सूखे पड़े डिंडोरी परिषद के प्याऊ, गर्मी में जनता से मजाक

जल गंगा संवर्धन अभियान” बना सरकारी खेल

बैगांचल एक्प्रेस, डिंडोरी, बढ़ती गर्मी के बीच डिंडोरी नगर परिषद ने औपचारिकता पूरी करने के लिए सार्वजनिक प्याऊ की शुरुआत बिना पानी के कर दी है। भीषण गर्मी में जिला मुख्यालय में ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले आमलोगों, यात्रियों के साथ साथ सड़क किनारे कारोबार करने वाले छोटे कारोबारी, मजदूरों के सूखे हलक जब नगर परिषद के सूखे पड़े प्याऊ देखते है तो उन्हें व्यवस्था के इस मजाक और जिला मुख्यालय में बैठे तमाम जिम्मेदार अधिकारियों की निष्क्रियता और लापरवाही पर गुस्सा तो आता है पर कोई कर क्या सकता है जब पूरा का पूरा कुनबा अपने पावर के गुरूर में हो उसे न आम आदमी की समस्याओं से मतलब है और न सरकार की योजनाओं के महत्व से। उनकी ड्यूटी तो सिर्फ कागजी खानापूर्ति तक सीमित है जिसके आंकड़े जिले से प्रदेश, प्रदेश से केंद्र तक पहुंचना जरूरी है।भीषण गर्मी के बीच नगर परिषद द्वारा शहर में सार्वजनिक प्याऊ के शेड तो लगा दिए गए हैं। लेकिन वहां पानी की व्यवस्था नहीं हो पाई है। जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोग इसे केवल दिखावा करार दे रहे हैं। नगर परिषद से मिली जानकारी के अनुसार कॉलेज तिराहा, यातायात तिराहा, बस स्टैंड के दो स्थानों, मंडला बस स्टैंड, समनापुर तिराहा और पुरानी डिंडोरी सहित कुल आठ स्थानों पर “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तहत प्याऊ के शेड लगाए गए हैं। शेड पर मुख्यमंत्री, नगर परिषद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और पार्षदों के फोटो भी लगाए गए हैं। हालांकि, इन स्थानों पर न तो मटके रखे गए हैं और न ही पानी उपलब्ध कराया गया है। स्थिति यह है कि कई जगहों पर ये शेड आवारा पशुओं और राहगीरों के बैठने का स्थान बन गए हैं। बस स्टैंड के पास दुकान संचालित करने वाले दुकानदार का कहना था कि शेड लगाए हुए करीब पांच दिन हो चुके हैं, लेकिन अब तक पानी की कोई व्यवस्था नहीं हुई है। गर्मी में यात्री पानी के लिए भटक रहे हैं। इस अव्यवस्था को लेकर अध्यक्ष ने नाराजगी व्यक्त करते हुए परिषद में अधिकारियों और कर्मचारियों की मनमानी और लापरवाही पर कार्यवाही की बात कहते हुए बताया कि प्याऊ में मटके रखने और पानी की व्यवस्था के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि शीघ्र ही सभी स्थानों पर पानी उपलब्ध करा दिया जाएगा।

अफसरशाही और बाबूराज से जूझता नगर परिषद

गौरतलब है कि डिंडोरी नगर परिषद अध्यक्ष का पद अनुसूचित जनजाति महिला के लिए आरक्षित है। पदस्त अध्यक्ष के सीधे सरल व्यवहार का फायदा परिषद के अधिकारी उठा रहे है। परिषद में निर्णय लेने में जन प्रतिनिधियों की भूमिका है किंतु व्यवस्थाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी अधिकारी और कर्मचारियों की है किंतु यहां हर गड़बड़ी के लिए अध्यक्ष को जिम्मेदार ठहराकर उनकी छवि को खराब किया जा रहा है। कर्मचारी पूरी तरह से लापरवाह है व्यवस्थाएं निष्क्रिय है। अध्यक्ष के निर्देशों का पालन करना न अधिकारी जरूरी समझते है और न कर्मचारी।CMO की कार्यक्षमता पर उठ रहे सवालनगर परिषद डिंडोरी के कार्यपालन अधिकारी की कार्यक्षमता पर सवाल उठने लगे है। नगर में बन रहे डिवाइडर हो, गति अवरोधक हो, सफाई व्यवस्था हो, सफाई कर्मचारियों का वेतन हो, मुर्गा मछली मार्केट हो, अतिक्रमण का मामला हो। नगर की टूटी फूटी सड़कें, पानी सप्लाई में गड़बड़ियां किसकी जिम्मेदारी है?? व्यवस्थाओं को अंजाम देना जन सुविधाओं को सुचारू रूप से संचालित करना, रिश्वतखोरी रोकना, नकारा अमले पर कार्यवाही करना नगर पालिका अधिकारी का दायित्व है। पर साहब तो मजे करने में लगे है, साहब ने अपने लिए चार पहिया वाहन लगा रखा है। वाहन का उपयोग करके भी वो छोटे से नगर की व्यवस्थाओं को नहीं देख पा रहे है? जिम्मेदारों सम्हाल पा रहे है? जिला प्रशासन को नगर में व्याप्त अव्यवस्थाओं, परेशान जनता की शिकायतों, सूखे प्याऊ जैसें मामलों को गंभीरता से लेते हुए नगर परिषद के अधिकारी के विरुद्ध कार्यवाही की जानी चाहिए।

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