जिला कलेक्टर की कार्यवाही की चेतावनी से बेअसर ठेकेदार और PIU के अधिकारी

बैगांचल एक्प्रेस, जिला प्रशासन के निर्देश, कार्यवाही की चेतावनी के बाद भी यदि पीड़ित, शोषित और गरीब व्यक्ति को न्याय ही नहीं मिले तो ऐसे आदेश और निर्देश का आमजन को क्या फायदा! यदि प्रशासन की चेतावनी पर संबंधित विभाग किसी ऐसे मामले में दोषी ठेकेदार पर कार्यवाही नहीं करता जिसकी लापरवाही से एक बेकसूर मजदूर की मौत हो गई हो तो समझा जा सकता है कि जिले के अधिकारी जिला प्रशासन के निर्देशों को कितनी गंभीरता से लेते है।

ऐसे ही एक मामले को लेकर मेंहदवानी के ग्राम गाजर टोला की निवासी श्रीमती ज्योति बाई 27 जनवरी 26 को जनसुनवाई में अपना आवेदन लेकर पहुंची। उसके पति रामपाल यादव की 7 अक्टूबर 2025 को मेंहदवानी में निर्माणाधीन आई टी आई भवन में कार्य के दौरान तीसरी मंजिल से गिरकर मौत हो गई थी। शासकीय सामुदायिक केंद्र मेंहदवानी में उपचार के बाद स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उसे जबलपुर रेफर कर दिया गया, ठेकेदार के द्वारा उसे उपचार के लिए लाइफ मेडिसिटी, जबलपुर में भर्ती कराया गया जहां 8 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई, जिसके बाद उसका अंतिम संस्कार उसके गृहग्राम में कर दिया गया। मृतक की विधवा को ठेकेदार के साइट सुपरवाइजर द्वारा बीमा राशि, आर्थिक मदद सहित मृतक की पोस्ट मार्टम रिपोर्ट, एफ आई आर की कॉपी, मृत्यु प्रमाण पत्र आदि दस्तावेज उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया। जिससे वह शासन की संबल सहायता योजना आदि का लाभ भी ले सके। मृतक की विधवा की शिकायत है कि विगत चार माग गुजरने के बाद भी ठेकेदार का इंजीनियर उसे संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा रहा है, पूछने पर कहा जाता है कि जब बन जाएगे तब दे देंगे। जिसके चलते विधवा महिला संबल योजना के तहत अनुग्रह सहायता राशि, कल्याणी पेंशन योजना सहित अन्य शासन की योजनाओं के लिये आवेदन नहीं कर पा रही है। विधवा महिला के तीन छोटे छोटे बच्चे है जिनके भविष्य को लेकर चिंतित महिला को मेंहदवानी पुलिस थाने में एफ आई आर दर्ज नहीं होने की बात कहकर वापस कर दिया जाता है। मृतक का पोस्टमार्टम जबलपुर में करवाया गया जिसकी रिपोर्ट भी संबंधितों को दी गई होगी, मृत्यु दुर्घटना से होने के कारण इसकी एफ आई आर भी दर्ज की गई होगी जो ठेकेदार के पास उपलब्ध होगी। किंतु विधवा महिला को नहीं दिए जाने से वह मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बनवा पा रही है और चार माह से संबंधित व्यक्ति के दस्तावेजों के लिए भटक रही है, परेशान होकर मजबूर महिला को अंततः जिला कलेक्टर से जनसुनवाई में गुहार लगाना पड़ती है।

जिला कलेक्टर ने EE को नोटिस जारी कर ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड किए जाने की दी थी चेतावनी
गौरतलब है कि उक्त घटना के उपरांत 13 अक्टूबर को जिला कलेक्ट्रेट में आयोजित TL की बैठक में जिला कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने सख्त कार्रवाई की चेतावनी देते हुए विकासखंड मेहंदवानी स्थित आईटीआई भवन निर्माण में मजदूर की मौत के प्रकरण में कार्यपालन यंत्री (भवन) पारस सिंह को पदीय दायित्वों के निर्वहन में उदासीनता बरतने पर नोटिस जारी किया गया था। कलेक्टर ने कहा कि दुर्घटना की जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश के बावजूद अब तक रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है, जो गंभीर लापरवाही है। इसके लिए पारस सिंह के विरुद्ध म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रस्तावित की जाऐगी।
इसी प्रकरण में निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी से मजदूर की मौत के मामले में ठेकेदार मेसर्स हरगोविंद दास गुप्ता को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। कलेक्टर ने कहा कि मजदूरों से बिना सेफ्टी बेल्ट, हेलमेट और सुरक्षा किट के कार्य कराया जाना गंभीर लापरवाही है। ठेकेदार से सात दिवस में जवाब मांगा गया है, अन्यथा एफआईआर दर्ज कर फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की सख्ती के बाद भी, विधवा महिला भटकने को मजबूर
उक्त घटना पर ठेकेदार ने हमारे प्रतिनिधि को आश्वस्त किया था कि मृतक मजदूर के परिवार को बीमा राशि दिलवाने के साथ साथ वे अपनी तरफ से भी आर्थिक सहयोग करेंगे। किंतु घटना के चार माह बाद भी मृतक के दस्तावेज तक ठेकेदार पीड़ित के परिवार को मुहैया नहीं करवा पा रहा है बीमा राशि दिलवाना तो कोरा आश्वासन ही प्रतीत होता है। मृतक की पत्नी की जानकारी के अनुसार यदि घटना स्थल मेंहदवानी, के पुलिस थाने में घटना की एफ आई आर ही दर्ज नहीं है तब मृतक को दुर्घटना बीमा का लाभ मिलना भी संदिग्ध प्रतीत होता है।
PIU के अधिकारियों की लापरवाही उजागर
पूरे मामले में शासकीय निर्माण एजेंसी PIU के अधिकारियों की लापरवाही उजागर होती है। ठेकेदार द्वारा सुरक्षा मानकों की अवहेलना पर विभाग अब भी लापरवाह बना हुआ है। विभाग के अधिकारी सिर्फ इस बात से संतुष्ट है कि मृतक की विधवा को साप्ताहिक मजदूरी का भुगतान ठेकेदार द्वारा दिया जा रहा है। पर सवाल यह है कि यह मजदूरी उसे कब तक मिलेगी? जब तक ठेकेदार का काम यहां पर चल रहा है उसके बाद परिवार का गुजारा कैसे होगा? मृतक के परिवार को दुर्घटना बीमा का लाभ दिलाने को लेकर विभाग और ठेकेदार द्वारा समय रहते प्रयास नहीं किया जाना, घटना के महीनों बाद भी मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं होना इस बात का संकेत है कि मृतक के गरीब परिजनों के भविष्य को लेकर खुली लापरवाही बरती जा रही है। विभाग और ठेकेदार पर जिला प्रशासन के निर्देश का कोई असर है न ही शासन के प्रावधानों का, मजदूरों की मौत के लिए न तो किसी को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है न ही बेकसूर गरीब मजदूरों को जरूरी सहायता दिलाई जा रही है। तब भी दोषियों पर कार्यवाही नहीं होने शासन की व्यवस्थाओं पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। करोड़ो की कमाई करने वाले निष्ठुर ठेकेदारों और अधिकारियों के लिए गरीब मजदूर की मौत की कीमत कुछ नहीं है। मृतक के बेसहारा हुए बेकसूर बच्चों और विधवा के लिए भविष्य के लिये कोई सार्थक सहयोग की व्यस्था कर पाने में अक्षम शासन प्रशासन पर बड़ा सवाल खड़ा होता है।
जिले में मजदूरो के शोषण पर कब होगी कार्यवाही?
जिले में यह पहली घटना नहीं है जब बेसहारा, अशिक्षित, गरीब मजदूरों के साथ ऐसा अन्याय होता दिखाई दे रहा है। पूर्व में भी PIU के निर्माणाधीन स्कूल भवन से गिरकर करंजिया ब्लॉक में एक मजदूर की मौत हो गई थी किंतु मजदूर के परिजनों को दुर्घटना बीमा की राशि नहीं मिली। डिंडोरी विकास खंड के ग्राम छपरी में निर्माणाधीन पानी की टंकी से गिरकर मजदूर की मौत के मामले में मृतक की विधवा को बीमा राशि नहीं मिली थी वैसी ही स्थिति इस घटना में भी देखी जा रही है। इन सभी घटनाओं में मृतक के परिजनों को न तो दुर्घटना बीमा की राशि मिली, न ही दोषी ठेकेदारों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया और न ही संबंधित विभाग के लापरवाह अधिकारियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही की गई। जिला प्रशासन शासकीय निर्माण कार्यों में मरने वाले बेकसूर मजदूरों के परिवारों को उनका हक और न्याय दिलाने की दिशा में ठोस कार्यवाही अब तक नहीं कर पाया है। जिससे ठेकेदार और अधिकारियों की लापरवाही खुलेआम दिखाई देती हैl निर्माण कार्यों में खुलेआम सुरक्षा मानकों और श्रमिक कल्याण के प्रावधानों की अनदेखी की जा रही है जिसका खामियाजा गरीब मजदूरों को भुगतना पड़ रहा है। उक्त मामले में जिला कलेक्टर द्वारा ठेकेदार और विभाग के लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्यवाही की जनपेक्षा है।

