
बैगांचल एक्सप्रेस, डिंडोरी, जिले में आजादी के बाद से लगातार सरकारी प्रयासों के बाद भी आदिवासी बहुल जिले के ग्रामीण अपनी प्यास बुझाने के लिए नदी, नालों, झिरिया पर ही निर्भर दिखाई देते है। जल आपूर्ति के नाम से वर्षों से चल रहे तथाकथित सरकारी प्रयासों के बाद भी कुएं और हैंडपंप हमेशा गर्मियों के पहले सूखे की दिखाई देते रहे है। इन सरकारी प्रयासों पर सरकार का पैसा तो पानी की तरह बहा पर गांव वालों के हलक सूखे ही रहे। स्थानीय गांव के लोग आज भी पीने के पानी की तलाश में तबिलिया, कसेडी़ लिए आबादी से दूर भटकते देखे जा रहे है। भले ही केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी योजना अंतर्गत वर्ष 2024 तक हर घर पानी पहुंचने के कड़े संकल्प के दो साल गुजर जाने के बाद भी प्रशासन के पास जल संकट की रोज शिकायतें आ रही है, परेशान ग्रामीणों द्वारा कभी कही तो कभी कही सड़कों पर खाली बर्तन रखकर पानी की मांग को लेकर जाम लगा दिया जाता है।
“जल जीवन मिशन” की जमीनी हकीकत और कागजी खानापूर्ति में अंतर
वर्ष 2919 से लागू जल जीवन मिशन अंतर्गत जिले भर में काम तो जोरो पर हुआ। सरकार द्वारा स्वीकृत योजनाओं पर पैसा भी जमकर खर्च किया गया किन्तु ग्रामीण अंचलों में आज भी लोग जल संकट से जूझ रहे है।

जल जीवन मिशन हितग्राही मूलक केंद्र प्रवर्तित योजना योजना है जिसकी शुरुआत 15/8/2019 से की गई थी।जल जीवन मिशन सरकार की अति महत्वपूर्ण योजना है जिसका लक्ष्य सभी घरो तक कार्यशील घरेलू नल कनेकशन उपलब्ध कराना है और स्थानीय जल संसाधनो के सर्वागीण प्रबंधन को बढावा देना है। इस योजना में वर्ष 2024 तक हर घर जल पहुँचाना सुनिश्चत किया जाना था। योजना के तहत जिले के 454 गांवों में योजना को स्वीकृति दी गई है। जिस योजना की पूर्णता का लक्ष्य वर्ष 2024 रखा गया था वर्तमान 2026 तक योजना से जिले में ग्रामीणों को पूरी तरह से लाभ नहीं मिल पा रहा है। शासकीय दस्तावेजों, समीक्षा और विश्लेषणों में आंकड़ों की कागजी खानापूर्ति भले ही समयबद्ध कर दी जाती हो किन्तु जिले की हकीकत यह है कि गर्मी की शुरुआत होते ही मार्च माह में पेयजल को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में न सिर्फ कोहराम मचने लगा है बल्कि स्थानीय स्तर पर शिकवा शिकायतों के बाद जल संकट का निराकरण नहीं होने पर बेचैन ग्रामीण बड़ी संख्या में अब सीधे जिला कलेक्टर की ओर रुख कर रहे है ताकि गर्मियों में कम से कम गांव में लोगों की प्यास तो बुझ सके। जल आपूर्ति के लिए जिम्मेदार विभागो द्वारा दस्तावेजों में शासन से स्वीकृत राशि को पानी की तरह बहाए जाने के बाद भी गांव गांव से प्यासे लोग जिला कलेक्टर से पानी की मांग कर रहे है। शिकायतों पर आदेश निर्देशों के बाद भी पर्याप्त और पूर्ण समाधान नहीं होने से ग्रामीण अंचल में लोग परेशान है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार डिंडौरी में जल जीवन मिशन की पिछली समीक्षा बैठक में 31 मार्च तक प्रगतिरत योजनाएं पूर्ण करने के सख्त निर्देश जिला कलेक्टर द्वारा दिए गए है। कलेक्टर की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जल जीवन मिशन की विस्तृत समीक्षा बैठक में जिले में संचालित नल-जल योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा करते हुए लंबित कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। जानकारी के अनुसार जिले के स्वीकृत 454 ग्रामों में से 126 ग्रामों में योजनाएं वर्तमान में प्रगतिरत हैं। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इन सभी कार्यों को हर हाल में 31 मार्च 2026 तक पूर्ण किया जाए। कलेक्टर के निर्देश के अनुसार जिले में जल आपूर्ति की व्यवस्था हेतु निर्धारित तिथि को केवल 5 दिन शेष है।
जनसुनवाई में जल संकट को लेकर बढ़ती शिकायते
जिले में अभी गर्मी की शुरुआत है किंतु अधिकांश गांवों में लोग जल संकट का सामना कर रहे है। आगे भीषण गर्मी में स्थिति क्या होगी और प्रशासन इससे कैसे निपटेगा यह मात्र सवाल ही बनकर रह जाएगा। सरकारी योजनाओं के लक्ष्य वर्षों से पूरे होते रहे है पर जिले के ग्रामीणों की समस्या अब भी जस की तस बनी हुई है, जिसका समाधान परेशान ग्रामीणों को ही निकलना है। जल संकट से जूझते लोगों को ही तय करना है कितनी दूर से किस नदी, झिरिया और कुएं से पानी लाना है और कैसे संकट से निपटना है।
जिले में बढ़ते जल संकट का संकेत जनसुनाई में दिखाई देने लगे है 24 मार्च को आयोजित जनसुनवाई में बड़ी संख्या में लोग पानी की समस्या को लेकर शिकायत करने पहुंचे जिसमें ग्राम धौरई के चानी टोला में बोर बंद, बासी देवरी के छपरी टोला के निवासी आधा किलोमीटर दूर से पीने का पानी लाने मजबूर, धुर्रा माल के भैंसलगान रैयत में कुआं, नदी, नालों को सूखने से लोग परेशान है। ग्राम पंचायत टिकरिया के पौड़ी माल में जल संकट की शिकायत, धानाघाट के भर्रा टोला में दो माह से पानी की आपूर्ति बंद बताई गई। ग्राम चांदरानी के बैगान टोला के लोगों ने झिरिया का पानी पीने की मजबूरी बताई। लोगों को प्रशासन से समस्या के समाधान की बड़ी उम्मीदें है।
जल संकट” जिले की सबसे बड़ी समस्या
जिले में तमाम समस्याएं, अव्यवस्थाएं, भ्रष्टाचार व्याप्त है किंतु शांतिप्रिय जिले के आम लोग इस पर कभी प्रतिक्रिया देते है न विरोध करते है। शासन, प्रशासन को जो करना है करे। किंतु जिले में जल संकट से परेशान लोग आक्रोशित और बेकाबू होकर सड़क पर उतर आते है। जिले में अधिकांश सड़क जाम के मामले पानी की समस्या को लेकर ही सामने आते है जिससे स्पष्ट है कि जिले की सबसे बड़ी समस्या “जल संकट” है। जिसके समाधान के लिए गैर संगठित और गैर राजनैतिक विरोध प्रदर्शन करने जिले में जनता मजबूर हो जाती है। सरकारी दावे जो भी हो पर जिला वर्षों से जल संकट से जूझ रहा है। जिले में जल आपूर्ति के लिए कुएं खोदने , हैंडपंप खनन, नल जल योजना, जल जीवन मिशन पर पैसा पानी की तरह बह गया। शासकीय दस्तावेजों में कोई भी योजना असफल नहीं रही किंतु इन तमाम सरकारी प्रयासों के बाद भी आमजन पानी के लिए परेशान है। जिस पर स्थानीय, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवी, बुद्धिजीवियों को आगे आकर इस विकराल समस्या के निदान के प्रयास करने होगे तब ही कोई हम निकलने की संभावना दिखाई देती है।

