स्टांप ड्यूटी चुकाकर रजिस्ट्री कराने के बाद भी नामांतरण के लिए भटक रहे ग्रामीण

नामांतरण के लिए जनसुनवाई में लगानी पड़ी गुहार

बैगांचल एक्सप्रेस, डिंडोरी, शहपुरा तहसील अंतर्गत ग्राम सचौली धनगांव के एक निर्धन कृषक ने दिनांक 3 फरवरी 2026 मंगलवार को डिंडोरी कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में आवेदन देकर अपने द्वारा खरीदी हुई जमीन का नामांतरण कराने की गुहार लगाई। आवेदक ने जनसुनवाई में कलेक्टर को दिए आवेदन में उल्लेख किया कि ग्राम सचौली धनगांव, प.ह.नं. 28, रा.नि.म. रयपुरा, तहसील शहपुरा, जिला डिण्डौरी में स्थित भूमि खसरा नम्बर 189/1, 210/1, 362/1, 284/1 रकवा क्रमशः 1.06. 0.07, 0.22, 0.15 हेक्टयर भूमि टेकचंद पिता कुंजी लाल झारिया के नाम से राजस्व अभिलेखों में एकमात्र भूमिस्वामी हैसियत दर्ज थी, जिस पर दिनांक 09/01/25 को एकमात्र भूमिस्वामी मूल विक्रेता टेकचंद पिता कुंजीलाल झारिया के द्वारा रजिस्ट्री कार्यालय शहपुरा में स्वयं उपस्थित होकर रजिस्टर्ड विक्रय विलेख के माध्यम से भूमि समनू झारिया व रोहणी झारिया आवेदक/ क्रेता के पक्ष में रजिस्टर्ड विक्रय विलेख का निष्पादन कराया गया था।

जिसके बाद आवेदक के द्वारा न्यायालय नायब तहसीलदार वृत्त रयपुरा के समक्ष नामांतरण आवेदन प्रस्तुत किया गया परंतु तहसीलदार के द्वारा आवेदक का आवेदन खारिज कर दिया गया। जिसके पश्चात आवेदक के द्वारा उक्त प्रकरण की अपील एसडीएम शहपुरा के समक्ष की गई परंतु एसडीएम शहपुरा के द्वारा भी अपील खारिज कर दी गई। आवेदक शासन को स्टाम्प ड्यूटी चुकाकर रजिस्टर्ड विक्रय विलेख के माध्यम से भूमि क्रय करने के बाद भी अपनी क्रयशुदा भूमियों में अपना नाम दर्ज नहीं करा पा रहा है और अपने पक्ष में नामांतरण नहीं करा पा रहा है। जबकि शासन के स्पष्ट प्रावधान व नियमानुसार रजिस्टर्ड विक्रय विलेख का क्रेता के पक्ष में निष्पादन करना राजस्व न्यायालयों का दायित्व है एवं राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज कराना क्रेता आवेदक का अधिकार है। जिससे आवेदक वंचित हो रहा है और जगह जगह आवेदन निवेदन करने को मजबूर है। अतः जनसुनवाई के माध्यम से कलेक्टर महोदय से आग्रह किया गया कि उपरोक्त भूमियों में रजिस्टर्ड विक्रय विलेख के आधार पर आवेदक के पक्ष में क्रयशुदा भूमियों का नामांतरण कराया जाए। अब यहां सवाल यह उठता है कि शासन को भारी भरकम स्टांप ड्यूटी चुकाकर रजिस्ट्री कराने के बाद भी यदि नामांतरण कराने के लिए आमजन को भटकना पड़ेगा तो फिर शासन के द्वारा स्टाम्प ड्यूटी किसलिए ली जा रही है और शासन के मातहत राजस्व अधिकारी कर्मचारी नियमों को अनदेखा कर नियम विरुद्ध कार्य क्यों कर रहे हैं जबकि शासन ने हाल ही में रजिस्ट्री के बाद सीधे नामांतरण के निर्देश भी दिए हैं। परंतु उन निर्देशों का फायदा आमजन को नहीं मिल पा रहा है और आदिवासी जिलों में शासन की मंशा के विपरीत कार्य हो रहे हैं। जिससे आमजन परेशान हो भटक रहे हैं।

राजस्व मामलों में दलालों का बोलबाला

जिले में रजिस्ट्री से लेकर फौती नामा, भूमि के नामांतरण, नक्शे कटवाने जैसे राजस्व प्रकरणों का निपटारा बिना दलालों के नहीं हो पाना, स्पष्ट करता है कि राजस्व संबंधी कार्यों में दलाल पूरी तरह से सक्रिय है। पटवारी से लेकर तहसील और एसडीएम कार्यालयों में राजस्व के मामले निपटाना आम आदमी के लिये मुश्किल है बिना दलालों के भूमि संबंधी मामलों के नहीं हो पाने से गरीब आदमी परेशान हो रहा है। रजिस्ट्री के माध्यम से भूमि क्रय किये जाने के बाद भी भूमि का नामांतरण आवेदन खारिज किया जाना इसका उदाहरण मात्र है जिस पर जिला प्रशासन को मामले की जांच कराकर दोषियों पर कठोर कार्यवाही की जानी चाहिए, जिससे भूमि प्रकरणों के निराकरण में आम आदमी को राहत मिल सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!