युवा मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष का नगर आगमन, मुख्यमार्ग की यातायात व्यवस्था चरमराई

आम राहगीर और स्कूली बच्चे होते रहे परेशान

देर रात तक सड़क से नहीं हटाया गया टैंट

बैगांचल एक्प्रेस, डिंडौरी, बुधवार को भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष के डिंडौरी आगमन पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने जमकर स्वागत किया। जिला मुख्यालय में जगह-जगह स्वागत द्वार और मंच लगाए गए। पुराने यातायात कार्यालय से पैदल रैली निकाली गई। बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी रही।

शहर की यातायात व्यवस्था चरमराई

इस दौरान शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सुबह से ही भाजपा कार्यकर्ता विभिन्न स्थानों पर प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत की तैयारियों में जुट गए थे। नगर के प्रमुख मार्गों पर स्वागत द्वार, बैनर और झंडों के साथ कई स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। जैसे ही पैदल रैली शहर में प्रवेश हुई, उसके पीछे बड़ी संख्या में चार पहिया एवं दोपहिया वाहन शामिल हो गए। इससे मुख्य बाजार, बस स्टैंड, अस्पताल मार्ग, तथा अन्य प्रमुख चौराहों पर लंबा जाम लग गया।

स्कूली बच्चे और मरीज होते रहे परेशान

रैली के कारण सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों और मरीजों को उठानी पड़ी। कई स्कूल वाहन लंबे समय तक ट्रैफिक में फंसे रहे, जिससे बच्चों को पर घर पहुंचने में कठिनाई हुई। वहीं एक एंबुलेंस भी जाम में फंसने की जानकारी सामने आई। जिससे आसपास मौजूद लोगों ने चिंता जताई कि आपातकालीन सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था नहीं होने से गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। यातायात व्यवस्था संभालने के लिए पुलिसकर्मी सुबह लगभग 10 बजे से ही मुख्यमार्ग पर तैनात किए गए थे। इसके साथ ही अतिरिक्त पुलिस बल को भी तैनात किया गया था। कई पुलिसकर्मी बिना भोजन किए घंटों तक यातायात नियंत्रित करने में जुटे रहे, ताकि स्थिति सामान्य बनी रहे। इसके बावजूद वाहनों का दबाव इतना अधिक था कि समय-समय पर जाम की स्थिति बनती रही, किंतु आमलोगों और वाहनों को रोके जाने के अलावा कोई वैकल्पिक प्रयास संभव नहीं था।

सड़क पर जाम से राहगीर होते रहे परेशान

नगरवासियों का कहना है कि राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रम लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं। लेकिन इनके आयोजन के दौरान प्रशासन की आमजन की सुविधा और यातायात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। वही आयोजकों और ऐसे संगठनों को शक्ति प्रदर्शन के साथ साथ अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। राजनैतिक उत्साह के बीच नगर में आमलोगों को बेवजह परेशान होने से बचाया जाना भी इन संगठनों की जिम्मेदारी है।

यदि पहले से वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए जाएं और रैली का समय एवं रूट व्यवस्थित किया जाए तो लोगों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सकता है।

राजनैतिक, सामाजिक आयोजन के लिए बिरसा मुंडा स्टेडियम ग्राउंड है निर्धारित

जिला प्रशासन के निर्देशों को सभी संगठनों के लिए समानता और सख्ती से लागू किया जाना चाहिए़। जिला प्रशासन द्वारा विभिन्न संगठनों द्वारा किए जाने वाले आयोजन, प्रदर्शन और धरना आदि पर कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास रोक लगाते हुए ऐसे सभी आयोजनों को बिरसा मुंडा स्टेडियम ग्राउंड में किए जाने के निर्देश दिए है। ताकि कलेक्ट्रेट परिसर के कार्यालयों में होने वाले शासकीय कामकाज और आसपास की शैक्षणिक संस्थाओं की गतिविधियां प्रभावित नहीं हो। वही दूसरी ओर पूरा दिन शहर का यातायात बाधित होने पर किसी तरह की रोक नहीं लगाए जाने को लेकर जनता के मन में सवाल उठते है कि आखिर प्रशासन शहर भर की यातायात व्यवस्था प्रभावित होने पर भी कार्यवाही क्यों नहीं करता। जिला मुख्यालय के इकलौते मुख्यमार्ग को अवरुद्ध कर राजनैतिक आयोजनों को अनुमति क्यों दे दी जाती है और यदि ऐसे आयोजन बिना अनुमति के किए जाते है तो उस पर कार्यवाही क्यों नहीं की जाती? जिला प्रशासन को सभी शैक्षणिक संस्थाओं, शासकीय कार्यालयों और यातायात व्यवस्थाओं को देखते हुए सभी राजनैतिक दलों, संगठनों और सामाजिक आयोजनों पर बिना किसी भेदभाव के निर्णय लिया जाना चाहिए। नगर की यातायात व्यवस्था, जिला चिकित्सालय क्षेत्र और स्कूल, कॉलेजो के समय का विशेष तौर पर ध्यान रखते हुए आयोजन स्थलों के लिए अनुमति दी जाना चाहिए। इस तरह की अव्यवस्था से न सिर्फ यातायात प्रभावित होता है बल्कि आमलोगों के नियमित कामकाज के अलावा शहर के एकमात्र मार्ग पर चलने वाला कारोबार भी प्रभावित होता है जिससे करोबारियों को भी नुकसान उठाना पड़ता है।

देर रात तक सड़क पर लगा रहा टैंट

आयोजन समाप्त होने के बाद भी जिम्मेदार आयोजकों द्वारा आमजनता और यातायात में हो रहे व्यवधान की कोई परवाह नहीं की जाती। आयोजन समाप्त होने के तत्काल बाद टैंट हटा लिए जाए तब भी लोगों को राहत मिल सके। किंतु यहां आयोजन समाप्त होने के बाद आयोजक और कार्यकर्ता तो गायब हो जाते है पर देर रात तक सड़क पर टैंट तने रहते है, जिसकी चिंता न तो आयोजकों को होती है न प्रशासन को। आखिर आमलोगों को बेवजह परेशानी में डालकर ऐसे संगठन साबित क्या करना चाहते है? यह विचारणीय विषय के साथ साथ समाज के प्रति जिम्मेदार आयोजकों के गैर जिम्मेदाराना रवैए का प्रतीक भी है, जिसे रोका ही जाना चाहिए। परेशान होने वाले आमलोग हमारे समाज के ही लोग है जो ऐसे कार्यक्रमों के आयोजकों और कार्यकर्ताओं के ही परिजन है, बच्चे है या फिर महिलाएं और मरीज है, इनके प्रति सभी की जिम्मेदारी है कि उन्हें अनावश्यक परेशानी उठाने की मजबूर नहीं किया जाए।

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