों को हर दिन 2 से 5 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है, जिसमें खेतों की मेड़ों और कच्चे रास्तों से होकर जाना शामिल है। बारिश के मौसम में, यह यात्रा और भी कठिन हो जाती है, जिसमें कीचड़, फिसलने का डर और कांटों वाली झाड़ियों के बीच से होकर गुजरना पड़ता है।

सुरक्षा का खतरा: रास्ते में बच्चों को सांप, अजगर और बिजली गिरने का डर रहता है, जिससे उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है।

अपर्याप्त शैक्षणिक सुविधाएँ: जिस स्कूल में इन बच्चों को पढ़ने के लिए भेजा जाता है, वहाँ भी पर्याप्त कमरे नहीं हैं। इसलिए, दो-दो कक्षाओं के छात्रों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जाता है, जिससे पढ़ाई का माहौल प्रभावित होता है।

अधिकारियों की लापरवाही: ग्रामीण और अभिभावक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से नाराज़ हैं। उनका कहना है कि पुराने भवन की खराब स्थिति के बारे में बार-बार सूचित किए जाने के बावजूद, कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

ग्रामीणों और बच्चों की मांगें 🙏गांव में स्कूल भवन का निर्माण: ग्रामीण प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि उनके अपने गांव में ही एक नया और पूरी तरह से सुसज्जित स्कूल भवन बनाया जाए।यात्रा से मुक्ति: बच्चों को हर दिन लंबी और खतरनाक यात्रा से राहत दिलाई जाए, जिससे उनका स्कूल जाने का उत्साह बना रहे।

क्या कहते हैं सरपंच और प्रधान अध्यापक 🗣️

संगीता परस्ते (सरपंच, ग्राम पंचायत सैलवार): उन्होंने कहा कि नया भवन जल्द बनना था, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। उन्होंने इस संबंध में कलेक्टर और संबंधित अधिकारियों को आवेदन दिया है।

सोनू सिंह मरावी (प्रधान अध्यापक, प्राइमरी स्कूल बचटोला): उन्होंने भी स्वीकार किया कि नया भवन बनने से बच्चों को सुविधा मिलेगी और उन्होंने इस मामले में उच्च अधिकारियों को सूचित किया है।इस पूरे मामले में यह स्पष्ट है कि प्रशासन की उदासीनता और लापरवाही के कारण छोटे बच्चों को पढ़ाई के लिए इतनी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनके भविष्य पर बुरा असर पड़ रहा है।

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